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कैसे होता है RTPCR टेस्ट, कोरोना जांच के दौरान सीटी स्कैन और सीटी वैल्यू में क्या है अंतर?

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असल न्यूज़: कोरोना वायरस के कई रूप कई तरह से हमारे शरीर को प्रभावित कर रहे हैं। कई मामलों में आरटीपीसीआर टेस्ट भी कोरोना संक्रमण पकड़ नहीं पा रहा है। ऐसे में डॉक्टर लक्षणों के आधार पर लोगों को सीटी स्कैन की सलाह दे रहे हैं। इस तरह से देखें तो अभी कोरोना को पकड़ने के दो रास्ते सबसे ज्यादा कामयाब नजर आ रहे हैं – एंटीजन टेस्ट, आरटीपीसीआर टेस्ट और सीटी स्कैन। जब भी आप इन दोनों में कोई टेस्ट कराते हैं तो कुछ वैल्यू या यूं समझें कुछ अंक सामने आते हैं। आरटीपीसीआर में जो वैल्यू आती है उसे हम सीटी वैल्यू कहते हैं और इसी तरह से सीटी स्कैन में सीटी स्कोर बताया जाता है। 

कैसे होता है आरटीपीसीआर टेस्ट 
आरटी-पीसीआर का मतलब है रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन टेस्ट। बिना ज्यादा विज्ञान में जाए कहें तो इस कुछ इस तरह से समझ सकते हैं कि आपके शरीर में वायरस है या नहीं ये जानने के लिए डीएनए में चेन रिएक्शन करवाया जाता है। इस टेस्ट के जरिए किसी वायरस के जेनेटिक मेटेरियल को टेस्ट किया जाता है। कोरोना एक आरएनए वायरस है। टेस्ट के लिए इस्तेमाल होने वाला आरएनए मरीज के स्वाब से निकाला जाता है।

सीटी स्कोर और सीटी वैल्यू कैसे निकाली जाती है?
सीटी स्कोर से ये पता चलता है कि इंफेक्शन ने फेफड़ों को कितना नुकसान किया है। अगर ये स्कोर अधिक है तो फेफड़ों को नुकसान भी अधिक हुआ है और यदि स्कोर नॉर्मल है तो इसका अर्थ ये है कि फेफडों में कोई नुकसान नहीं हुआ है। इस नंबर को को-रेडस कहा जाता है। यदि को-रेडस का आंकड़ा 1 है तो सब नॉर्मल है, लेकिन यदि को-रेडस 2 से 4 है तो हल्का फुल्का इन्फेक्शन है लेकिन यदि ये 5 या 6 है तो पेशेंट को कोविड माना जाता है। वहीं, सीटी वैल्यू यानी साइकिल थ्रेशोल्ड, ये एक नंबर होता है। आईसीएमआर ने कोरोना वायरस की पुष्टि के लिए ये संख्या 35 निर्धारित कर रखी है। यानी 35 साइकिल के अंदर वायरस मिल जाता है तो आप कोरोना पॉजिटिव होंगे। 35 साइकल तक वायरस ना मिले तो आप नेगेटिव हैं।

सीटी स्कैन क्या है और कैसे काम करता है?
सीटी स्कैन का मतलब है किसी भी चीज को छोटे-छोटे सेक्शन में काटकर उसका अध्ययन करना। कोविड के मामले में डॉक्टर जो सीटी स्कैन कराते हैं, वो है एचआरसीटी चेस्ट यानी सीने का हाई रिजोल्यूशन कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन। इस टेस्ट के जरिए फेफड़ों की एक 3डी यानी त्रिआयामी इमेज बनती है जो बहुत बारीक डिटेल्स भी बताती है। इससे ये पता चल जाता है कि क्या फेफड़ों में किसी तरह का कोई इन्फेक्शन है?

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