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राजपार्क थाना पुलिस तीन साल के मासूम को अपहरणकर्ताओ से 48 घंटे के भीतर ही छुड़वाया, पांच गिरफ्तार

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प्रभाकर राणा। दिल्ली की राजपार्क थाना पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी तीन साल की मासूम बच्ची के अपहरण के बाद पुलिस महज 48 घंटे में मामले को सुलझाया बच्ची का किडनेप करने वाले गिरोह के सभी सदस्यों को किया गिरफ्तार, आरोपियों ने बच्ची बेचने के लिए किया था। किडनैप मासूम को सकुशल बरामद कर बच्ची के परिवार को सौंपा बच्ची का परिवार राजपार्क थाना पुलिस के एसएचओ समेत तमात टीम और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कर रहा हैं। धन्यवाद. पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से 84500 रूपए नकद राशि भी की बरामद फिल्हाल पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी।

राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही दिल्ली पुलिस आम लोगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। और उसने यह साबित भी कर दिखाया है दिल्ली की राजपार्क थाना पुलिस ने अपने स्लोगन दिल्ली पुलिस दिल की पुलिस को भी सार्थक कर इसका एक जबरदस्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिले के DCP से प्रप्त जानकारी के अनुसार राज पार्क थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल कर एक हंसते खेलते परिवार की ख़ुशी भी दोगुनी कर दी है।

दरअसल पूरा मामला बीते 6 अप्रैल का है जहां बाहरी जिला के राज पार्क थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंगोलपुरी के यू ब्लॉक से तीन साल की मासूम बच्ची के गुम होने की सूचना पुलिस को मिली. जिसके बाद राज पार्क थाना पुलिस समेत बच्ची के परिजनों ने उसे काफी ढूंढा लेकिन उसका कोई सुराग नही मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजपार्क थाना एसएचओ अशोक कुमार के नेतृत्व में ASI अजय कुमार, हैंड कांस्टेबल राजेश, समेत कांस्टेबल घनश्याम, ओमबीर, अजय व निशी आदि की एक टीम गठित की गई चूंकि मामला 3 साल की मासूम के संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने का था तो इसलिए पुलिस पहले से ही अपहरण के एंगल से भी जांच भी कर रही थी।

पुलिस टीम ने भी अपनी सक्रियता दिखाते हुए बच्ची को ढूंढने का काम शुरू कर दिया और आसपास के सेकड़ो लोगो से पूछताछ कर घटना स्थल के करीब लगे दर्जनों कैमरो की फुटेज को खंगाला जिसमे एक फुटेज में उक्त बच्ची के साथ एक महिला की धुंधली सी तस्वीर दिखी।

सीसीटीवी फुटेज में दिख रही संदिग्ध महिला की पुलिस ने गहनता खोजबीन की ओर आखिरकार काफी मशक्कत के बाद उस तक पहुँच गयी जिसकी पहचान रवि और उसकी पत्नी के रूप में हुई। पुलिस ने जब इनसे सख्ती से पूछताछ की तो उन्होने अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया एक महेश नाम के शख्स ने पैसे के बदले इस काम को करने को कहा, जिसके बाद महेश को भी गिरफ्तार किया गया।

महेश ने पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि रामप्रसाद नाम के शख्स ने अपनी बहन को बच्चा देने के लिए यह काम उन्हें सौंपा था जिसके बाद रामप्रसाद को गिरफ्तार कर बच्ची को राजपार्क पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में कुल 5 लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 84500 रूपए नकद राशि भी बरामदगी की गई है।

वहीं बच्ची के परिवार ने बताया कि उनकी मासूम को अपहरण करने वाले दम्पति ने 1 लाख रुपये में अपने पति से अलग रहने वाली महिला को बेच दिया गया था। जिसकी कोई औलाद नही है। फिल्हाल तीन साल की ये मासूम बच्ची अब अपने परिवार के साथ है। और हंस खेल रही है। वहीं अब मासूम बच्ची के परिजन राजपार्क थाना पुलिस की इस कामयाबी के बाद पुलिस टीम की तारीफ़ करते नहीं थक रहे है. ओर हाथ जोड़कर परिवार दिल्ली पुलिस का धन्यवाद कर रहा है।

इसमें कोई दोहराय नहीं है कि इस घटनाक्रम में राजपार्क थाना पुलिस की कार्यशैली काबिले तारीफ है। क्योंकि पुलिस ने जिस तेजी के साथ काम किया उससे एक मासूम ना केवल अपने परिवार को सकुशल वापिस मिल गई है बल्कि बच्ची के साथ होने वाली अनहोनी को भी रोक दिया है। जिसके बाद से परिवार अब पुलिस को अपने लिए भगवान तक बता रहा है।

बरहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही क्योंकि पकड़े गए लोगो मे से दो लोग एक निजी अस्पताल में बतौर वार्ड बॉय का काम करते थे ऐसे में आशंका है कि उन्होंने इस तरह से किसी अन्य वारदात को तो अंजाम नही दिया है। लेकिन जिस तरह से राजपार्क थाना पुलिस ने महज 48 घण्टे में ही एक मासूम के ब्लाइंड अपहरण की गुत्थी को सुलझाते हुए उसे उसके परिवार को सौंपकर जो खुशी परिवार को लौटाई वो काबिले तारीफ है। और दिल्ली पुलिस के स्लोगन दिल्ली पुलिस दिल की पुलिस को भी सार्थक कर दिया है।

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