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एक नहीं दो-दो बार दी इस कपल ने कोरोना को मात, पढ़ें हौसला बढ़ाने वाली तीन कहानियां

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असल न्यूज़: बलदेव नगर में रहने वाले पीआर प्रोफेशनल तरुण कहते हैं, हमारे लिए दूसरी बार कोविड पॉजिटिव होना आश्चर्य था। मेरी पत्नी को पहले लक्षण आए, स्वाद और गंध चली गई थी और यही से मैं सावधान हो गया। तो मैंने उसके साथ अपना भी टेस्ट करवा लिया।

नई दिल्ली
एक बार नहीं, दो बार और एक को नहीं, दोनों को… ईस्ट दिल्ली में रहने वाले इस कपल ने कोरोना वायरस को दो बार हराया। तरुण राजपूत और उनकी पत्नी गौरांशी ने अलर्ट रहकर कोरोना को दो दो बार मात दी। पहले नवंबर और फिर अप्रैल में कपल कोविड पॉजिटिव हुआ। तरुण कहते हैं, पिछले साल के मुकाबले इस बार लक्षण भी अलग थे। पिछले साल मुझे गंध और स्वाद नहीं आ रहे थे मगर इस बार कोविड रिपोर्ट ही ने मुझे पकड़ा वरना मुझे कोई लक्षण नहीं था। अगर मैं टेस्ट नहीं कराता और बाहर घूमता, तो ना जाने कितने ही लोगों को मुझ से वायरस फैसल सकता था। कपल का कहना है कि वायरस का दूसरा अलग सा स्ट्रेन था तो डर भी था मगर अलर्ट और शांत रहकर हमने इसे खुद पर हावी नहीं होने दिया।

दूसरी बार पॉजिटिव हुए तो डर नहीं लगा
बलदेव नगर में रहने वाले पीआर प्रोफेशनल तरुण कहते हैं, हमारे लिए दूसरी बार कोविड पॉजिटिव होना आश्चर्य था। मेरी पत्नी को पहले लक्षण आए, स्वाद और गंध चली गई थी और यही से मैं सावधान हो गया। तो मैंने उसके साथ अपना भी टेस्ट करवा लिया। तरुण कहते हैं, नवंबर में मेरी और मेरी पत्नी की रिपोर्ट पॉजिटिव थी मगर मुझे फर्क नहीं पड़ा था। कोई डर नहीं था, ऐसा लगा बस खासी जुकाम है। इस बार भी जब हम दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी मुझे ऐसा डर नहीं लगा मगर आइसोलेशन के दौरान जैसे जैसे नेगेटिव न्यूज बढ़ती गई, मेरा डर भी बढ़ता गया। समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करें!

इम्यूनिटी बढ़िया रहेगी ओर आपकी सेहत सुधरती जाएगी
वायरस की दूसरी लहर थी तो तरुण कुछ घबराए हुए भी थे। वह कहते हैं, इतना नेगेटिव सुन रहे हैं, कई लोग बीमारी से और कई कमियों की वजह से चले गए, ऐसे में डर तो था मगर हम दोनों ने मिलकर इसे दूर किया और खुद के लिए भी और बाकी लोगों के लिए भी आइसोलेशन को लेकर पूरे अलर्ट रहे। तरुण कहते हैं, मगर मुझे लगता है इम्यूनिटी इच्छाशक्ति से जुड़ी हुई है। यह होगी तो इम्यूनिटी बढ़िया रहेगी ओर आपकी सेहत सुधरती जाएगी। तो हमने लक्षण आते ही खुद को आइसोलेट कर लिया, पूरे परिवार से। सभी इंतजाम कर लिए। डिस्पोजेल प्लेट्स में खाना खाया, वॉशरूम अलग था, वेस्ट को अलग डस्टबिन में रखा और अच्छी तरह से पैक किया ताकि दूसरे को वायरस फैलने की गुंजाइश ना हो। तरुण कहते हैं, मैंने सुना था कि यह वायरस कुछ अलग है, हवा से भी फैल रहा था तो हम अपनी बालकनी में तक नहीं गए।

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डर वाली खबरों से दिमाग को डाइवर्ट कर लिया
तरुण कहते हैं, आइसोलेशन की शुरुआत में बुरी खबरें डर पैदा कर रही थीं इसलिए हमने खुद के दिमाग को डाइवर्ट किया। फिर हमने न्यूज नहीं देखी, बस फिल्में और वेबसीरीज… कमरे पर बैठे बैठे ही काढ़ा बना लिया, नींबू पानी ले लिया, चाय बना ली…। तरुण और गौरांशी की समझदारी ही थी कि परिवार के बाकी चारों लोग से कोविड से अछूते रहे। तरुण कहते हैं, हम दोनों ही साथ थे कि पूरा संभलकर चलना है, ताकि हमसे वायरस किसी को ना फैले। मेरा यही कहना है कि हल्का सा भी खासी जुकाम बुखार या फिर टेस्ट जाता है, तो बिल्कुल ना रुकें। मान लें आपको कोविड है और अलग हो जाएं।

हिम्मत से लिया काम और कोरोना से जीत गए जंग
सबसे पहले परिवार में मेरी पत्नी को फीवर आया, लेकिन हमने देरी नहीं की। कोरोना टेस्ट और फिर रिपोर्ट के इंतजार में नहीं रहा। पहले दिन से ही डॉक्टर की सलाह पर उन्हें दवाइयां देनी शुरू कर दीं। उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों से अलग कर दिया, लेकिन एक से दो दिनों बाद परिवार के सभी सदस्यों की तबीयत खराब होने लगी। जिसके बाद बिना किसी देरी हमने टेस्ट कराया, जिसमें हम सभी पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद हम पूरे परिवार के साथ होम क्वारंटीन हो गए। इस दौरान हमने सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों से बिल्कुल दूरी बना ली। नकारात्मक सोच को बिल्कुल हावी नहीं होने दिया। परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे को हिम्मत देते रहे और हम सभी कोरोना से जंग जीत गए। अब जल्द ही प्लाजमा भी डोनेट करेंगे।

पूरा परिवार पड़ गया था बीमार
शाहदरा इलाके में रहने वाले कुलदीप ट्रैफिक पुलिस ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में तैनात हैं। परिवार में पत्नी सीमा तोमर, बेटी छवि (14), बेटी रिया (11) बेटा निपुण (6) हैं। सबसे पहले पत्नी को फीवर आया, उसी दिन हमने बिना किसी देरी डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां सजेस्ट की। जिसके बाद उन्हें दवाइयां देनी शुरू कर दी। दो दिन बाद ही घर के सभी सदस्यों को भी फीवर आ गया। कोरोना टेस्ट कराने के बाद 18 अप्रैल को पता चला कि हम सभी कोरोना पॉजिटव हो गए हैं। हमारे लिए यह मानसिक आघात जैसा था। हमने हिम्मत नहीं टूटने दी। हम सभी ने तुरंत घरों में खुद को क्वारंटीन कर लिया। डॉक्टर से संपर्क कर दवाइयां लेने शुरू कर दी। इस दौरान हमने हिम्मत के साथ काम लिया और परिवार के अन्य सदस्यों को भी हिम्मत दिया।

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सोशल मीडिया, न्यूज चैनलों से बना ली दूरी
सबसे पहले सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों से दूरी बना ली। जिसके बाद नियमित हम योग करते रहे। रोजोना तीन बार पानी का भाप लेते रहें। हेल्दी डाइट और दवाइयां समय पर लीं। किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरती। कोई डिप्रेशन में ना जाए, इसके लिए हम एक साथ पुरानी यादों को ताजा करते रहे, चुटकुले और गाने सुनते, पुराने एलबम देखकर मन बहलाते रहे। रोजोना सुबह और शाम छत पर पूरे परिवार के साथ दो से तीन घंटे समय बीताते। धूप लेते रहे। हम इस समय को टेंशन के साथ नहीं गुजारना चाहते थे, हमें परिवार के साथ रहने का मौका मिला, हमने एक दूसरे के साथ काफी बातें की। नकारात्मक सोच को कभी हावी नहीं होने दिया। रिश्तेदारों और दोस्तों से फोन पर बातें करते रहते थे। हर कोई हिम्मत देता रहा। दवाइयों के साथ-साथ नियमित रूप से काढ़े का भी सेवन करता रहा।

दोस्तो, रिश्तेदारों सभी का मिला साथ
इस दौरान ट्रैफिक पुलिस के मित्र, रिश्तेदार और परिवार ने हमारा हौसला बढ़ाने का काम किया। दवाइयों से लेकर राशन, खाने-पीने के सामान तक दोस्तों और पड़ोसियों ने मुहैया कराए, स्थानीय दुकानदारों का भी घर तक सामान पहुंचाने में सहयोग मिला। हमें घर में रहते हुए ऐसा नहीं लगा कि हम कैद हैं, या फिर टेंशन में हैं। इस दौरान एक रिश्तेदार की मृत्यु भी हो गई। कई बीमार भी हैं, लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी। अब इस कोरोना से जंग जीतकर दूसरों का भी मनोबल बढ़ा रहे हैं। हम लोगों से यही कहेंगे कि अगर हालत कंट्रोल में है, तो अस्पताल ना जाएं। घर पर ही आइसोलेट होकर कोरोना उपचार नियमों का पालन करते रहें। निश्चित ही कोरोना से जंग जीत पाएंगे।

दोस्तों से बात करके और किताबें पढ़कर कोरोना से निपटे
वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी बुखार से हालात खराब थी। स्वाद नहीं आ रहा था और जुकाम भी था। जब टेस्ट कराया तो पुलिसकर्मी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सबसे बड़ी मुसीबत एक साल से झेल रही बीमारी में खुद की सोच पॉजिटिव रखने की थी और इसलिए पुलिसकर्मी ने पुराना तरीका अपनाया। वह अपने दोस्तों से फोन पर बात करने लगे, जिससे उसका समय कट जाए और दिल में इधर-उधर के खयाल न आए। दिल्ली पुलिस की पीसीआर यूनिट में तैनात कॉन्स्टेबल विवेक यादव के लिए अच्छी बात यह थी कि वह अकेले ही इस बीमारी से लड़ रहे थे। उनके घर में कोई भी इसके संपर्क में नहीं आया।

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वैक्सीन की अपनी दोनों डोज ले ली थी
विवेक ने बताया कि 18 फरवरी और 3 अप्रैल को उन्होंने वैक्सीन की अपनी दोनों डोज ले ली थी। मगर, उनकी तबीयत खराब होने लगी। धीरे-धीरे कोरोना के लक्षण आने लगे, जिसके बाद 14 अप्रैल को उन्होंने कोरोना का टेस्ट करवाया। अगले दिन रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। वह सागरपुर स्थित अपने घर में सबसे अलग रहने लगे। विवेक का कहना है कि पीसीआर में रहकर यह पता करना लगभग नामुमकिन था कि वह कैसे कोरोना पॉजिटिव हुए। बचाव में वह दवाओं के अलावा वह स्टीम जरूर लेते थे।

इम्यूनिटी बेहतर तो रिकवरी में मिली मदद
वर्कआउट की आदत के कारण उनकी इम्युनिटी अच्छी थी, जिसने उनको कोरोना से रिकवर करने में मदद की। उन्होंने बताया कि खुद को व्यस्त रखना सबसे जरूरी था, लेकिन व्यस्त भी ऐसी चीजों से रखना था, जो उनको सकारात्मक ऊर्जा दे। विवेक ने कोरोना से जुड़ी बातें करनी बंद कर दी थी। टीवी पर क्रिकेट मैच देखने से दो-तीन घंटे बीत जाते थे और बाकी समय में वह किताबें पढ़ते थे। वक़्त मिलने पर दोस्तों को फोन मिला लेते थे, जिनसे दुनिया भर की बातें होती थी। इससे उनका मूड अच्छा रहा।

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