कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018,चुनाव मैदान में चमके अमित शाह

दिल्‍ली||कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजों से साफ हो गया है कि अब वहां बीजेपी सरकार बनाएगी. बीजेपी के लिए कर्नाटक दक्षिण का प्रवेश द्वार है. देश के दक्षिण हिस्‍से में बीजेपी का कमल अब तक नहीं खिला. हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान राज्‍य में कांग्रेस का मुख्‍य चेहरा सिद्धारमैया भाजपा पर भारी पड़ते दिख रहे थे. टि्वटर पर उनके करीब डेढ़ लाख फॉलोवर हैं जो उनका मुख्‍य हथियार थे. उनके जरिए वह भाजपा के खिलाफ माहौल बनाते जरूर दिखे लेकिन अंतिम निर्णय जनता को देना था और उसने अपने वोट के अधिकार से यह कर भी दिखाया. कुलमिलाकर चुनावी रैली में बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह समेत अन्‍य नेताओं का कांग्रेस सरकार पर प्रहार रंग लाया और उसने कर्नाटक का किला फतह किया. अमित शाह ने दावा किया था कि बीजेपी 130 सीटों पर जीतेगी. मतगणना के बाद बीजेपी 113 के बहुमत के जादूई आंकड़े के आसपास थी. यानी उनका दावा काफी हद तक सही निकला. वहीं कांग्रेस दावे के अनुरूप आधी सीटों तक नहीं पहुंच पाई.

शाह vs सिद्धारमैया के बीच थी लड़ाई
कर्नाटक का चुनाव बीजेपी अध्‍यक्ष सिअमित शाह vs मुख्‍यमंत्रीद्धारमैया  के आसपास घूमता रहा. शाह ही राज्‍य में चुनाव प्रचार में भाजपाइयों में जान फूंक रहे थे. शाह की एक प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्‍पा (कर्नाटक में बीजेपी के सीएम फेस) पर भ्रष्‍टाचार से संबंधित टिप्‍पणी से बीजेपी की राज्‍य में दमदार प्रतिद्वंद्वि की छवि को धक्‍का लगा था. लेकिन शाह ने जल्‍द ही स्थिति संभाली. उन्‍होंने पूरे प्रचार के दौरान कांग्रेस सरकार पर आक्रामक प्रहार किए.

फेसबुक पोस्‍ट से धूमिल हुई थी सिद्धारमैया की छवि
सिद्धारमैया ने फेसबुक पर एक पोस्‍ट डाला था जिसमें कहा गया था कि कर्नाटक का अलग ध्‍वज होगा. ऐसा सिद्धारमैया ने केंद्र की बीजेपी सरकार को राज्‍य को धन आवंटन के मुद्दे पर नीचा दिखाने के लिए किया था लेकिन उनका यह दांव किसी काम न आया. राज्‍य और केंद्र के बीच धन आवंटन की लड़ाई बहुत पुरानी है. सिद्धारमैया को लग रहा था कि वह राज्‍य के साथ केंद्र के भेदभाव की बात कर चुनाव जीत लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वह सत्‍ता विरोधी लहर की आशंका धूमिल करने के लिए ऐसा कर रहे थे लेकिन बीजेपी ने इसी हथियार का इस्‍तेमाल कर चुनाव जीत लिया. बीजेपी ने सिद्धारमैया के इस कदम पर खास प्रतिक्रिया नहीं दी, यह उसके लिए मददगार साबित हुआ.

येदियुरप्‍पा को फ्रंट में न लाने की रणनीति भी असरदार रही
चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के बीच लड़ाई शाह vs सिद्धारमैया रही. एक कांग्रेस नेता ने जोक किया था-‘राहुल ने सिद्धारमैया को आउटसोर्स किया है जबकि येदियुरप्‍पा ने अमित शाह को.’ वैसे यूपी और गुजरात में शाह प्रचार में सबसे आगे थे लेकिन लड़ाई मोदी vs राहुल के बीच थी. कर्नाटक में ऐसा नहीं हुआ. यहां लड़ाई चाहे मैदान में हो या सोशल मीडिया पर फ्रंट में शाह और सिद्धारमैया ही रहे.

सिद्धारमैया सरकार ने चुनाव से ठीक पहले लिंगायत समुदाय को अल्‍पसंख्‍यक का दर्जा दिलाने की केंद्र से सिफारिश की थी. इसका मकसद लिंगायत वोट को कांग्रेस की ओर मोड़ना था लेकिन यह दांव खाली चला गया. येदियुरप्‍पा भी इसी समुदाय से आते हैं. बीजेपी वोटरों को यह अहसास कराने में कामयाब रही कि यह चुनावी दांव है. राज्‍य में लिंगायक की आबादी 14 फीसदी है. सिद्धारमैया का अहिंदा कार्ड भी फेल रहा. हालांकि 2013 के चुनाव में अहिंदा कार्ड कांग्रेस के काम आया था.

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