ठेके की प्रथा समाप्त करते हुए सीधे सरकार की देखरेख में हो गए कार्य

करनाल।। अपना विचार मंच की बैठक निर्मल धाम मॉडल टाउन में दीपक मेहरा की अध्यक्षता में हुई। विशिष्ट अतिथि के रूप में रामलाल अग्रवाल उपस्थित रहे। मंच संस्थापक पीडी कपूर ने विचार रखते हुए कहा कि सुनने में आया है कि हमारे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा ठेके की प्रथा समाप्त करते हुए सीधे सरकार की देखरेख में कार्य करने के आदेश दिए जोकि एक सराहनीय कदम है।

पीडी कपूर ने कहा कि यदि सरकार समिति, मंच, संगठन या धार्मिक संस्थानों के आधार पर जिन बड़े-बड़े लोगों के माध्यम से पट्टे पर जमीनें कोडियों के भाव मुहैया करवाती है और उसी जमीन पर अस्पताल, सिलाई सेंटर व अन्य सामाजिक सेवाओं के कार्य आरंभ करने के लिए भवन बनाने के लिए सरकार से ही धन दिया जाता है। जब ऐसे भवन या संस्थान बनते हैं तो सबसे पहले चारों ओर दुकानों की व्यवस्था की जाती है और उपर नीचें दुकानें बनाकर जनता से दान एकत्रित करके मैनेजमेंट अपने स्वार्थ सिद्ध करती है और सरकार को इसी बहाने हर बार गुमराह करके आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। यदि ऐसे संस्थानों, धार्मिक स्थानों के भी सरकार अपनी देखरेख में कार्य करवाए तो सरकार के उमर बिना वजह घोटालों के आरोप ना लगें।

बैठक में उपस्थित कवियों ने भी अपनी अपनी कविताओं के माध्यम से कुछ इस तरह से ब्यां किया। रामेश्वर ने इश्वर के संदर्भ में कहा कि हर स्वास में हो सिमरण तेरा, यूं बीत जाए जीवन मेरा। किरण ने कहा दही बेचने देखो राधा चली, कन्हैया जी को कितनी प्यारी लगी। टीसी अग्रवाल ने कहा एक दिन रंगी रस्ते में लिए खटारा, तीव्र गति से आते वाहन में दे मारा। हर्ष जैन ने कहा महोब्बत की महकी हवाएं रहेंगी, इबाबत के जैसी सदाएं रहेंगी।

रमा ने कहा प्रेम गली अति संकरी जाके तूं ना समाए। रानी कांबोज ने शब्दों की परिभाषा बताते हुए कहा शब्दों के कहने से ही होती है समाज की सेवा, बस हर शब्द में सच्चाई होनी चाहिए। गौरव शर्मा ने फिल्मी गीत पर कहा जाने क्यूं लोग महोब्बत किया करते हैं, दिल के बदले दर्द दिया करते हैं। रोहित ने कहा देख परिंदे इंसां ने ये कैसा खेल रचाया, दूसरे का तोड़ घरौंदा अपना घर बसाया। जेआर कालडा ने कहा जिंदगी दर्द की तहरीर नहीं बन सकती, बहके हुए इंसानों की तकदीर नहीं बन सकती। आरएन चांदना ने कहा कि हर कोई सोचे कि बस वही अकलमंद है, उसके जैसा इस जहां में कोई ओर नहीं। शमां ने कहा अपनी महोब्बत को फना कौन करेगा, सभी बन जाएं खुदा तो गुनाह कौन करेगा। बैठक में कृष्ण हरदयाल कथूरिया, सरोज कथूरिया, साध्वी राज, सुनीता, प्रियंका, राजीव ने भी अपने अपने विचार रखे।

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