डिलिवरी के कितने समय बाद बनाने चाहिए शारीरिक संबंध !

लोगों में प्रेग्नेंसी को लेकर बहुत सारे मिथक फैले हुए हैं.

असल न्यूज़ : किसी भी महिला के लिए प्रेग्नेंसी का समय उसके जीवन के सबसे अधिक सुनहरा, महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय होता है. लोगों में प्रेग्नेंसी को लेकर बहुत सारे मिथक फैले हुए हैं. प्रेग्नेंसी के बारे में फैले हुए अनेकों मिथकों में से एक मिथक इस दौरान सेक्स करने से भी संबंधित होता है.

जहां एक वर्ग प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स को सुरक्षित समझते हैं वहीं कुछ लोग प्रेग्नेंसी के समय को महिला की जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण समय समझते हैं और वे इस समय के दौरान अपने पार्टनर का ख्याल रखना चाहते हैं. प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक संबंध से संबंधित फैले हुए कुछ मिथकों की सच्चाई जानिये

ज्यादातर देखा जाता है कि डिलीवरी होने के बाद महिलाओं का शरीर पहले जैसे नही रहता। एेसे में महिलाओं को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जैसे कि स्तनों से दूध का निकलना और पेट पर काफी झोल आना अादि। इसलिए डॉक्‍टर बच्चे के जन्म के बाद जोड़ों को आपसी सम्बंध बनाने की सलाह देते हैं ताकि उनके बीच प्रेम बढ़े अौर दम्पतियों के बीच प्यार और देखभाल की भावना बनी रहे।

बच्चे के जन्म के बाद सेक्स करते समय महिला को काफी दर्द होता है। कई बार तो ब्लीडिंग होती है जो कि लगातार दो से तीन हफ्तों तक होती रहती है। इसलिए, प्रसव के 1 से डेढ़ महीने बाद ही शारीरिक सम्बंध बनाएं।

गर्भावस्था के दौरान महिला को कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। प्रसव के दौरान महिला के जनन अंग की स्थिति काफी नाजुक हो जाती है।

प्रसव सामान्य होने पर महिला के जनन अंग को काफी नुकसान पहुँचता है। स्थिति सामान्य होने में कम से कम एक महीने का समय लगता है। इसके अलावा यदि प्रसव के दौरान टांके लगाये गये है तो इससे भी अधिक समय लगता है। इस स्थिति में सम्बन्ध बनाना काफी नुकसानदेह हो सकता है।

इस स्थिति को सामान्य होने के लिये लगभग तीन महीने का समय लगता है। इस दौरान सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। प्रसव के बाद महिला की छाती में दूध बनाने वाली ग्रन्थियां सक्रिय हो जाती है। जिससे महिला को छाती में खिंचाव महसूस होने लगता है।

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