Home Delhi दीपा वोहरा बहल का जिंदगी को जीने का नया अंदाज

दीपा वोहरा बहल का जिंदगी को जीने का नया अंदाज

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असल न्यूज़: (शुमाईला खान) दीपा वोहरा बहल इस दौर की एक ऐसी पेंटर हैं जिन्होंने पेंटिंग को अपने जीवन में उपलब्धि और संघर्ष के तौर पर अपनाया और पेंटिंग को साल २०१४-15 में थेरेपी के रूप में अपने जीवन में एक नई अंदाज में शुरू किया जो धिरे धिरे उन के जीवन का एक हिस्सा बनता गया। जो यह पेंटिंग उनकी पहली दो दिवसीय ग्रुप पेंटिंग प्रदर्शनी इन दिनों दिल्ली के बीकानेर हाउस में ‘कहकशां’ नाम से आयोजित की गई है। उन के शानदार पेंटिंग कारनामे को देखते हुए लोगों के अंदर एक अलग ललक और जज्बा पैदा हुआ जिसे लोगों ने उनकी पेंटिंग की बहुत तारीफ की। दीपा वोहरा लोगों की इस तारीफ और सम्मान से प्रभावित होकर फुल टाइम पेंटर बनने का फैसला की।
जिसे वह अब अपने जीवन का पूरा समय पेंटिंग को देने की तैयार हैं।

फुल टाइम पेंटर बनने की अपने जीवन की कहानी बयां करते हुए दीपा बताती हैं २०१४ में उन्हें पता चला कि उनको कैंसर जैसी गंभीर बीमारी घेर रखी है लेकिन फिर भी वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में कुछ अलग करने का जज्बा रखी थी। कई दिनों के बाद उन्होंने कैंसर से उबरने के लिए पेंटिंग का सहारा लिया। वह कलाप्रेमी और कलाह्रदय पहले से ही थीं लेकिन वक़ालत करते हुए कला कहीं पीछे छूट गई थी। लेकिन २०१४ में कैंसर होने के बाद उन्हें यह महसूस हो रहा था कि उनके लिए अब दुनिया खत्म हो चुकी है और वे अपने नए वजूद की तलाशने में लग गई। जीवन की कई प्रयासों के बाद उन्होंने कला का दामन थामा जिस से उन्हें बेहद सुकून मिला और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उबरने में भी बहुत सहायता मिली। उनेक पहले गुरु रहे श्री धनञ्जय चक्रवर्ती. दीपा को वाटर कलर का शौक था और दीपा ने सबसे पहले हाथ उसी पर आजमाया और आज वे वाटर कलर के साथ अन्य माध्यमों में भी काम कर रही हैं। दीपा कहती हैं कि पेंटिंग ने उनके खत्म होती जीवन को नई दिशा देने का काम किया है जिसे वह अपने आप में सुकून महसूस करती हैं और एक मुकम्मल जीवन जीने की राह पर चल रही है और खुद को अभिव्यक्त करने का जरिया दिया है।

दीपा आगे बताती हैं कि मेरी पेंटिंग में लैंडस्केप्स से लेकर पशु-पक्षी और मानव आकृतियाँ सब हैं। मेरी हर पेंटिंग के पीछे एक कहानी होती है, मेरी हर पेंटिंग में, मेरी ही कहानी है चाहे उस कहानी को अभिव्यक्त करने के लिए मैं किसी माध्यम का सहारा बनाऊँ. पेंटिंग मेरे लिए लाइफ थेरेपी और मेडिटेशन बन गया है। दीपा का कहना है कि मुझे खुद पर बहुत गर्व हो रहा है। मैं एक ऐसी दुनिया में हूँ जिससे अभी मैं बिलकुल अनजान हूँ लेकिन मुझे लोगों में अपनी पेंटिंग शेयर करने में मुझे अच्छा लग रहा है, बहुत अच्छा लग रहा है। अपनी पेंटिंग के बहाने में अपनी बात लोगों तक शेयर करके अपने मन को सुकून पहुंचाती हूं।

आगे की योजनाओं पर बात करते हुए दीपा बताती हैं कि मैं सर्दियों में अपनी एकल पेंटिंग प्रदर्शनी करने की योजना बना रही हूँ जहाँ मैं अपनी कुछ नई पेंटिंग्स और नई उपलब्धियों के साथ लोगों को नया संदेश दुंगी।

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