शिक्षिकाओं ने मालवीय जी एवं अटल जी की तरह गढ़ने का काम किया

शिक्षिकाओं ने मालवीय जी एवं अटल जी की तरह गढ़ने का काम किया

मीरजापुर : नगर के आवास-विकास कालोनी में महिला-शिक्षिकाओं ने प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के जरिए साहस एवं उत्साह भरने के महामना मदन मोहन मालवीय एवं अटल बिहारी बाजपेयी के फार्मूले को मूर्त रूप दिया।

सोमवार को BHU के संस्थापक मालवीय जी एवं Ex PM अटलजी की जयंती पर ‘सरगम’ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने उन प्रतिभाओं को उत्साह प्रदान किया जिनमें अकूत क्षमता तो है, सिर्फ प्रोत्साहन की ऊर्जा की जरूरत है। प्रारम्भ में दोनों विभूतियों के यश-गाथा की विभिन्न दृष्टिकोणों से चर्चा हुई, उंसके बाद कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं को अकस्मात मंच पर बोलने के लिए उसी तरह बुलाया गया जैसे किसी न तैरने वाले बच्चे को नदी में छोड़ दिया जाए तो वह हाथ-पैर मार कर तैरने का अभ्यास करता है । यह भूमिका कारगर हुई और बच्चों ने मालवीय जी एवं अटल जी को नए नजरिए से परिभाषित किया।

कार्यक्रम आर्यकन्या इंटर कालेज की अवकाश प्राप्त प्रवक्ता कुसुम शुक्ला के आवास पर हुआ, जिसमें इसी कालेज की संस्कृत प्रवक्ता माया पांडेय, मुख्य अतिथि एवं डॉ भवदेव पांडेय शोध संस्थान के संयोजक सलिल पांडेय मुख्य वक्ता थे। कार्यक्रम संयोजिका लोकगीत गायिका अजिता श्रीवास्तव के प्रयास में अद्वितीय उत्साह दिखा और लगा कि मां सरस्वती का अवतरण कार्यक्रम स्थल में हो गया है। मेडिकल की छात्रा नम्रता दुबे एवं छात्रा रानू सहित कई छोटी उम्र के बच्चों ने अपनी प्रतिभा से उपस्थित लोगों को चमत्कृत कर दिया। किरन श्रीवास्तव का वैविध्यपूर्ण संचालन तथा सामाजिक कार्यों में सक्रिय चित्रा पांडेय के वक्तव्य से शुरू गोष्ठी तकरीबन ढाई घण्टे चली। पार्वती गौतम की कजली, अजिता द्वारा अटल जी की कविता एवं किरन के स्वरचित गीत की मिठास गोष्ठी को माधुर्यपूर्ण बनाए थी। शिक्षिका डॉ कल्पना दुबे, शोभा वर्मा, सन्ध्या तिवारी, विमला शर्मा, क्षमा आदि भी वक्ता और गायन के माध्यम से सक्रिय थीं। विभिन्न महिला संगठनों का सहयोग ‘संघे शक्ति कलौयुगे’ को मूर्त कर रहा था।

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