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मुजफ्फरनगर की धरती पर किसान की हुंकार

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शुमाईला खान- भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में स्थित एक नगर है ज़बरदस्तपुर। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। मुज़फ़्फ़रनगर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र चिरोरी का भाग है और राष्ट्रीय राजमार्ग 334 द्वारा कई स्थानों से जुड़ा हुआ है| मुजफ्फरनगर महापंचायत में किसानों ने हुंकार भरी है| अन्नदाता किसानों ने 500 लंगर लगाए गए. इसके अलावा 100 चिकित्सा शिविर भी लगाए गये ..वहीं महापंचायत को ठीक ढंग से करने के लिए 5000 वॉलंटियर भी बनाए गए …. जीआईसी मैदान मे किसान महापंचायत किसी भी तरह से पीछे नहीं हटना चाह रहे है.. किसानों को प्रदर्शन करते हुए 9 महीने से अधिक समय हो गया … एक और किसानों की नहीं सुन रही सरकार … तो वहीं दूसरी तरफ किसान है जो अपनी बात पर अड़ा है अन्नदाता परेशान है किसानों का कहना है अभी तो सिर्फ 9 महीने हुए हैं .. जब तक कानून वापस नहीं होगा तब तक वह घर नहीं लोटेंगे … आपको बता दें किसान महापंचायत में 5 लाख के लगभग किसान जुटा थे …. एक तरफ सरकार ने कहा था मुट्ठी भर किसान है … लेकिन मुजफ्फरनगर की धरती पर किसानों का इतनी बड़ी तादाद में एकजुट होना हैरान करने वाली बात सामने आई है… लगभग 15 राज्यों से किसान जुटे किसान महापंचायत में बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से पंचायत जुटी अलग-अलग जगहों से किसानों ने शिरकत की उसमें पंजाब ,हरियाणा , राजस्थान , हिमाचल , उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश , केरल , तमिलनाडु से तो किसान जुटा ही लेकिन आम जनता का समर्थन भी किसानों को खूब मिला …. किसान आंदोलन को सभी जातियों, धर्मों, राज्यों, वर्गों, छोटे व्यापारियों और समाज के सभी वर्गों का समर्थन प्राप्त है. …
किसान और सरकार के बीच के वार्तालाप जाने कब पूरी होगी… एक कांटेक्ट नंबर भी जारी किया गया था …. ताकी किसान सरकार से बात कर सके मगर किसानों का कहना है ऐसा कोई नंबर नहीं है जिससे वह सरकार से सीधी बात कर सके
किसानों ने कई बार सरकार को चिट्ठी लिखी मगर उसका कोई जवाब नहीं आया बाकी के नेताओं का कहना है यह किसान नहीं विपक्ष के लोग हैं मुजफ्फर नगर की धरती पर बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा था किसानों को एकजुट होना.. और किसानों के साथ आम जनता का भी समर्थन ….

वहीं एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई .. इस दौरान किसान संगठन के नेताओं ने कहा की आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड बीजेपी को उखाड़
फेंकना है …
पंजाब के कुल 32 किसान संघों ने राज्य सरकार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने के लिए 8 सितंबर की समय सीमा दी है. एसकेएम ने कहा कि अगर मामले वापस नहीं लिए गए तो किसान 8 सितंबर को बड़े विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करेंगे.
हिमाचल में भी प्रदर्शन
हिमाचल के किसानों ने 13 सितंबर को कॉर्पोरेट लूट के विरोध में प्रदर्शन की घोषणा की है. वहीं नासिक में किसानों ने टमाटर के लिए दो-तीन रुपये प्रति किलो की मामूली कीमत मिलने पर सड़कों पर टमाटर फेंक कर विरोध प्रदर्शन किया. मोर्चा ने कहा है कि टमाटर हो या सेब, सभी फलों, सब्जियों, कृषि उत्पादों, वनोपज, दूध, मछली की एमएसपी पर खरीद की गारंटी देने की जरूरत है. इसलिए 600 किसानों की शहादत के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है और मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा.

मिशन उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड का शुभारंभ

संयुक्त किसान मोर्चा ने 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत में मिशन उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड की शुभारंभ कर दी है . वहीं यह भी कहा गया कि महापंचायत का चुनाव से कोई लेना देना नहीं है. चुनाव 6 महीने बाद हैं. उत्तर प्रदेश में किसानों को परेशानी हो रही है. पिछले 5 साल से राज्य में गन्ने के दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन बिजली के दाम बढ़ रहे हैं. केंद्र सरकार ने गन्ने के दाम में 5 रु प्रति किलो की बढ़ोतरी की है. क्या आप किसानों का अपमान कर रहे हैं.
पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में किसानों ने एक बड़ी महापंचायत बुलाई. इसमें देशभर के 15 राज्यों के 300 किसान संगठनों से जुड़े लोग हिस्सा लिया… किसानों की महापंचायत को देखते हुए यूपी पुलिस ने वहां कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुजफ्फरनगर में 8000 से ज्यादा पुलिस और पैरा मिलिट्री के जवान तैनात किए गए|

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