भागवत कथा सुनने से मानव भवसागर पार कर जाता है

भागवत कथा सुनने से मानव भवसागर पार कर जाता है

मीरजापुर : लालगंज क्षेत्र के बबूरा भैरोदयाल में चल रहे भागवत महापुराण प्रेमज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन कथा व्यास पं कलातीत त्रिपाठी ने कहा कि धर्म से पुरूषार्थ पैदा होता है। विकार मिटता है और सदविचार पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि नारी समाज ही सृष्टि का सृजन करके मानव के उन्नति की राह बनाती हैं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने से मानव भवसागर पार कर जाता है।

कथाकार व्यास पं कलातीत त्रिपाठी ने रविवार को कहा कि सत्संग से विवेक पैदा होती है। ईश्वर की कृपा से सत्संग होता है। उन्होंने कहा कि गोकर्ण ने भगवान की भक्ति के कारण अपने भाई धुंधकारी को पापों से मुक्त कराया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने दोष के कारण कुमार्ग पर चलता है। कुकर्म सभी प्रकार के आडंबर का आधार है। वाराणसी के सामवेद के आचार्य पं रत्नेश पांडेय ने कहा कि मनुष्य को सत्य को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कलयुग नाम जपने से कल्याण होता है। ध्यान और मन लगाकर जपने से भक्ति का अदृश्य रूप से पूरे परिवार का कल्याण करती है। सभी लोगों के अंदर सदविचार बना रहता है। उन्होंने कहा कि शुकदेवजी ने परीक्षित को कथा सुनाकर कल्याण किया था।

उन्होंने बताया कि इस धरती पर जो आया है वह जाएगा, जो फरा वह झरा। उन्होंने कहा कि दिन की तीन गति होती है सुबह, दोपर, शाम। शुकदेव जी ने बताया कि मृत्यु के समय मनुष्य को भगवान के स्थूल रूप का चिंतन करना चाहिए, क्योंकि इस धरा पर सब नश्वर है। इस अवसर प्रमुख श्रोता डा कमला प्रसाद त्रिपाठी व गुलाब कली, चंद्रभूषण त्रिपाठी, ग्राम प्रधान शंभू त्रिपाठी, देवदत्त मिश्र, दीना गिरि, हरगोविंद त्रिपाठी, स्वामी महराज, पन्नालालू उपाध्याय, हूबलाल दूबे, ज्ञानचूद शुक्ला, अवधेश त्रिपाठी, जयप्रकाश उपाध्याय, रामगोपाल मिश्र, शिवशंकर पांडेय, अमरेश दूबे सहित काफी संख्या में लोगों मे कथा का श्रवण किया।

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