अलीपुर, नरेला सब रजिस्ट्रार ऑफिस में घूसखोर अफसरों का बोलबाला, जनता परेशान

अजय शर्मा || अलीपुर स्थित सब रजिस्ट्रार ऑफिस में घूसखोर अफसरों ने यहां का माहौल खराब कर दिया है, जिससे आम लोगों को काम कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिना घूस लिए कोई अफसर फाइल पर साइन करने को तैयार नहीं होता। सबसे ज्यादा घूसखोरी जमीन की एनओसी के लिए होती है। अगर एनओसी स्वयं भूमि धारक जमा कराता है तो उसका काम ही नहीं होता किसी ना किसी बहाने उसे टरका कर उसे कैंसिल कर दिया जाता है वही उसी एनओसी को डॉक्यूमेंट्री राइटर(दलालों) के द्वारा जमा कराया जाए तो वह दो-चार दिन में ही तैयार होकर आ जाती है क्योंकि एनओसी में सभी अक्षरों का रिश्वत के रूप में हिस्सा होता है दलालों के थ्रू तुरंत काम होता है और आम जनता परेशान रहती हैअसल न्यूज़ को विभागीय सूत्रों से पक्की ख़बर मिली है कि एनओसी के लिए सब रजिस्ट्रार ऑफिस को कम से कम 25 हज़ार जबकि अधिकतम 1 लाख रुपये तक रिश्वत पहुंचती है। जबकि इसी काम के एवज में मात्र 100 रुपये फीस का प्रावधान है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि DM ऑफिस भी यहीं हैं और उन्हीं के नाक के नीचे रिश्वतखोरी का खेल वर्षों से चल रहा है
जमीन की NOC का पूरा खेल समझिये
अगर किसी को अपनी जमीन बेचनी है तो उसे सब रजिस्ट्रार ऑफिस से एनओसी लेनी होती है। इस एनओसी का मतलब है कि उक्त जमीन पर सरकार ने ना तो भविष्य के लिए कोई प्लानिंग की है, ना ही जमीन को एक्वायर किया है। एनओसी प्राप्त करने के लिए सब रजिस्ट्रार ऑफिस में 100 रुपये की फीस देकर प्रोसेस शुरू कराया जाता है। यहां से फाइल नोटिफिकेशन ऑफिसर, फिर तहसीलदार इसके बाद पटवारी को जाती है। पटवारी रिपोर्ट तैयार कर फाइल गिरदावर को पहुंचा देता है। यहां से फाइल तहसीलदार स होते हुए एडीएम को जाती है और क्लीयर होकर सब रजिस्ट्रार को मिलती है।
बिना घूस साइन नहीं करते अफसर
एनओसी की फाइल इतने जगह घूमती है कि अगर एक अफसर साइन कर भी दे, तो दूसरा बिना घूस लिए तैयार नहीं होता। इस प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका पटवारी की होती है। क्योंकि पटवारी रिपोर्ट तैयार करता है, बिना मोटी घूस लिये पटवारी रिपोर्ट तैयार नहीं करता। सूत्र बताते हैं कि पटवारी कुल घूस का 40 फीसदी अकेले डकार जाता है। बाकी की घूस अन्य अधिकारियों में बंटती है। बिना रिश्त पटवारी रिपोर्ट बनाता भी है, तो उसमें इतनी गड़बड़ करता है कि आगे कोई अफसर उसे ओके नहीं करता। इसलिए जैसे जैसे टेबल पर फाइल पहुंचती है रिश्वत की रकम बंटती जाती है। इस पूरे प्रोसेस के लिए जमीन मालिक को कम से कम 25 हज़ार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। क्योंकि जमीन मालिक से खुलेआम टेबल पर घूस नहीं ले सकते, इसलिए डॉक्यूमेंट राइटर इसमें भूमिका निभाते हैं। यह फाइल जमीन मालिक लेकर प्रोसेस शुरू करते हैं और रिश्वत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते रहते हैं।
फीस 100 रुपये, 21 दिन का प्रक्रिया
जिस एनओसी के लिए जमीन मालिक को एक लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं उसकी आधिकारिक फीस मात्र 100 रुपये है। इतना ही नहीं प्रक्रिया के तरह एनओसी 21 दिन के अंदर देने का प्रावधान है। लेकिन अगर रिश्वत ना पहुंचे तो 21 दिन तो क्या 2100 दिनों तक भी एनओसी नहीं मिलती। इस तरह सब रजिस्ट्रार दफ्तर में घूसखोर अफसर लाखों करोड़ों के हर महीने वारे न्यारे कर रहे हैं।
घूसखोरी पर जल्द नया खुलासा करेंगे
सब रजिस्ट्रार ऑफिस में भ्रष्ट अधिकारियों ने रिश्वखोरी के हज़ार तरीके खोज निकाले हैं। ऐसी ही जमीन से जुड़ी एक धारा है 81। इस धारा को भ्रष्ट अफसर रिश्वतखोरी के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

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