Home Covid-19 इस्तेमाल हुए सर्जिकल दस्ताने धोकर बेचने वाले गैंग का खुलासा, 3 गिरफ्तार

इस्तेमाल हुए सर्जिकल दस्ताने धोकर बेचने वाले गैंग का खुलासा, 3 गिरफ्तार

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असल न्यूज़: गाजियाबाद पुलिस ने ट्रॉनिका सिटी की एक फैक्ट्री में छापा मारकर काफी संख्या में इस्तेमाल हुए सर्जिकल दस्ताने बरामद किए गए। पुलिस ने मौके से गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी की तलाश की जा रही है। आरोपी इस्तेमाल किए गए दस्ताने धोकर दोबारा बाजार में सप्लाई कर थे।

ट्रॉनिका सिटी थाना प्रभारी उमेश पंवार ने बताया कि ट्रॉनिका सिटी की एक फैक्ट्री में अस्पतालों में उपयोग किए जा चुके पुराने सर्जिकल दस्तानों को धोकर दोबारा पैक कर बाजार में बेचने की सूचना मिली थी। इस पर पुलिस ने मुखबिर से बिक्री किए जा रहे दस्तानों का बॉक्स मंगवाया। इसके बाद जानकारी ली गई कि फैक्ट्री में किस समय काम हो रहा है।

बुधवार सुबह फैक्ट्री में छापा मारा गया। यहां 98 बोरे बिना धुले, 60 बोरे धुले हुए सर्जिकल दस्ताने और आठ सौ पैकिंग बॉक्स बरामद हुए। फैक्ट्री में दो धुलाई मशीनें, एक सुखाने वाली मशीन तथा एक वाशिंग मशीन लगी हुई थी। फैक्ट्री को भजनपुरा दिल्ली निवासी गुड्डू उर्फ जमीर अहमद, अजीम अहमद पुत्र जहीर एवं चावड़ी बाजार दिल्ली निवासी परवेज पुत्र मोहम्मद यूसूफ चला रहे थे। तीनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया है।

करीब आधे दाम पर बेचते थे

आरोपियों ने बताया कि नए दस्तानों का डिब्बा करीब 600 रुपये का आता है, लेकन वह धुले हुए 100 जोड़ी दस्ताने के डिब्बे को 350 रुपये में दिल्ली के भगीरथ पैलेस में थोक की दुकानों पर बेचते थे। इसके लिए उन्होंने कई दुकानदारों से बात की थी। इसके साथ ही अन्य मार्केट में मांग के अनुसार भी सप्लाई की जाती थी। इनकी पैकिंग इस तरीके से की जाती थी कि कोई भी इनको पहचान नहीं पाता था। आरोपियों ने बताया कि इससे पहले वह काफी संख्या में उपयोग हुए सर्जिकल दस्तानों को धोने के बाद पैक कर सप्लाई कर चुके हैं। 

ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्ट्री में छापा मारकर अस्पतालों में इस्तेमाल किए गए सर्जिकल दस्ताने बरामद किए गए हैं। इनको धोकर पैकिंग करके दोबारा बाजार में सप्लाई किया जा रहा था। इस पूरी चेन को तोड़ने का काम किया जा रहा है।” -डॉ. ईरज राजा, एसपी देहात 

मेडिकल बायोवेस्ट कंपनियों पर नजर

पुलिस के मुताबिक, अस्पतालों से निकलने वाले दस्ताने बायोमेडिकल वेस्ट की श्रेणी में आते हैं। इनको कोई भी अस्पताल खुले में नहीं फेंक सकता। अस्पताल के इस कचरे को बायोमेडिकल वेस्ट कंपनियां ले जाती हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन्हें कहीं बायोमेडिकल वेस्ट कंपनियों से तो नहीं खरीदा जा रहा था।

मां व बहन की कोरोना से हो चुकी है मौत

परवेज ने बताया कि करीब 15 दिन पहले उसकी मां और बहन की कोरोना से मौत हो चुकी है, लेकिन पैसों के लालच में वह इस काम को नहीं छोड़ रहा था। इस काम में काफी मुनाफा मिल रहा था। कबाड़ियों से यह दस्ताने चंद रुपये में ही खरीद लेते थे, उसके बाद इनसे कई गुना मुनाफा कमाते थे। 

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