कंक्रीट की नजर लगी नरेला की हरियाली को भेंट चढ़ते जा रहे हैं पेड़

नरेला।। (ओम प्रकाश देशवाल) भारी बारिश के चलते आज सुबह नरेला फायर ब्रिगेड स्टेशन के पास एक नीम का पुराना बड़ा पेड़ भरभराकर गिर गया। जिससे घंटो तक यातायात में बाधा उत्पन्न हुई सूचना दिए जाने पर PWD विभाग के कर्मचारी पहुंचे और पेड़ की कटाई छटाई शुरू कर दी पेड़ बड़ा और पुराना है और दिन भर रुक रुक कर बारिश हो रही है इसलिए इस कार्य को करने में बहुत समय लग रहा है।

पेड़ का निरीक्षण करने पहुंचे देवभूमि उत्तराखंड एकता मंच नरेला संगठन सदस्यों ने देखा कि उक्त पेड़ चारों ओर से कंक्रीट से घिरा हुआ था तारकोल की मोटी परत भी पेड़ के अंदर पहुंची हुई थी। जिससे धीरे-धीरे यह पेड़ कमजोर और अंदर से खोखला होता जा रहा था। जिसकी वजह से आज यह गिर गया।

स्थानीय दुकानदारों ने भी बताया कि यह पेड़ 80 90 साल का था और गर्मी से बहुत राहत प्रदान करता था। परंतु धीरे-धीरे आसपास की जमीन खोखली हो गई है और पेड़ों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

हाल ही में संगठन ने पेड़ों की गणना का काम शुरू किया था जिसके तहत पाया गया कि सफियाबाद रोड से लेकर रेलवे स्टेशन नरेला तक करीब-करीब 100 पुराने पेड़ है।

सबसे अधिक चौकानेवाले बात यह थी कि कोई भी पेड़ पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित नहीं था। अधिकांश पेड़ों की अनाप-शनाप तरीके से छटाई कर दी गई है ।
15 से 20 पेड़ सूख रहे थे और लगभग सभी पेड़ों के इर्द-गिर्द कंक्रीट की मोटी परत चढ़ा दी गई थी जिसका पेड़ों के विकास और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था।

संगठन जल्द इस मामले में वन विभाग और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर नरेला में पेड़ों की सुरक्षा की मांग करेगा।

संगठन का मानना है कि विकास कार्यों के दौरान पेड़ों की बलि नहीं दी जानी चाहिए। पेड़ों के चारों तरफ कंक्रीट और तारकोल की परत नहीं लगानी चाहिए।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एनजीटी ने भी पेड़ों के चारों ओर सीमेंट और कंक्रीट ना लगाने तथा पेड़ों को बिजली की तारों की जद से बचाने के लिए आदेश जारी किया था।

परंतु लगभग सभी सरकारी विभागों निकायों एमसीडी PWD आदि के द्वारा इस नियम का खुले तौर पर उल्लंघन किया जा रहा है।

संगठन ने पेड़ को दोबारा से लगाने अथवा अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए भी PWD के अधिकारी अय्यूब अली जी से फोन पर बात की।

उन्होंने बताया कि टूटे पेड़ को दोबारा लगाने में बहुत खर्चा आता है। नरेला में अभी तक ऐसा नहीं किया गया है और नीम के पेड़ को दोबारा लगाने में उसके जिंदा बचने के अवसर बहुत कम होते हैं।

संगठन ने उन से निवेदन किया है कि सड़क और नाली कामों के निर्माण के दौरान पेड़ों को कंक्रीट और तारकोल की चपेट से सुरक्षित रखा जाए।

उनके इर्द-गिर्द का हिस्सा कच्चा छोड़ा जाए ताकि उनकी वृद्धि पर विपरीत असर ना पड़े और पेड़ सुरक्षित रहे जिससे नरेला की हरियाली बची रहेगी और लोगों को स्वच्छ आबो हवा मिलेगी।

 

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