अलीपुर स्थित श्री शिव नारायण मंदिर में तीसरी बार चोरी, पुलिस ने दर्ज नहीं की FIR

इलाके में नशेड़ीओं का है दबदबा, सक्रिय हैं नशे के सौदागर.

दिल्ली।। अलीपुर में आपराधी पुलिस पर भारी पड़ रहे हैं। पुलिस चाहकर भी चोर उच्चकों पर लगाम नहीं कस पा रही। यही वजह है कि चोर श्री शिव नारायण मंदिर में तीसरी बार चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हो गये। वहीं पुलिस को शिकायत करने के बावजूद मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है।

जानकारी के मुताबिक 1 फरवरी की सुबह श्री शिव नारायण मंदिर के पुजारी जब सोकर उठे तो उन्हें अपने कमरे का दरवाजा बाहर से बंद मिला। किसी तरह आवाज देकर दरवाजे को खुलवाया गया तो पता चला कि मंदिर से दानपात्र जिसमें करीब 10 हज़ार रुपये दान था गायब है, इसके अलावा चांदी की श्री कृष्ण की बांसुरी भी चोर चुराकर ले गये,इससे पहले दो इनवर्टर की 2बैटरियां, और पानी की मोटर चुरा चुके हैं । घटना की सूचना तत्काल अलीपुर थाना पुलिस को दी गई।

2 हफ्ते बीतने का बाद भी FIR दर्ज नहीं
इस घटना को करीब हुए दो हफ्ते का समय हो चुका है, लेकिन अबतक पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। जबकि घटना की सूचना 100 नंबर पर और थाना पुलिस को तत्काल दी गई थी। हैरानी की बात है कि सालभर के अंदर इसी मंदिर में दानपात्र की चोरी तीसरी बार हुई है। पुलिस ने एक बार भी एफआईआर दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई।

शराबियों और नशेड़ियों पर चोरी का शक
अलीपुर इलाके में इनदिनों चोरी की वारदातों में तेजी से इजाफा हुई है, इसकी एक वजह इलाके में खुलेतौर पर बिकने वाला नशा है। सूत्र बताते हैं कि अलीपुर इलाके में शराब चरस गांजा आदि नशा धड़ल्ले से बेचा जा रहा है जिसपर लगाम लगाने वाला कोई नहीं। जब नशेड़ियों के पास नशा करने के लिए पैसा नहीं होता तो वो भगवान के घर ही वारदात कर डालते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर पुलिस इलाके में बिकने वाले नशे पर लगाम लगा सके तो वारदातों में कमी आ सकती है, लेकिन पुलिस तो जैसे कार्रवाई करने को ही तैयार नहीं। इसके पीछे एक वजह नशे का कारोबार करने वालों द्वारा पुलिस को दी जाने वाली घूस है। इसी घूस के चक्कर में पुलिसवाले चुप्पी साधे रहते हैं और इलाके में नशे का कारोबार दिनोंदिन फलफूल रहा है।


अलीपुर में बढ़ रहा चोरी के सामान का कोराबार

इलाके में बढ़ रही चोरी की वारदातों की एक वजह यहां अवैध तरीके से चोरी के सामान का होने वाला कारोबार भी है। दरअसल चोरों के लिए चुराया गया सामान बेचने बेहद आसान है। कई कबाड़ी चोरी का सामान धडल्ले से खरीद रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कबाड़ी को कारोबार करने के लिए लाइसेंस लेना होता है, लेकिन इलाके में दर्जनभर से ज्यादा कबाड़ी बिना किसी लाइसेंस के काम कर रहे हैं। जब कोई नशेड़ी चोरी का सामान लेकर पहुंचता है, तो बिना किसी पूछताछ के लिए कबाड़ी उनसे सामान खरीद लेते हैं। इलाके में कबाड़ का काम करने वाले एक शख्स ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस को उनके इस कारोबार की जानकारी तो है, लेकिन थोड़ा खर्चा-पानी मिलने पर पुलिस आंख मूंद लेती है। थाना पुलिस भी अपना रिकॉर्ड दुरुस्त रखने के लिए एफआईआर दर्ज नहीं करती। यही वजह है कि इलाके में अपराधिक किस्म के लोगों के हौसले बढते जा रहे हैं और चोरी की वारदातों में तेजी से इजाफा हो रहा है।

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