पर्यावरण प्रदूषण में हरियाणा की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया

हरियाणा।।(प्रवीण कुमार ) हिसार में आज  हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने हरियाणा कृषि विश्वविद्याल में प्रेस वार्ता का आयोजन किया। प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के लिए प्रदेश की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और इस संबंध में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि हरियाणा में पिछले वर्ष कुल धान बिजाई क्षेत्र के 2 प्रतिशत जबकि इस वर्ष केवल एक प्रतिशत क्षेत्रफल में फसल अवशेषों को आग लगाई गई। मुख्य सचिव ढेसी ने यह जानकारी आज हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के फैकल्टी हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंडल आयुक्त राजीव रंजन व उपायुक्त अशोक कुमार मीणा भी उनके साथ मौजूद रहे । मुख्य सचिव ने बताया कि दिल्ली में फैले प्रदूषण के लिए हरियाणा और यहां के किसानों की भूमिका नगण्य है जबकि इसे लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में ऐसी तस्वीर पेश की जा रही है जैसे हरियाणा के हर खेत में किसान आग लगा रहे हों। उन्होंने तथ्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि हरियाणा के मुख्यत: 10 जिलों में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल बोई जाती है। हरसैक द्वारा उपग्रहीय तस्वीरों के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश में 12473 स्थानों पर आग लगाई गई।
औसतन आग लगाने की प्रत्येक घटना में 2-3 एकड़ क्षेत्रफल शामिल होता है लेकिन यदि इसे 5 एकड़ भी मान लिया जाए तो पिछले वर्ष कुल 25 हजार हेक्टेयर में आग लगाई गई जो कुल क्षेत्रफल का केवल 2 प्रतिशत है। इसी प्रकार इस वर्ष 7273 स्थानों पर आग लगाई गई जो कुल क्षेत्रफल का लगभग 1 प्रतिशत है।
इस वर्ष स्थापित किए 857 कस्टम हायरिंग सेंटर-
हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने बताया कि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के लिए 80 प्रतिशत अनुदान देकर 857 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करवाए गए हैं जबकि 50 प्रतिशत अनुदान देकर 3800 किसानों को व्यक्तिगत स्तर पर कृषि उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। इनके माध्यम से सरकार ने इस वर्ष 110 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान व किसान भाइयों की सजगता व जिम्मेदारी की भावना के चलते इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में भारी-भरकम कमी आई है। प्रदेश सरकार के यह प्रयास अगले वर्ष भी जारी रहेंगे ताकि पराली को आग लगाने की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। 
हरियाणा में लगेंगे 3 सीबीजी प्लांट-
मुख्य सचिव ने बताया कि पराली के प्रबंधन के लिए अप्रैल माह में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन व हरियाणा के नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के बीच एक करार हुआ है जिसके चलते हरियाणा के तीन जिलों, कुरुक्षेत्र, कैथल व जींद में फसल अवशेष आधारित सीबीजी (कम्प्रेस्ड बायो गैस) प्लांट लगाए जाएंगे। इन प्लांट के लिए किसानों से पराली खरीदी जाएगी और इससे ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा। इसी प्रकार हरिद्वार में एक फैक्ट्री में पराली से भवन निर्माण सामग्री बनाई जाती हैं जहां कुरुक्षेत्र के किसानों द्वारा भी अपनी पराली भेजी जाती है।
मुख्य सचिव ने इस वर्ष पराली को आग लगाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए सहयोग करने पर प्रदेश सरकार की ओर से किसानों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारे किसान पर्यावरण को स्वच्छ रखने के प्रति जागरूक हैं और अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं जिसके चलते इस वर्ष पिछले वर्ष के मुकाबले आग लगाने की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई। सरकार और प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को जागरूक करके इस समस्या को पूरी तरह से खत्म किया जाए।
हिसार के 160 गांवों में आग लगाने की एक भी घटना नहीं –
ढेसी ने बताया कि हिसार जिला में 160 गांव ऐसे हैं जिनके खेतों में बिल्कुल आग नहीं लगाई गई। इसे सराहनीय बताते हुए उन्होंने जिला के किसानों और प्रशासन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जिला में इस वर्ष खेतों में आग लगाने की 120 घटनाएं दर्ज की गई हैं जो पिछले वर्ष हुई 204 घटनाओं के मुकाबले 40 प्रतिशत कम हैं। 

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