पुरातत्व और प्रकृति से छेड़छाड़ बनाम खजुराहो फ़िल्म फेस्टिवल

पुरातत्व और प्रकृति से छेड़छाड़ बनाम खजुराहो फ़िल्म फेस्टिवल

रिपोर्ट : निर्णय तिवारी

खजुराहो , (छत्तरपुर) : खजुराहो फ़िल्म फेस्टिवल हर बार अपने शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर जाता है और इसपे सवाल उठने लगते है। दरअसल खजुराहो को पहचान दिलाने के लिए हर वर्ष यह पिछले 3 साल से आयोजित किया जाता है, पर यह खजुराहो को पहचान दिलाने के लिए कम कुछ लोगो को फायदा पहुचाने के लिए ज्यादा किया जा रहा है। मामला यह ही कि जब खजुराहो फ़िल्म फेस्टिवल जब पहली बार आयोजित किया गया तब यह मेहमानों को बैठने की कोई उचित व्यवस्था दिखाई नही दी और दूर दूर से आये लोग यहां मुसीबत का सामना करते नज़र आये थे।

दूसरी बार के आयोजन में भी यही सिलसिला बदस्तूर जारी रहा पर यहाँ के नगरीय प्रशासन और प्रशासन के फायदे के चलते इस ओर किसी का ध्यान नही गया। विगत वर्षों की भांति इस बार भी आयोजन किया गया पर इस बार बात अव्यवस्था तक ही सीमित नही रही, अबकी बार इनके रास्ते मे आने वाले खेल के मैदान तालाब और पेड़ो को काट दिया गया। जी हाँ पर जहाँ टपरा टाकीज़ बनाया गया है वह पर रास्ते मे आने वाले कई पेड़ो की जीवंत टहनियों को काट दिया गया है, तालाब को मिट्टी डाल कर पूर दिया गया है। निश्चित ही यह सभी चीज़े प्रशासन के आंतरिक लाभ और थोड़ी सी सम्मान की लालसा में प्रकृति से छेड़छाड़ ओर नुकसान करने की कलई खोल रही है।

जिस मंदिरों को संक्षरण से बचाने के लिए आम लोगो का उन पर चप्पल जूते पहन कर जाना निषेध रहता है। वहाँ पर इस समारोह के दौरान फिल्मी कलाकार और उनके साथ रहने वाले छुटभैये (जो अपने आप को किसी फिल्म सितारे से कम नही समझते और मीडिया वालों को टुच्चे लोग जैसे शब्दो से संबोधित करते है) भी मंदिरों पर जूता चप्पल पहन कर जाते है। क्या हमारे क्षेत्र की विरासत का कोई महत्व नही है क्या साल दर साल यूंही ये सब होता रहेगा।

इस तरह से तो लगता है आने वाले समय में अगर यहाँ के मंदिर भी इनके रास्ते मे आये तो शायद इनसे भी छेड़छाड़ कर अपने हिसाब से बना लिया जाएगा। वैसे तो ये समारोह स्थानीय कलाकारों के लिए एक बड़ा मौका और मंच है । पर यही के स्थानीय कलाकारों ने यहां अपने साथ उपेक्षा करने के आरोप लगाए है । स्थानीय प्रतिभा को दवाकर उसकी कब्र पर ये समारोह किया जा रहा है। क्या इस तरह से हमारे क्षेत्र को हर तरफ से नुकसान पहुचा कर हमें क्या मिल रहा है ?

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