Haryana: किसानों पर आफत बनकर आई बरसात, प्रशासन के दावों की खुली पोल

किसानों का पीला सोना पानी में बह गया ....

हरियाणा।। (सुरिन्दर वधावन ) गुहला चीका धान का सीजन शुरू होते ही सरकार और प्रशासन द्वारा अनाज मंडी में किसानों के लिए पुख्ता इंतजाम होने के दावों की पोल आज चंद मिनटों की बारिश ने खोल दी जिसे अनाज मंडी में चारों और पानी हो गया और किसानों का पीला सोना पानी में बह गया जिसे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया और किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई जिस कारण किसानों ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार सीजन में सरकार और प्रशासन द्वारा किसानों के लिए पुख्ता इंतजाम होने के दावे किए जाते हैं।

परंतु सरकार और प्रशासन के दावों की पोल दिखाते हुए किसानों ने बताया कि प्रशासन द्वारा मंडी में निकास पानी निकासी के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं और ना ही किसानों के गेहूं को बरसात से बचाने के लिए तपाल का इंतजाम आत किया गया है किसानों ने बताया कि जो शेड किसानों के धान को बरसात से बचाने के लिए बनाया गया था उसमें गेहूं के कट्टे लगाए गए हैं जो यह बताने के लिए काफी है कि सरकार और प्रशासन किसानों के प्रति कितना गंभीर है।

गांव प्रभोत   से सरपंच किसान बलविंदर सिंह ने कहा कि किसानों का करोड रुपए का धान पानी में बह गया है परंतु अभी तक कोई भी अधिकारी और कर्मचारी किसानों की सुध लेने अभी तक मौके पर नहीं पहुंचा है । सरपंच बलविंदर सिंह ने कहा कि कल उपायुक्त कैथल ने भी मंडी का निरीक्षण किया था परंतु उपायुक्त के निरीक्षण पर भी स्थानीय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए जिसे किसानों का धान बर्बाद होने से बच सकें।

 सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए सरपंच बलविंदर सिंह ने कहा कि जिन खराब फसलों की गिरदावरी पिछले वर्ष हुई थी अभी तक सरकार द्वारा उसका मुआवजा भी नहीं दिया गया है जिसे किसान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है सरपंच बलविंदर सिंह ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द गिरदावरी करवाकर और जो फसल मंडी में किसानों की खराब हुई है उनका मुआवजा किसानों को जल्द से जल्द ही दिया जाए।

उपायुक्त का निरीक्षण भी सवाल….

उपायुक्त कैथल धर्मवीर सिंह द्वारा कल ही धान का सीजन शुरू होते ही निरीक्षण किया गया था और अनाज मंडी में किसानों के लिए पुख्ता इंतजाम होने की बात कही गई थी परंतु उपायुक्त के इस दावे की पोल भी आज बारिश ने खोल कर रख दी है । ऐसे में सवाल यह उठता है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा उपायुक्त को भी गुमराह किया गया और मंडी में पुख्ता इंतजाम बात होने की बात कही जिसे उपायुक्त   कें निरक्षण  पर सवाल उठते हैं की उपायुक्त महोदय द्वारा निरीक्षण में किस प्रकार की जांच की गई।

कार्यालय में मौके पर नहीं मिला कोई अधिकारी या कर्मचारी…..

जब इस मामले पर मार्केट कमेटी के सचिव और मंडी सुपरवाइजर से बात करना चाहा तो न तो साहब अपने कार्यालय में मिले और ना ही मंडी में।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि इन अधिकारी किसानों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है साहब तो अपने काम में मस्त हैं। किसानों द्वारा जो आरोप इन अधिकारियों पर लगाए गए थे उनका अपने कार्यालय में न मिलना यह बताने के लिए काफी है कि यह अधिकारी सरकार और किसानों के प्रति कितने गंभीर हैं।

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