क्या मैं हूं देशभक्त

तारकेश कुमार ओझा।। हर 15 अगस्त व 26 जनवरी को सोचता हूं मैं क्या मैं हूं देशभक्त क्योंकि मेरी चिंता के केंद्र में नहीं सरकारी सुविधा या राशन जो मिला उसी से रहा संतुष्ट नहीं दिया कभी कोई ओजस्वी भाषण शासन से कभी नहीं की कोई मांग किसी को देशद्रोही बता कर नहीं तोड़ी किसी की टांग राजनेताओं के संबोधनों पर नहीं पीटी ताली देशभक्ति के ज्वार में नहीं दी किसी को गाली चाहे भूख से जलती रहे आंत कभी नहीं पीसता अपने दांत मौन साधना में है मेरा विश्वास नापसंद है निष्ठा या विचारधारा का खूंटा न कैंडल मार्च न नारेबाजी या भाषण से कभी मंच लूटा क्या हम जैसों का हो गया है भाग्य का सूर्य अस्त क्या मैं हूं देशभक्त

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