Haryana: काल’ सौहार्द की अनूठी मिसाल की आजोबो गरीब प्रथा

उत्तर-प्रदेश।।(दीपक कुमार) काले रंग का आदमी जब दौडता है बाजार मे उस के पीछे हजारों कि भीड दौडती है। और मार भी खाती है डर कर भी भागती है लोग उसे काल कहते है।

कैराना में रामलीला से एक दिन पूर्व निकाला जाता है। काल जुलूस । सदियों पुरानी इस परंपरा को जीवित रखने में हिदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय भी पूरी जिम्मेदारी से साथ निभा रहा है। और अजीबो गरिब प्रथा है जिसे प्रसाद समझ कर लोग काल से मार खाते है व काले कपडे करने के लोग पैसे देतें है।काल जुलूस यहां हिदू मुस्लिम समुदाय के सौहार्द, प्रेम व भाईचारे की मिसाल कायम कर रहा है। कैराना की यह मिसाल इसीलिए आज भी बेमिसाल है। 

महाभारत काल में पानीपत की लडाई में जाते वक्त कर्ण ने जिस स्थान पर रात्री में विश्राम किया था उसका नाम कर्णनगरी पड गया था जो अब बदल कर कैराना हो गई।  सालों से चली परंपरा को देखना हो तो कभी कैराना आइए। शामली जनपद मुख्यालय से महज 12 किमी की दूरी पर स्थित कर्ण की इस नगरी में दोनों संप्रदाय के लोग देशभर में अनोखी मिसाल कायम कर दिखा रहे हैं। कैराना की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पूरे देश में देखने लायक है। हिदू परंपरा के अनुसार, श्री रामलीला महोत्सव हर शहर में शुरू हो चुका है, लेकिन इसके बीच निकाले जाने वाले काल के जुलूस की परंपरा अब कहीं देखने को नही मिलती है। कैराना देश में एकमात्र ऐसा शहर है, जहां यह परंपरा आज भी जारी है। खास बात यह है कि काल के इस जुलूस में मुस्लिम बढ़-चढ़कर भाग लेते और जुलूस निकलाते हैं। यही नहीं, जहां तक होता है, वहां तक सहयोग भी प्रदान करते हैं। 

कैराना में रामलीला मंच का आयोजन कई सालो से किया जाता हैं यही रामलीला के प्रथम दिन बैड बाजो के साथ शिव बारात निकाली जाती है। और उसके दूसरे दिन एक व्यक्ति को कले रंग मे पोत कर काल बनाया जाता है।  उस के हाथो मे एक लकडी कि तलवार भी बनाकर दी जाती है। जब उस का संगर हो जाता है तब वह व्यक्ति काली माता के मन्दिर मे जाता है । और काली माता की पुजा करने के बाद काल नगर में निकल पडता है। भागता दौडता रहता है और लोगों को अपनी लकडी कि तलवार से मारता भी है और जिस व्यक्ति के साफ कपडे होते है उन्हे पक्ड कर उनसे चिपक जाता है।  और कपडो को काले भी कर देता है। इस अजीबो गरिब प्रथा से लोग मार भी खाते है और कपडे भी काले करवाते है फिर भी उस को कोई कुछ नहीं कहता बल्कि लोग उस कि मार को भगवान का प्रसाद बताते है। और उसके बदले पैसे भी देते है।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि रामायण काल मे लंका के राजा रावण ने अपनी शक्ति के बल पर काल को बंदी बना लिया था क्योंकि रावण को घमंड था के जब काल ही उस का बंदी है तो उस का कोइ कुछ नहीं बिगड़ सकता उसी परंपरा के आधार पर रामलीला के शुरू मे ही काल को निकाला जाता है जिसे बाद मे रावण द्वारा बंदी बना लिया जाता हैं और जब भगवान श्री राम लंका पर चढाई कर रावण से युद्ध करते है। तब रावण के विनाश के लिए काल को भी मुक्त कराया गयाथा।

लोगों का कहना है।की यह प्रमपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। इसमें रावण ने जब देवताओ को कैद किया था। तो काल को कैद कर लिया था। और उसे छुडाकर रावण का विनाश किया गया।  और यह प्रथा प्रचीन समय से चली आ रही है। इसमें सभी धर्मो के लोग शामिल होते है।

कैराना की रामलीला करीब 90 वर्षो से चली आ रही है कैराना की रामलीला के लगभग 20 सदस्य है जिन्होंने अपनी रामलीला कमेटी द्वारा 11000 हज़ार रुपये देकर इस रामलीला को कैराना के अंदर चला रहे है क्योंकि पूर्वजो की गाथा है कि इनसे बच्चो का ज्ञान बढ़ता है इससे यह पता रहता है कि राम , लक्ष्मण ,दसरथ ,सीता के बारे में पता रहे थे की ये थे कोन ! लोगों का कहना है कि इसमें किसी नेता लेना देना नहीं है लगभग 20 सदस्य कि बनी रामलीला कमेटी खुद अपनी कमाई से 11 – 11 हज़ार देकर इस रामलीला का आयोजन करते है मज़े की बात यह है कि कैराना के आस पास के क्षेत्र से रामलीला को देखने आते है कैराना में रह रहे मुस्लिम लोग भी इस रामलीला को देखने के लिए आते है !

शामली के कैराना में जहाँ 95% मुस्लिम बहुमुल्य क्षेत्र है वहाँ एक अनोखी रामलीला होती है करीब 90 वर्षो से रामलीला चल रही है मुख्य बात यह है कि जो रामलीला पहले होती थी उसमें मुस्लिम समुदाय के लोग रामलीला में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है ,अब रामलीला में हिस्सा लेने वाले नाम सतीश प्रजापति है जो की दिन में चाट का ठेला लागकर अपना कमाई का साधन है और रात को रामचंद्र का रोल रामलीला में करते है दूसरा नाम है शगुन मित्तल दिन में अपनी वकालत करते है और रात को रामलीला में रावण का रोल करते है , तीसरा नाम शिवम गोयल है जो सीता माता का रोल करते है दिन में इनका एक वकील के यहाँ टाइप का काम करते है ,चौथा नाम राकेश प्रजाति लक्ष्मण का रोल रामलीला में करते है लेकिन इनका दिन का काम लोगो के कपडे सिलने का है पंचवा नाम है आसूं जो हनुमानजी का रोल करतें है इन का अपना दुकान का कार्य है जहां यह किताबें और स्कूल के बच्चों का सामना बेचने का कर्या है। अपनी मेहनत मुजदूरी कर अपना परिवार चलते है इस अवसर पर कैराना वासियों एव पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग रहता।

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