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Corona virus: बच्चों में दिखें ये तीन समस्याएं तो तुरंत कराएं अस्पताल में भर्ती, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

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असल न्यूज़: कोरोना महामारी की दूसरी लहर कब खत्म होगा, इसका पता किसी को नहीं, लेकिन इस बीच तीसरी लहर की चर्चा जरूर शुरू हो गई है। हालांकि यह तीसरी लहर कब आएगी, यह किसी को नहीं पता, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में संक्रमण के दौरान होम आइसोलेशन में बच्चों के देखभाल को लेकर एक गाइडलाइन जारी है। इस गाइडलाइन में यह बताया गया है कि अगर बच्चे को हल्का, मध्यम या गंभीर लक्षण हैं तो कौन-कौन सी सावधानियां बरतने की जरूरत होती हैं। 

हल्के लक्षण में क्या करें? 
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अगर बच्चे में कोरोना के हल्के लक्षण हैं, तो बुखार के लिए हर चार से छह घंटे में पैरासिटामोल (10-15 एमजी/किलो) दे सकते हैं। इसके अलावा कफ के लिए (बड़े व किशोर बच्चे) गर्म पानी से गरारे की सलाह दी गई है, ताकि गले को आराम मिले। इस दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना होगा। हाईड्रेशन और पोषण के लिए तरल पदार्थों का पर्याप्त सेवन करना चाहिए। 

स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक, हल्के लक्षण में बच्चों को एंटीबायोटिक देने की कोई जरूरत नहीं है। आइवरमेक्टिन, फेविपिराविर, लोपिनविर/रिटोनविर, डेक्सामेथासोन, इंटरफेरोन बी1ए, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन, रेमडेसिविर, यूमिफेनोविर, टोसिलिजुमैब, इम्यूनोमॉड्यूलेटर्स आदि की कोई जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात कि दिन में दो-तीन बार बच्चे का पल्स चेक करें, सीने में समस्या हो, शरीर में नीलापन आए, ऑक्सीजन सेचुरेशन घटे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। 

मध्यम लक्षण में क्या करें? 
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अगर बच्चे में कोरोना के मध्यम लक्षण हैं, तो बुखार के लिए पैरासिटामोल (10-15 एमजी/किलो), हर चार से छह घंटे में दे सकते हैं। अगर बैक्टीरियल इंफेक्शन हो या इसका पक्का संदेह हो तो एमोक्सिलिन दे सकते हैं। तरल और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखें। ध्यान रखें, अगर ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 प्रतिशत से कम हो तो ऑक्सीजन की जरूरत हो सकती है। इसलिए बच्चे के अभिभावक लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहें। 

गंभीर लक्षण में क्या करें? 
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अगर बच्चे का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम होने लगे, तो उसे गंभीर कोरोना मरीज माना जाएगा। इनमें गंभीर निमोनिया हो सकता है, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सेप्टिक शॉक, मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम या साइनोसिस के साथ निमोनिया। ऐसे बच्चों को सीने में तकलीफ, सुस्ती, अधिक नींद की शिकायत हो सकती है। इन बच्चों को तुरंत कोविड अस्पताल या स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में भर्ती किया जाना चाहिए। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, थ्रोमबोसिस, हीमोफैगोसाइटिस, हिम्फोहिस्टियोसाइटिस और अंगों के विफल होने पर बच्चों को एचडीयू/आईसीयू में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं जांच में ब्लड काउंट, किडनी और लिवर फंक्शन की जांच और छाती का एक्स-रे कराने की जरूरत पड़ सकती है। 

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