शिवलिंग की पूजा में रखें इन चीजों का ध्यान, मिलेगा मनवांछित फल

शिवलिंग की स्थापना के नियम

असल न्यूज़ (नीती सेन) वैसे तो शिवलिंग की पूजा सालभर जाती की है। लेकिन सावन माह में शिवलिंग पूजा का महत्व बढ़ जाता है। क्योंकि भागवान शिव के लिए सावन का महिना काफी प्रिय होता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि शिवलिंग की पूजा में किन चीजों को अर्पित करें ताकि भगवान जल्दी आपकी मनोकामना पूरी करें।

आचार्य सोमेश परसांई बताते हैं कि शिवलिंग को शिव जी का निराकार स्वरुप मना जाता है। शिवलिंग में शिव और शक्ति दोनों ही समाहित होते हैं। इसलिए शिवलिंग की उपासना से दोनों की ही उपासना पूर्ण हो जाती है। कई प्रकार के शिवलिंगों की पूजा करने का प्रावधान है जैसे- स्वयंभू शिवलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग,जनेउधारी शिवलिंग, सोने और चांदी के शिवलिंग और पारद शिवलिंग। स्वयंभू शिवलिंग की पूजा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है और फलदायी भी।

ये शिवलिंग की स्थापना के नियम
– शिवलिंग की पूजा उपासना शिव पूजा में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं
– शिवलिंग घर और मंदिर में अलग-अलग तरह से स्थापित होती है। इसका ध्यान रखें।
– शिवलिंग की वेदी का मुख उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए।
– घर में स्थापित होने वाला शिवलिंग ज्यादा बड़ा न हो।
– मंदिर में स्थापित शिवलिंग के लिए कोई मापदंड नहीं है।
– विशेष उद्देश्य और कामना प्राप्ति के लिए पार्थिव शिवलिंग की पूजा करें।

शिवलिंग पूजा में ये करें अर्पित
– शिव पूजा में जल और बेलपत्र का विशेष महत्व होता है।
– इसके अलावा कच्चा दूध, सुगंध, गन्ने का रस, चन्दन से भी शिव जी का अभिषेक करें।
– शिव जी को सेमल, जूही, कदम्ब और केतकी अर्पित ना करें।

इन बातों का रखें ध्यान
-शिवलिंग पर जलीय पदार्थ अर्पित करते समय उसकी धारा बनाकर अर्पित करना चाहिए
– ठोस पदार्थ अर्पित करते समय , दोनों हाथों से उसे शिवलिंग पर लगाएं
– शिवलिंग पर कुछ भी अर्पित करें, अंत में जल जरूर अर्पित करें
– शिवलिंग पर तामसिक चीज़ें अर्पित नहीं करनी चाहिए , साथ ही मारण प्रयोग भी नहीं करना चाहिए

बेलपत्र से की जाती है पूजा
श्रावण माह में भगवान शिव की पूजा जब बेलपत्र से की जाती है, तो भगवान अपने भक्त की कामना जल्द से पूरी करते है। बिल्व पत्थर की जड़ में भगवान शिव का वास माना गया है इस कारण यह पूजन व्यक्ति को सभी तीर्थों में स्नान करने का फल प्राप्त होता है।

सावन माह शिवभक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। जो 28 जुलाई से 26 अगस्त तक चलेगा। इसमें कांवडिय़ों द्वारा जल लाने की यात्रा के आरंभ की कुछ तिथियां होती हैं। इन्ही तिथियों पर कांवडिय़ों को यात्रा करना शुभ रहता है। श्रावण मास में आने वाले सोमवार के दिनों में भगवान शिवजी का व्रत एवं पूजन विशेष फलदायी होता है।

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