Delhi: गश्त के दौरान पुलिसकर्मी को संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ करना पड़ा भारी, संदिग्ध ने लगाए बेबुनियाद आरोप

Demo pic

दिल्ली।। (प्रभाकर राणा) क्या देश की राजधानी को भी कश्मीर बनाना चाहते हैं लोग, जहाँ भीड़ पुलिस और सेना के जवानों के साथ मारपीट तक कर देती है। करीब करीब कुछ ऐसा ही मामला दिल्ली के प्रेम नगर थाना इलाके से सामने आया है, जहाँ अपने इलाके में इलेक्शन की एक रात पहले वर्दी में दिल्ली पुलिस का एक कॉन्स्टेबल करीब रात 11 बजे के आसपास इलाके में गश्त कर रहा था, तभी उसे सड़क किनारे खड़ा एक युवक संदिग्ध लगा, तो पुलिसकर्मी उससे पूछताछ करने लगा, जो उस युवक को गंवारा नही हुआ और वो पुलिसकर्मी को ही बुरा भला कहने लगा और उस युवक ने चिल्ला चिल्ला कर ये कह कर लोगो को बुला लिया कि ये पुलिस वाला मुझे धमका रहा है। अपनी तरफ 20-25 लोगो को दौड़कर आता देख पुलिसकर्मी को लगा कि कहीं ये भीड़ उसके साथ कोई मारपीट न कर दे या उसके सरकारी हथियार के साथ छीना छपटी न कर दे।

बस तभी उसने अपने बचाव में अपनी सर्विस पिस्टल निकल ली, और इस दौरान लोगो ने पुलिसकर्मी का वीडियो बनाना शरू कर दिया,  जिसमे न तो पुलिसकर्मी किसी पर पिस्टल तान रहा और न ही किसी को वो धमका रहा है, बल्कि उल्टा भीड़ को समझाता हुआ ही दिख रहा है। जबकि वीडियो में दिख रहा संदिग्ध युवक बार बार पुलिसकर्मी को उकसा रहा है, साथ ही लोग बोल रहे हैं कि इसका वीडियो बनाओ वीडियो बनाओ। इसके बाद वहीं से उस संदिग्ध युवक ने पुलिस को 100 न. पर कॉल कर दी कि एक पुलिसकर्मी शराब पीकर झगड़ा कर रहा है। जिसके बाद मंगोल पूरी स्थित संजय गांधी अस्पताल में कॉन्स्टेबल का मेडिकल भी कराया गया जहाँ साफ हो गया कि पुलिसकर्मी ने शराब नही पी रखी थी।  
                   

अब ऐसे में कई सवाल खड़े होते हैं कि आखिर पुलिसकर्मियों को सरकार ड्यूटी के दौरान हथियार क्यों देती है? क्या सिर्फ उसे कमर में लगाने के लिए ??? 

वहीं क्या कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान तनाव स्थिति में अपनी आत्म रक्षा के लिए हथियार निकाल भी नही सकता ??? 

जब कोई ऐसी स्थिति बन जाये कि पुलिसकर्मी को लगे कि भीड़ उसपर हमला कर सकती है या इस दौरान उसकी सरकारी बंदूक और इसके साथ कोई छेड़छाड़ या छीना छपटी भी हो सकती है तो क्या हथियार को निकालकर पकड़ना कोई जुर्म है ????
     

अब ऐसे में आखिर कोई करे भी तो क्या करें। क्या कानून सिर्फ पुलिसकर्मियों के लिए बने हैं क्या आम जनता या अपराधियों के लिए कोई कानून नही हैं। गौरतलब है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों पर आए दिन हमले होने की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं फिर भी सच ये है कि पुलिस अपने ही लोगो पर ऐसे मामले दबाने का प्रयास करती है, जिससे असमाजिक और आपराधिक क़िस्म के लोगो का मनोबल बढ़ता है। और अपने ही महकमे के आलाधिकारियों के इस रवैये के कारण पुलिसकर्मी भी खुद डर के साये में कुछ गलत होता देख कर भी अनदेखा कर देते हैं। और चुस्त होते हुए भी सुस्त हो जाते हैं। और अपराधियों को पकड़ने और जुर्म को कम करने की वजह चुपचाप बस मज़बूरी में अपनी नोकरी करते रहते हैं। 
प्रभाकर राणा दिल्ली

COMMENTS

%d bloggers like this: