जानलेवा बीमारी रूबेला, खसरा के टीके लगाए

कांठ।।( फ़रीद अंसारी ) पोलियो मुक्त भारत की तरह भारत सरकार अब खसरा मुक्त भारत के लक्ष्य पर काम कर रही है। 2020 तक भारत को खसरा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

जिस को ध्यान में रखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार ने खसरा और रूबेला जैसी गंभीर एवं जानलेवा बीमारी के से बचाव के लिए महाअभियान की शुरुआत कर दी है।

एवं सभी स्कूलों आदि में स्वास्थ विभाग की देखरेख में बच्चों का टीकाकरण जारी है । बच्चों को इन खतरनाक एवं जानलेवा बिमारी से बचाव के लिए आज मिल्लत स्कूल के बच्चों को खसरा , रूबेला , मंप्स जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से टीके लगवाए गये जिस में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांठ की टीम परविंद्र कुमार ( सुपर वाइजर )अलीमा खातून ( एएनएम) , गजरेश देवी( एएनएम) ने दि मिल्लत स्कूल के बच्चों के टीके लगाएं तथा कुछ अभिभावकों की टीके को लेकर गलतफहमियों को भी दूर किया जिस के बाद अभिभावकों ने अपनी मर्ज़ी से दि मिल्लत स्कूल में अपने बच्चों के टीके लगवाए । 

अभिभावकों को अलीमा खातून ने बताया कि यह वैक्सीन बच्चों को तीन खतरनाक बीमारियों जैसे खसरा, गलगंड (मंप्स) और रूबेला रोग से बचाता है टीकाकरण से ही इस की रोकथाम संभव है मीजल्स-रूबेला वायरस गंभीर और जानलेवा बीमारी होती है ।
अलीमा खातून ने बताया कि मीजल्स, मंप्स और रूबेला वायरस हवा में फैलता है
यदि कोई मरीज पहले से इस वायरस से संक्रमित है तो इसका वायरस स्वस्थ व्यक्ति को भी निशाने पर ले लेता है।

मीजल्स (खसरा) : खसरा के वायरस से ददोरा, खांसी, नाक का बहना, आंखों में जलन और तेज बुखार होता है। इसके साथ ही कानों में संक्रमण, निमोनिया, बच्चों को झटका आना, घूरती आंखे, दिमाग को नुकसान और अंत में मौत तक हो जाती है।

मंप्स : मंप्स से सिर में दर्द, तेज बुखार, मांस पेशियों में दर्द, भूख नहीं लगना, ग्रंथियों में दर्द, दिमागी बुखार।

रूबेला : महिलाओं में आर्थराइटिस और हल्का बुखार, गर्भावस्था में गर्भपात का खतरा, बच्चों में जन्मजात दोष जैसे सिर का बड़ा होना सहित अन्य परेशानियां शामिल है। 

क्या हैं खसरा व रूबेला ?

खसरा को आम तौर पर छोटी माता के नाम से भी जाना जाता है। यह अत्यधिक संक्रामक होता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से यह बीमारी फैलती है। इसमें निमोनिया, डायरिया व दिमागी बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है। चेहरे पर गुलाबी-लाल चकत्ते, तेज बुखार, खांसी, नाक बहना व आंखें लाल होना मर्ज के लक्षण हैं। रूबेला गर्भावस्था के दौरान होने वाला संक्रमण है। यह नवजात शिशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। संक्रमित माता से जन्मे शिशु को ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, बहरापन, मंद बुद्धि व दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। रूबेला से गर्भपात, समय पूर्व प्रसव व गर्भ में बच्चे की मौत भी हो सकती है।

एक बार जब वायरस शरीर में चला जाता है, संक्रमण पूर्णतया नाक, सांस की नली और फेफड़ों, त्वचा और शरीर के अन्य अंगों में फैलता है। खसरे के साथ एक व्यक्ति लक्षण शुरू होने के एक से दो दिन पहले (या ददोरे से तीन से पांच दिन पहले) से लेकर ददोरा प्रकट हने के चार दिन बाद तक दूसरों तक खसरा फैला सकता है। खसरा आम तौर पर औसत दर्जे की बीमारी का कारण बनता है। छोटे बच्चों में, जटिलताओं में मध्य कान का संक्रमण (ओटिटिस मीडिया), निमोनिया, क्रूप और दस्त शामिल हैं। वयस्कों में, बीमारी की और भी गंभीर होने की संभावना हो जाती है। पुराने रोगियों के लिए खसरे से संबंधित न्यूमोनिया के लिए अस्पताल के इलाज की आवश्यकता असामान्य नहीं है। अर्थात समय रहते टीका लगवाना ही इस बचाव का मुख्य कारण है इस मौके पर स्कूल के समस्त स्टाफ का पूर्ण योगदान रहा प्रधानाचार्या निकहत जहां ने सभी का आभार प्रकट किया ।

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