हिसार में हरियाणा पिछडा वर्ग के पूर्व सदस्य जय सिंह बिश्नोई द्वारा प्रैस वाता आयोजन

असल न्यूज़। (प्रवीण कुमार ) हिसार में समरसता अभियान के अध्यक्ष व हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य जयसिंह द्वारा प्रैस कान्फ्रैस का आयोजन गया। पिछले कई सालों से देश में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिये जाने की मांग चल रही थी। मगर देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछड़ा वर्ग की आवाज सुनी है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 1993 में किया गया था लेकिन अब तक इस आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिये जाने के कारण आयोग के पास पिछड़ा वर्ग के संरक्षण के लिए शक्तियां नहीं थी। मगर अब राज्यसभा में 123वें संविधान संशोधन होने के बाद आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल गया है।

वरिष्ठ नेता बिश्रोई ने कहा कि लोकसभा में ओबीसी बिल को पास किया गया था लेकिन इसमें राज्यों के अधिकार छीन लिये गये थे। साथ ही महिला सदस्य बनाने का भी प्रावधान नहीं था। खास बात ये थी कि संसद के बाहर पिछड़ों के हितों की बात उठाने वाले सभी सांसदों ने लोकसभा में ओबीसी बिल में खामियों के खिलाफ कुछ नहीं बोला और सबने बिना विरोध के बिल पर साइन कर दिये थे। हरियाणा के सभी बीजेपी सांसदों ने भी इस बिल पर साइन किये बिश्रोई ने कहा कि ओबीसी के उपवर्गीयकरण के लिए रोहिणी आयोग को 30 नवम्बर तक रिपोर्ट सौंपनी है।

समरसता अभियान के तहत वह अपनी मांग दोहराते हैं कि ओबीसी आरक्षण को विमुक्त घुमंतू जातिए घुमंतू जातिए अर्ध घुमंतू जातिए पारम्परिक काम धंधा करने वाली कारू जातियांए दलित पिछड़ी जातियांए अल्पसंख्यक पिछड़ी जातियां व पिछड़ा वर्ग किसान जातियों के उपवर्ग में बांटा जाना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि समरसता अभियान ने ही विमुक्त घुमंतू जातियों के हितों की आवाज उठायी तो अब हर राजनीतिक पार्टी विमुक्त घुमंतू जातियों की बात करने लगी है। उन्होंने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सिंधिया का भी धन्यवाद कियाए जिन्होंने राजस्थान में विमुक्त घुमंतूध्गडरिया लौहार जाति के परिवारों को 50.50 वर्ग गज प्लॉट देने का फैसला लिया है। साथ ही हरियाणा सरकार से भी इस योजना को प्रदेश में लागू करने की मांग की।

समरसता अभियान पिछड़े वर्ग के हितों के लिए काफी समय से मांग उठा रहा है और संघर्ष कर रहा है। समरसता अभियान की तरफ से देशभर से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ओबीसी बिल में संशोधन के लिए ज्ञापन भेजे गये थे। समरसता अभियान की मुख्य मांग थी कि पिछड़ा वर्ग में किसी जाति को शामिल करने या निकालने के लिए राज्य सरकारों की शक्तियां बरकरार रखी जाये। लोकसभा में पास बिल में राज्यों से ये शक्तियां छीन ली गयी थी लेकिन राज्य सभा में अब फिर से राज्य सरकारों को ओबीसी में जातियों को शामिल करने या निकालने की शक्तियां दे दी गयी हैं। इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हैं।

बिश्रोई ने कहा कि ओबीसी बिल राज्यसभा में पास होने के बाद अब राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए गया है। इस बिल के लागू होने के बाद ओबीसी आयोग को भी सिविल कोर्ट की शक्तियां मिल जायेंगी। केन्द्र की नीतियों के निर्धारण में अब ओबीसी आयोग का एक सदस्य भी शामिल होगा।

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