समानता की पैरवी

प्रतीक चित्र

विजय पपनै।। नारी समाज के प्रति आज हमारे समाज की भोगवृत्ति है  जो सामने आती दिखती है, आज सरकार ने पोस्को एक्ट के बाद एक कठोर कानून पास किया है जिसमे बलात्कारी को फांसी की सजा तक का कानून है पर क्या ऐसे कानूनों से रेप जैसी जघन्य घटनाएं थम जाएंगी यह कहना बेमानी जैसा होगा जब पोस्को एक्ट को कठोर माने जाने लगा था तब इसके तहत जुर्म में पकड़े गए बलात्कारियों को गिरफ़्तार किया गया पर हुआ क्या कुछ समय बाद अधिकांश को रिहा किया गया आज बलात्कार के 90 फीसद मामले घर की चहारदीवारी के होते हैं जिसमे लोग ज्यादातर पुलिस केश से तौबा करते हैं.

फिर समझौता हो जाता है। असल मे आज महिलाओ को मुख्यधारा में लाने की कवायत करने का जब तक एक वृहत स्तर पर अभियान नही चलाया जाएगा तब तक कानून पर भरोसा कर मुजरिम की  ओर टकटकी लगाकर देखना अपवाद होगा आज जिन समाजों में स्त्री पुरुष समानता का माहौल है वहां बलात्कार जैसे केस निःसन्देह कम होते दिखाई दे रहे हैं अतः समाज मे समानता व सोच की पैरवी को स्त्री पुरुष को एक हासिये पर रखने की कवायत करना मिल का पत्थर सिद्ध होगा।

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