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डेल्टा से भी ज्यादा तेजी से फैल रहा है ओमीक्रोन? मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कही ये बात

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FILE PHOTO: Test tubes labelled "COVID-19 Test Positive" are seen in front of displayed words "OMICRON SARS-COV-2" in this illustration taken December 11, 2021. REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

भारत में ओमीक्रोन के मरीज बढ़े हैं लेकिन एक राहत की बात है। SARS-Cov-2 के डेल्टा और ओमीक्रोन वैरिएंट से संक्रमित मरीजों के इलाज की शुरुआती रिपोर्ट से साफ है कि दोनों के लक्षण बिल्कुल अलग हैं। दिल्ली में नए वैरिएंट से संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि ओमीक्रोन पॉजिटिव होने पर टेस्ट या स्मेल (स्वाद या गंध) नहीं जाती है जबकि डेल्टा वैरिएंट में इसी से पता चलता था मरीज कोरोना पॉजिटिव हो गया है।

लोक नायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार ने कहा, ‘अब तक हमने 24 ओमीक्रोन पॉजिटिव मरीजों का इलाज किया है, लेकिन केवल दो लोगों में लक्षण पता चले थे। एक मरीज को हल्का बुखार था, गले में खराश थी, सिर और शरीर में दर्द था। दूसरे मरीज को गले में खराश और लूज मोशन की शिकायत थी। उपचार के बाद उनकी तबीयत सुधर गई और किसी को भी स्टेरॉयड, एंटीवायरल ड्रग्स या ऑक्सीजन थेरेपी देने की जरूरत नहीं पड़ी, जबकि डेल्टा वैरिएंट के समय इसका खूब इस्तेमाल हुआ था।’

ओमीक्रोन संक्रमित के 5 लक्षण
लंदन में पिछले हफ्ते हेल्थ साइंस कंपनी Zoe और किंग्स कॉलेज ने कोविड स्टडी पर डेटा जारी किया। यूके में ओमीक्रोन वैरिएंट के चलते कोरोना के केस तेजी से बढ़े हैं। इस स्टडी में बताया गया है कि ओमीक्रोन से संक्रमित पांच प्रमुख लक्षणों में नाक बहना, सिरदर्द, थकावट (हल्की या ज्यादा), छींक आना और गले में खराश रही।



ओमीक्रोन के हल्का या गंभीर?
डॉ. कुमार बताते हैं कि ओमीक्रोन का असर ज्यादा गंभीर नहीं है, लेकिन ये आकलन अभी शुरुआती हैं। ज्यादातर मरीज स्वस्थ हैं और दूसरे देशों से आए हैं। ओमीक्रोन हल्का है या गंभीर, इसका असली टेस्ट तब होगा जब यह फैलने लगेगा। उन्होंने कहा कि हमें अभी ये देखना होगा कि यह बड़े बुजुर्गों और कम इम्युनिटी वाले लोगों- जैसे कैंसर और गंभीर किडनी रोग से पीड़ित, को कैसे प्रभावित करता है।

डेल्टा से भी ज्यादा तेजी से फैल रहा है ओमीक्रोन
हालांकि ओमीक्रोन को लेकर एक बात स्पष्ट है कि यह डेल्टा समेत सार्स कोव-2 के पहले के वैरिएंट की तुलना में ज्यादा तेजी से फैलता है। यह पूछे जाने पर कि इसके तेजी से फैलने और माइल्ड लक्षण का कारण क्या है, इम्युनोलॉजिस्ट डॉ. एनके मेहरा ने हांगकांग में की गई स्टडी का हवाला दिया जहां वैज्ञानिकों ने मानव फेफड़े के टिशू को कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट से संक्रमित किया, जिससे प्रभाव को समझा जा सके।

डॉ. मेहरा ने कहा कि स्टडी से पता चलता है कि मूल सार्स कोव-2 और डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमीक्रोन 70 गुना ज्यादा अपनी कॉपी बनाता है। हालांकि स्टडी में यह भी साफ हो गया कि ओमीक्रोन वैरिएंट फेफड़े को उतना प्रभावित नहीं करता है। उन्होंने आगे कहा कि नए वैरिएंट के चलते वायरस गले में ज्यादा समय तक रह सकता है और इसके कारण यह ज्यादा संक्रामक बन जाता है। हालांकि फेफड़े में इसकी कॉपी तैयार करने की क्षमता कम होने के कारण गंभीर लक्षण खासतौर से सांस संबंधी परेशानी दिखाई नहीं देती है।उन्होंने आगाह भी किया कि ज्यादा संक्रामक होने के कारण कम्युनिटी इम्युनिटी पर दबाव बड़ सकता है और अचानक केस बढ़ने के कारण हेल्थकेयर सिस्टम पर बोझ बढ़ सकता है। ऐसे में क्लस्टर बनने से रोकने के लिए पॉजिटिव केस की पहचान करना और उन्हें आइसोलेट करना महत्वपूर्ण है।

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