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कोरोना के कारण घर पर क्‍वारंटाइन है तो जान लीजिये सरकार की ये गाइडलाइंस

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नई दिल्‍ली. देश में इन दिनों कोरोना वायरस संक्रमण  के मामले बेहद तेजी के साथ फैल रहे हैं. कोरोना वायरस  का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन  भी बड़ी संख्‍या में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. रोजाना कोरोना वायरस के नए केस हजारों की संख्‍या में सामने आ रहे हैं. हालांकि अभी यह मामले गैर लक्षणी या हल्‍के लक्षण वाले हैं. ऐसे में यह अभी कम जानलेवा हैं और घर पर डॉक्‍टरी परामर्श के साथ इसके मरीज ठीक हो रहे हैं. जो कोरोना मरीज  हल्‍के कोविड लक्षण या गैर लक्षणी वाले हैं, उनके लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय समय-समय पर होम आइसोलेशन  के लिए गाइडलाइंस जारी करता है. ताकि उन्‍हें मेडिकल सहायता मुहैया होने में कोई दिक्‍कत ना हो. साथ ही घर पर रहते हुए उनके परिवारवालों को भी उसके जरिये कोरोना ना फैल पाए.

दरअसल गैर लक्षणी कोरोना मरीज वे होते हैं, जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं होते हैं और उनका ऑक्‍सीजन लेवल भी 93 फीसदी से अधिक होता है. वहीं हल्‍के लक्षण वाले मरीजों में भी ऑक्‍सीजन लेवल 93 फीसदी से अधिक होता है. उन्‍हें बुखार हो भी सकता है और नहीं भी. उन्‍हें सांस लेने में कोई दिक्‍कत नहीं होती है. सिर्फ वहीं कोरोना मरीज होम आइसोलेशन या क्‍वारंटाइन में रह सकते हैं, जिन्‍हें हल्‍के लक्षण या कोई लक्षण ना हों.


ये हैं होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीज के लिए नियम

– मरीज को घर के अन्य सदस्यों से खुद को अलग करना चाहिए. एक अलग कमरे में रहना चाहिए. घर के अन्य लोगों से दूर रहना चाहिए, विशेष रूप से बुजुर्गों और अन्‍य बीमारियों से जूझ रहे लोगों से भी .

– मरीज को एक हवादार कमरे में क्रॉस वेंटिलेशन के साथ रहना चाहिए और ताजी हवा आने के लिए खिड़कियां खुली रखनी चाहिए.

– मरीज को हमेशा तीन परतों या लेयर वाले मेडिकल मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर मास्क गीला हो जाता है या दिखने में गंदा हो जाता है तो उन्हें हटा देना चाहिए. एक मास्‍क को 8 घंटे इस्‍तेमाल किया जा सकता है. देखभाल करने वाले के मरीज के कमरे में जाने की स्थिति में देखभाल करने वाले और मरीज, दोनों ही एन-95 मास्क का उपयोग कर सकते हैं.

– मास्क को टुकड़ों में काटकर और पेपर बैग में कम से कम 72 घंटे के लिए रख कर फेंक देना चाहिए.

– मरीज को पर्याप्‍त पानी या अन्‍य पेय पदार्थ पीने चाहिए.

– हाथों को कम से कम 40 सेकंड तक साबुन और पानी से बार-बार धोना चाहिए. अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर से हाथ साफ करने चाहिए.

– मरीज घर के अन्य लोगों के साथ बर्तन सहित निजी सामान साझा नहीं करेंगे.

– कमरे में बार-बार छुई जाने वाली सतहों (टेबलटॉप, डोर नॉब्स, हैंडल आदि) की साबुन/डिटर्जेंट और पानी से सफाई सुनिश्चित करें. मास्क और दस्ताने के उपयोग जैसी आवश्यक सावधानियों का पालन करते हुए या तो मरीज या देखभाल करने वाले द्वारा सफाई की जा सकती है.

– मरीज की पल्स ऑक्सीमीटर के साथ ब्‍लड ऑक्सीमीटर की निगरानी की सलाह दी जाती है।

– मरीज को रोजाना तापमान की निगरानी के साथ अपने स्वास्थ्य की स्वयं निगरानी करनी चाहिए और किसी भी लक्षण के बिगड़ने पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए. स्थिति को इलाज करने वाले डॉक्‍टर के साथ-साथ निगरानी टीमों/नियंत्रण कक्ष के साथ साझा किया जाना चाहिए.

– मुमकिन हो तो मरीज की देखभाल करने वाले उसी व्‍यक्ति को जिम्‍मेदारी दी जानी चाहिए, जिसे वैक्‍सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं. उन्हें मरीज के आसपास हर समय ट्रिपल लेयर मेडिकल मास्क पहनना आवश्यक है.

मरीज के साथ इन बातों का विशेष ख्‍याल रखे परिवार

– मरीज के शरीर के तरल पदार्थ जैसे नाक, लार आदि के सीधे संपर्क में आने से बचें. मरीज को संभालते समय डिस्पोजेबल दस्ताने का प्रयोग करे.

– मरीज के किसी भी सामान से सीधा संपर्क में आने से बचें. जैसे खाने के बर्तन, व्यंजन, पेय, इस्तेमाल किए गए तौलिये या बिस्तर.

– मरीज को उसके कमरे में भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। रोगी द्वारा उपयोग किए जाने वाले बर्तनों और बर्तनों को दस्ताने पहनकर साबुन/डिटर्जेंट और पानी से साफ करना चाहिए. उचित सफाई के बाद बर्तनों का उपयोग किया जा सकता है.

-दस्ताने उतारने या इस्तेमाल की गई वस्तुओं को छूने के बाद हाथ साफ करें. मरीज द्वारा उपयोग की जाने वाली सतहों, कपड़ों या साफ करते समय ट्रिपल लेयर मेडिकल मास्क और डिस्पोजेबल दस्ताने का प्रयोग करें.

– इस्तेमाल किए गए मास्क, दस्ताने और ऊतक या COVID-19 रोगियों के खून/शरीर के तरल पदार्थ, इस्तेमाल की गई सीरिंज, दवाएं आदि शामिल हैं, को बायोमेडिकल कचरे के रूप में माना जाना चाहिए और उसी के अनुसार पीले बैग में इकट्ठा करके निपटाया जाना चाहिए और सौंप दिया जाना चाहिए। कचरे वाले को अलग से देना चाहिए. ताकि घर और समुदाय में संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके.

हल्‍के या गैर लक्षणी मरीजों का इलाज होम आइसोलेशन में कैसे करें?
– मरीजों को डॉक्‍टर के साथ संवाद में होना चाहिए और किसी भी परेशानी के मामले में तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए.

– डॉक्‍टर से परामर्श करने के बाद मरीज को अन्य बीमारियों के लिए दवाएं जारी रखनी चाहिए.

– मरीज www.esanjeevaniopd.in पर उपलब्ध ई-संजीवनी टेली-परामर्श प्लेटफॉर्म सहित जिला/राज्य प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए टेली-परामर्श प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं.

-मरीज गर्म पानी से गरारे कर सकते हैं या दिन में तीन बार भाप से सांस ले सकते हैं.

– अगर दवाएं लेने के बाद भी बुखार कम नहीं हो रहा है तो डॉक्‍टर से सलाह लेकर ही अन्‍य दवा लें.विज्ञापन

– अपने डॉक्‍टर परामर्श के बिना स्व-दवा, रक्त जांच या छाती एक्स रे या छाती सीटी स्कैन जैसी रेडियोलॉजिकल इमेजिंग के लिए जल्दबाजी न करें।

– हल्के रोग में स्टेरॉयड का संकेत नहीं दिया जाता है और इसे खुद नहीं लिया जाना चाहिए.

जब हो ऐसी परेशानी तो जरूर लेनी चाहिए मेडिकल मदद

– जब लगातार 3 दिनों तक बुखार 100 डिग्री से नीचे नहीं उतरे.

– सांस लेने में तकलीफ होने लगे.

– जब ऑक्‍सीजन लेवल 93 फीसदी या उससे नीचे आने लगे.

– सीने में दर्द या दबा महसूस हो.

– अधिक थकान लगे.

होम आइसोलेशन को कब खत्‍म करें?

दिशानिर्देशों के अनुसार होम आइसोलेशन के तहत मरीजों को तब इसे खत्‍म करने की इजाजत दी जाती है जब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के दिन से 7 दिन पूरे हो गए हों और तीन दिनों से बुखार ना आ रहा हो. लेकिन वे मास्क पहनना जारी रखेंगे. होम आइसोलेशन की अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा कोरोना टेस्‍ट कराने की कोई आवश्यकता नहीं है.

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