सन ’78’ जैसी बाड़ का अन्देशा सरकारों की उडी नींद,अधिकारियों के माथे पर पसीना….अलर्ट !

असल न्यूज़ : (द्वारकेश बर्मन) दिल्ली में लगातार मंडरा रहा बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है l जानकारी के मुताबिक बीती रात करीब 10बजे भी हरियाणा के यमुनानगर के हथिनीकुंड बांध से 26096 क्यूसेक पानी छोड़ा गया l सुबह पांच बजे यमुना खतरे से निशान से ढ़ेड़ मीटर से ज्यादा ऊपर बह रही थी l दिल्ली में खतरे का निशान 204.83 है जबकि अभी हालत ये है कि यमुना करीब 206 मीटर पर बह रही है l निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगह भेजने की कवायतें की जा रही हैं l

पुराना पुल दोनों तरफ से बंद 27 ट्रेनें रद्द, 7 के रूट बदले

यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद यमुना के पुराने ब्रिज को यातायात के लिये दोनो तरफ से बंद कर दिया गया है l इस पुल को लोहा पुल के नाम से भी जाना जाता है l हालांकि बाद में रेल यातायात सामान्य हो गया l जिला अधिकारी के आदेश पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पुल से गुजरने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया है l इसके साथ ही यमुना से लगे निचले इलाकों को भी खाली कराने का आदेश दिया गया है l

उधर भारतीय रेलवे ने बताया कि दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से आधा मीटर से ज्यादा ऊपर बह रही है जिसके चलते ब्रिज के बंद किये जाने के कारण 27 पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है वहीं 7 ट्रेनों का रूट बदला गया था दरअसल रविवार शाम को ही पुराने यमुना पुल पर यातायात रोक दिया गया था l फिलहाल सडक एवं रेल यातायात सुचारू है किंतु पुन: बाधित होने की संभावनाओं को नकारा नही जा सक्ता l

बहरहाल दिल्ली सरकार ने नदी की स्थिति पर नजर रखने के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष और चौबीसों घंटे काम करने वाले आपात संचालन केंद्र स्थापित किए हैं l यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ते रहने पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर पुराने पुल पर यातायात बंद करने का आदेश जारी किया गया ज़िसको तत्काल अमली जामा पहना दिया गया l आम बोलचाल में इसे लोहा का पुल कहा जाता है और यह सड़क सह रेल पुल है l दिल्ली-हावड़ा लाइन का यह पुल 150 साल से भी अधिक समय पहले बना था l

अधिकारियों के अनुसार यमुना रविवार शाम 6 बजे के आसपास 205.5 मीटर पर बह रही थी और खतरे का निशान 204.83 मीटर है जबकी गुरवार तडके तक यमुना का जलस्तर करीब 206.8 मीटर पार कर गया l

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण बाढ़ का खतरा है, यमुना तल में निचले इलाकों में पानी भर गया है ऐसे में जान-माल का नुकसान हो सकता है l ऐसे में पुल पर यातायात तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया जाता है जोकी अगले आदेश तक मान्य होगा l यमुना के किनारे रहने वाले लोगों को जगह खाली करने के लिए कहा गया है l आपात स्थिति से निबटने के लिए गोताखोरों और बोटों को तैनात कर दिया गया है l यमुना के किनारे बसे लोगों को बाहर निकालकर टेंटों में ले जाया जा रहा है l

मुख्यमंत्री कर चुके हैं आपात बैठक

इससे पहले, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शहर के निचले इलाके से लोगों को हटाने के काम का जायजा लिया और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की अपील की है इसके अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस संबंध में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक भी की l
एक अधिकारी ने बताया, सिसोदिया ने अक्षरधाम और पांडव नगर के पास के निचले इलाकों में लोगों को निकालने के लिए चल रहे काम का जायजा किया l

सिसोदिया ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से मुलाकात भी की और उन्हें यमुना के बढ़ते जल स्तर के बारे में आगाह करते हुए सुरक्षित स्थान पर जाने का आग्रह कियाl एक अन्य अधिकारी की माने तो कई लोगों ने ऊंचे स्थानों पर जाना शुरू भी कर दिया है l यमुना नदी के जल स्तर के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद दिल्ली सरकार ने चेतावनी जारी की थी l पूर्वी दिल्ली के डीएम ने बताया कि सभी तैयारियां कर ली गईं अगर जरूरत पड़ी तो एनडीआरएफ की मदद भी ली जाएगी l

बाढ़- बारिश और तूफान से 539 की मौत

देश के आधे हिस्से में बाढ़ और बारिश का तांडव जारी है l लगातार हो रही तेज बारिश ने भी दिल्ली वालों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है तो वहीं राजधानी दिल्ली से लेकर हरियाणा,उत्तर प्रदेश और बिहार के पटना तक एक जैसे हालात हैं l देश भर में बाढ़ बारिश और तूफान से अब तक 539 लोगों के आंकडे सामने आये हैं l

हरियाणा ताजेवाला बांध से छोड़ा गया यमुना का पानी यूपी मे मचा सक्ता है बबंडर

मथुरा की ओर ताजेवाला बांध से छोड़ा गया यमुना का पानी धीरे-धीरे उछाल ले रहा है मथुरा में यमुना खतरे के निशान से नीचे तो है किंतु चेतावनी निशान को छूने लगा है। बढ़ते जल स्तर को देखते हुए यमुना किनारे रहने वाले लोग विचलित होने लगे हैं। उधर, खतरे को भांपते हुए मथुरा से आगरा की ओर यमुना जल छोड़ने की रफतार बढ़ाने के लिये गोकुल बैराज के दरवाजे एक एक कर खोले जा रहे है।

अब तक 26 जुलाई को यमुना में सबसे अधिक पानी 1.38 लाख क्यूसेक ताजेवाला बांध से छोड़ा गया था। यह पानी आपदा का संदेश लिए 29 जुलाई की मध्य रात्रि तक मथुरा पहुंचा। जबकि इसके बाद पुन: ताजेवाला बांध से 3.11 लाख क्यूसेक अतिरिक्त जल भी छोड़ा गया l शनिवार को मथुरा में जलस्तर 164.58 मीटर था रविवार को प्रयाग घाट पर शाम पांच बजे तक यह 164.94 मीटर जलस्तर मापा गया था जबकी गुरुवार तडके तक यह जलस्तर 165.10 तक पहुंच गया हालांकी आगरा की ओर पानी का निकास जारी है और जरूरत दिखने पर गोकुल बैराज के अभी तक बंद पट खोले जाने को लेकर प्रशासान ने मोनीटरिंग जारी है। जबकी मौजूदा स्थती में भी बढ़े हुए जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने गोकुल बैराज से यमुना जल छोड़ने की गति तेज कर रखी है। अब बैराज से 23379 क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा है। जबकि रविवार का आगरा के लिए बैराज से 17111 क्यूसेक यमुना जल छोड़ा जा रहा था।

उधर मथुरा जिला प्रशासन ने भी निचले इलाकों में रहने वालों के लिये अलर्ट जारी कर दिया है। डीएम वित्त रवींद्र कुमार ने सभी एसडीएम को सतर्क रहने का आदेश दिया है उन्होंने बताया कि यमुना के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।

एक नजर
यमुना का चेतावनी लेवल-165.20 मीटर
गुरुवार तड़के तक जलस्तर 165.10
यमुना में खतरे का निशान-166.00 मीटर
मथुरा में अधिकतम जल स्तर-169.73 मीटर वर्ष 1978

रविवार को यमुना का जल स्तर
शाम चार बजे ताजेवाला बांध- 115947 क्यूसेक
शाम चार बजे ओखला बांध 58 982 क्यूसेक
शाम 7 बजे मथुरा प्रयागघाट-164.94 मीटर
आगरा के लिए डिस्जार्ज 23379 क्यूसिक डिस्जार्ज

हिंडन नदी में जल स्तर बढ़ा, आसपास की छेत्रों में अलर्ट

उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी में हो रही भारी बारिश के कारण हिंडन नदी में भी जल स्तर बढ़ गया है। सिंचाई विभाग की एक रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने हिंडन नदी के आसपास के एरिया मकान बनाकर रह रहे लोगों को अलर्ट जारी किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन मकानों को खाली कराया जा सके।

हिंडन में भी सन 1978 में आई थी बाढ़

आमतौर पर 50 क्यूसेक ही रहता है पानी, 138 क्यूसेक पहुंचा जलस्तर

हिंडन में 1978 में आई बाढ़ में जलमग्न हो गया था 90 प्रतिशत शहर

प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, हिंडन नदी में वर्ष 1978 में बाढ़ आई थी। उस दौरान बाढ़ के कारण करीब 90 प्रतिशत शहर जलमग्न हो गया था। अगर इस बार इतनी बरसात हुई तो हिंडन के किनारे बनी बस्ती तो डूब ही जाएगी। वहीं, शहर भी बाढ़ की चपेट में आकर पानी से लबालब हो सकता है। प्रशासन का कहना है कि हिंडन नदी यमुना में मिलती है। यमुना में जल स्तर बढ़ने के कारण हिंडन नदी में यमुना का पानी वापसी आने का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर भी प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। इसके लिए प्रशासन ने सिंचाई विभाग को इस पर नजर रखने के लिए कहा है।

एसडीएम सदर विवेक मिश्रा के अनुसार हिंडन नदी में जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। सामान्य तौर पर हिंडन नदी में 50 क्यूसेक के आसपास पानी बहता है। नदी में पिछले 36 घंटों के दौरान पानी का लेवल बढ़कर करीब 138 क्यूसेक तक पहुंच गया है। गाजियाबाद के करहेड़ा से लेकर नोएडा की सीमा में गांव छिजारसी और अकबरपुर बहरामपुर के पास हिंडन नदी के किनारे बड़ी संख्या में लोग पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं। अगर इसी अनुपात में तेजी के साथ हिंडन नदी में जल स्तर बढ़ता रहा तो बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। प्रशासन ने लेखपाल तैनात किए हैं, जो लोगों को अनाउंसमेंट के जरिए और मौके पर पहुंचकर अलर्ट कर रहे हैं। एसडीएम का कहना है कि अगर हिंडन में बाढ़ की स्थिति पैदा होगी तो एरिया को खाली कराया जाएगा।

लखनऊ सहित कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, घरों में घुसा पानी

उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊऊ में तीन-चार दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश का सिलसिल गुरुवार को भी जारी रहा। सोमवार को लखनऊ समेत सीतापुर, बाराबंकी, फैजाबाद, गोंडा, कानपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश हुई। इससे राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। उसके बाद भी रुक-रुक कर बारिश होती रही।

बारिश से लखनऊ की मुख्य सड़कों पर एक-डेढ़ फ़ीट तक पानी लग गया। शहर के सप्रू मार्ग,अशोक मार्ग, ला-प्लास,गोमती नगर,सपूर मार्ग,अशोक मार्ग,ला-प्लास, गोमती नगर, इंदिरा नगर, अलीगंज, जानकीपुरम, चौक सहित राजधानी के अधिकतर इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया, वहीं घरों में भी पानी घुसने लगा, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आफिस आने जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

राजधानी स्तिथ के.के अस्पताल के सामने कमर तक पानी भर गया और वहीं डालीगंज में गाड़ी पर बारिश की वजह से एक पेड़ गिर गया। अलीगंज बाल महिला चिकित्सालय में पानी भरने के कारण हजारों रुपए की दवाई डूब गईँ। हॉस्पिटल के अंदर पानी भरने से डॉक्टरों को ओपीडी में बैठने में काफी मुश्किल हो रही थी। वहीं महापौर आवास व उनके वार्ड में भी जलभराव हो गया।

सीतापुर, गोंडा, फैजाबाद, कानपुर, सुल्तानपुर में भी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। यहां पर भी कई इलाकों में बारिश का पानी घरों में घुस गया।
मौसम विभाग द्वारा यूपी के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया जा चुका है। सोमवार को हुई भारी बारिश से कई कच्चे मकान धाराशायी हो गए थे । प्रदेश में 26 जुलाई से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। सोमवार सुबह हुई भारी बारिश के कारण बिजली व्यनस्था भी काफी देर तक ठप्प रही। बारिश अगस्त के पहले दिन तक बदस्तुर जारी है अलर्ट की चेतावनी के अनुसार हालात अभी और बेकाबू हो सक्ते हैं जिनको संभालने के लिये हर संभव कवायतें जारी हैं l सूबे के विभिन्न जिलों में अब तक बारिश के कारण करीब 80 लोगों की मौत का अनुमान है।

खोखले साबित हुए नगर निगम के वादे

जलभराव के कारण पानी घरों और मंत्रियों के आवास तक में घुस गया

डूबा योगी सरकार के मंत्री का सरकारी आवास
बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया जिससे योगी सरकार के राज्य मंत्री के सरकारी आवास में पानी भर गया। आलम ये था कि मंत्री के पास बारिश खत्म होने का इंतजार करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। जेल राज्यमंत्री जय कुमार सिंह जैकी के मकान में पानी भर गया। भारी बारिश से जलभराव के कारण मंत्री अपने कार्यक्रमों तक नहीं पहुंच पाए।

नगर निगम और प्रशासन के सारे दावे एक ही बारिश में खोखले साबित हो गए। कई जगहों पर पेड़ भी गिर गए जिससे कि आने जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

घाघरा और सरयू नदियों में बाढ़

जलस्तर बढ़ने से उफनाई घाघरा और सरयू दोनों नदियां बाढ़ का प्रकोप लेकर तीन दर्जन गांवों तक पहुंच गई हैं। गोंडा के करनैलगंज के एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए। ग्रामीणों ने प्रशासन का भरोसा छोड़ते हुए पलायन शुरू कर दिया है। करनैलगंज के नैपुरा, परसावल सहित चरपुरवा गांवों में पानी पहुंच गया है। घाघरा नदी का जलस्तर निरंतर बढऩे व लगातार बरसात से अब बांध की तलहटी व निचले इलाकों में बसे गांवों में अफरा-तफरी मच चुकी है। बाराबंकी जिले के परसावल, नैपुरा व चरपुरवा गांवों में बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया, जिससे इन गांवों के करीब पांच दर्जन परिवारों को बांध पर शरण लेनी पड़ी, तो वहीं परसावल ग्राम पंचायत के पासिन पुरवा व कहांरन पुरवा के करीब 200 परिवार नदी के टापू में फंस चुके हैं।

सरयू नदी ने के भी तलख हैं तेवर

अयोध्या में सरयू भी खतरे के निशान को पार करते हुए मांझा के तरफ आंखे तरेरने लगी है। तटीय इलाके में बसे गांव के लोग सरयू के विकराल हो रहे रूख से खौफजदा हो गये हैं। महेशपुर, दुर्गागंज, जैतपुर, तुलसीपुर, साकीपुर, दत्त नगर, गोकुला, इन्दरपुर के लोगों की नजरे उफना रही सरयू पर टिक गई है। भोर में अयोध्या के नये घाट पर स्थित केन्द्रीय जल आयोग द्वारा 92. 740 सेमी जलस्तर दर्ज किया गया जो खतरे के निशान से एक सेमी ऊपर का है। एसडीएम तरबगंज सौरभ भट्ट ने बताया कि क्षेत्र की सभी बाढ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। लेखपालों को निरन्तर गांव मे बने रहने का निर्देश दिया गया है।

गोमती गंगा में भी उफान शुरू

कानपुर के गंगा बैराज में गंगा का जल स्तर बढ़ गया और चेतावनी बिन्दु को पार कर दिया। ऐसे में गंगा बैराज पर पानी के दबाव को देखते हुये बचे हुये फाटक खोल दिये गये। तो वहीं अब सभी फाटक खोले जाने से कटरी के दर्जनों गावां में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है जिसके साथ ही लखनऊ में भी बाड़ का अंदेशा है हालांकि जिला प्रशासन ने इसके लिये पूरी तैयारी कर ली है और बाढ़ चौकियां पूरी तरह से सक्रिय हैं।

आज कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?

उत्तर प्रदेश को पहले तरसाने के बाद मॉनसून जो मेहरबान हुआ तो आफत ही बन गया. आज राज्य के मध्य और पूर्वी शहरों में जल भराव या बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं क्योंकि लखनऊ, झांसी, कानपुर, फ़तेहपुर, बांदा, हमीरपुर, लखनऊ, सुल्तानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद और जौनपुर सहित मध्य और पूर्वी यूपी में पहले से ही मूसलाधार बारिश हो रही है यहां आज भी भीषण वर्षा के आसार हैं l

पहाड़ों में भी हो रही तेज बारिश से मोक्षदायिनी गंगा कानपुर में चेतावनी बिन्दु को पार कर गयी। जिसके चलते बैराज के सभी गेट खोल दिये गये हैं। बैराज के गेट खोले जाने से एक दर्जन गांवों के डूबने का खतरा बढ़ गया है। गंगा बैराज के गेज रीडर उत्तम पाल ने बताया मध्य व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन दिनों लगातार बारिश हो रही है। इसके साथ ही नरौरा बांध का पानी छोड़ने से और अन्य सहायक नदियों के उफान पर होने से गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। ऐसे में गंगा बैराज के सभी 30 गेट को खोल दिये गये हैं। कहा, इस समय बिठूर से आने पर बैराज में जल स्तर 113.95 मीटर है। बैराज से भैरवघाट के बीच 112.55 मीटर जल स्तर है। कहा, बैराज में चेतावनी बिंदु 113 मीटर पर है, जबकि खतरे का निशान 115 मीटर पर है।

खादर में मची खलबली, प्रशासनिक अलर्ट

गंगा का जलस्तर बढ़ने से खादर यानी गंगा कटरी इलाके में खलबली मच गयी है। जल स्तर बढ़ने से कटरी इलाके में रहने वाले करीब एक दर्जन गांव में रहने वालों के चेहरों पर खौफ साफ देखा जा रहा है। कल्लूपुरवा के राधेश्याम व नत्थूपुरवा गांव के ओमनारायण ने बताया, गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देख कर लग रहा है, जल्द ही उनके गांव में पानी आ जाएगा। इसके अलावा रामपुर, बड़ा मंगलपुर, पहाड़ीपुर सहित दर्जनों गांव में पानी भरने का खतरा मंडराने लगा है। पानी के खतरे को भांपते हुए ग्रामीणों द्वारा अपनी कुछ गृहस्थी को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिये हैं। बची खुची गृहस्थी भी लगभग बक्शों में बंधी हुई है। बताया जा रहा है कि अगर गंगा नदी का जल स्तर इसी रफ्तार में बढ़ता रहा तो नदी के किनारे बसे तीस गांव के करीब 20 हजार लोगों की जिंदगी मुश्किल में पड़ सकती है। इस बीच जिला प्रशासन भी पूरी तरह से सर्तक है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। प्रशासन ने गंगा के किनारे बसे इन गांवों में रहने वालों लोगों को वहां से सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा है। हालांकि गांव वाले अभी अपना गांव छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

बाढ़ क्षेत्रों की बराबर की जा रही निगरानी
जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत ने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार बाढ़ संभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों की सूची बना ली गई है और जैसे ही गंगा का पानी खतरे के निशान तक पहुंचा उससे पहले ही ग्रामीणों को निकाल लिया जाएगा। कहा संभावित खतरे को भांपते हुये बाढ़ चौकियों पर 24 घंटे सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिये गये हैं। कहा कि बाढ़ के हालात बनने पर ग्रामीणों को बाढ़ प्रभावित गांवों से निकाल कर राहत शिविरों में पहुंचाया जाएगा। इसके लिये सामाजिक संगठनों की सूची तैयार कर ली गयी है और अन्य लोगों की भी मदद ली जाएगी। बाढ़ पीड़ितां के लिए राहत शिविरों में खाने पीने, रहने की सारी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिये गये हैं। कहा कि बाढ़ क्षेत्र के सभी प्राथमिक व जूनियर स्कूलों को अभी तीन दिन के लिए बंद करने के निर्देश दिये गयें हैं अगर जरूरत पड़ी तो आगे भी बंद रखा जायेगा।

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