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निजी स्कूल के शिक्षकों को 58 साल से कम उम्र में रिटायर्ड करना कानून के खिलाफ

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असल न्यूज़: निजी स्कूल में शिक्षकों को 58 साल की उम्र में सेवानिवृत्त किए जाने को दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल ने गैर-कानूनी बताया है। ट्रिब्यूनल ने एक शिक्षिका को 58 साल की उम्र में सेवा समाप्त किए जाने के निजी स्कूल के फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है। ट्रिब्यूनल ने स्कूल प्रबंधन को 4 सप्ताह के भीतर शिक्षिका को बहाल करने का आदेश दिया है।

ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी दिलबाग सिंह पुनिया ने अपने फैसले में दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम के नियम 110 (2) के प्रावधानों का हवाला देते हुए शिक्षकों को 60 साल तक नौकरी करने का अधिकार है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि उन्हें सेवानिवृत किए जाने को गैर कानूनी बताया था। ट्रिब्यूनल ने स्कूल प्रबंधन के उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि नियुक्ति पत्र में सेवानिवृति की उम्र पहले से ही 58 साल तय है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि दो लोगों के बीच हुए करार के आधार पर वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि स्कूल के उप-प्राचार्य को शिक्षक को नौकरी से हटाने अधिकारी नहीं है।

ट्रिब्यूनल ने इसके साथ ही 27 मई, 2019 को शिक्षिका को 58 साल की उम्र में सेवानिवृत करने के लिए पारित आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही स्कूल प्रबंधन को चार सप्ताह के भीतर शिक्षिका उमेश गाबा को दोबारा से बहाल करने का निर्देश दिया है क्योंकि उनकी उम्र अभी 60 साल से कम है। साथ ही पूरा वेतन व भत्ता देने का आदेश दिया है। स्कूल ने ट्रिब्यूनल को बताया था कि शिक्षिका को नौकरी से निकाला नहीं गया है बल्कि 58 साल की उम्र पूरा होने पर नियुक्ति शर्तों के अनुसार सेवानिवृत किया गया है।

स्कूल प्रबंधन पर जुर्माना
दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल ने 58 साल की उम्र में शिक्षिका को सेवानिवृत करने के आदेश को रद्द करते हुए स्कूल प्रबंधन पर 35 हजार रुपये जुर्माना किया है। ट्रिब्यूनल ने शिक्षिका की ओर से पेश अधिवक्ता अनुज अग्रवाल की दलीलों को स्वीकार करते हुए स्कूल प्रबंधन पर पहले लगाए गए 33 हजार रुपये जुर्माना का कोई असर नहीं पड़ा, ऐसे में अब कुछ ज्यादा यानी 35 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाना उचित है। अग्रवाल ने कहा था कि स्कूल ने दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम का पालन नहीं किया, ऐसे में जुर्माना लगाया जाना जरूरी है।

पहले नौकरी से हटाया, फिर सेवानिवृत कर दिया
ट्रिब्यूनल में पेश मामले के अनुसार निजी स्कूल प्रबंधन ने वर्ष 1993 से स्कूल में बतौर शिक्षक काम कर रही उमेश गाबा को अवैध रूप से छुट्टी पर रहने के आरोप में 2018 में नौकरी से निकाल दिया। शिक्षिका ने अपनी मां की मौत की वजह से छुट्टी ली थी। नौकरी से निकाले जाने के खिलाफ अधिवक्ता अनुज अग्रवाल के माध्यम से ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की। इस मामले में बाद में स्कूल प्रबंधन ने नौकरी से हटाने के आदेश को वापस ले लिया। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने याचिका का निपटारा करते हुए स्कूल प्रबंधन पर 33 हजार रुपये जुर्माना किया था। इसके बाद शिक्षिका का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पहले निलंबित किया और बाद में 58 साल की उम्र पूरा होने पर जबरन सेवानिवृत कर दिया। इसके खिलाफ भी उन्होंने याचिका दाखिल की थी। अधिवक्ता अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम के नियम 110 के तहत किसी को 58 साल की उम्र में सेवानिवृत नहीं किया जा सकता है।

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