Electoral Bonds पर सुप्रिम कोर्ट के अंतिम फैसले का करेंगे इंतजार- भाजपा

असल न्यूज़ : हाल ही में इलेक्टोरल बॉन्ड पर दिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भाजपा का बयान सामने आया है। शुक्रवार को पार्टी की तरफ से कहा गया कि वह चुनावी बॉन्ड पर उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार करेगी। केंद्र ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा है। अब पार्टी को कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है।

भाजपा प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील नलिन कोहली ने कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसका अनुपालन किया जाएगा’। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों का सवाल है, उनपर विचार के लिए अदालत के सामने पक्ष रखा गया है और हम अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे।

बता दें कि शुक्रवार को इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया। कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि चुनाव आयोग को 30 मई तक चंदे की जानकारी दी जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के जरिए राजनीतिक फंडिंग को पर रोक नहीं लगाई। कोर्ट ने जानकारी साझा करने के लिए 30 मई की समय-सीमा निर्धारित की और कहा कि पार्टियां प्रत्येक दानदाता का ब्योरा सौंपे।

वहीं सुप्रीम कोर्ट इस मामले की विस्तृत सुनवाई की तारीख तय करेगा। बता दें कि केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा था कि वह चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर आदेश पारित न करे। केंद्र ने कोर्ट से अनुरोध करते हुए याचिका दायर कर कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। साथ ही कहा कि चुनावी प्रक्रिया जब पूरी कर ली जाए, तब इस पर फैसला सुनाया जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस याचिका को खारिज कर दिया।

क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड

साल 2017-18 के बजट में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा राजनीतिक पार्टियों को दिए जाने वाले चन्दे में पारदर्शी बनाने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड की घोषणा की थी। तब तय किए गए नियम के मुताबिक, 2000 से ज्यादा के नकद चंदे पर रोक लगा दी गई थी। नए नियम के मुताबिक, 2000 से अधिक चन्दा केवल चेक या ऑनलाइन ही दिया जा सकता है। इस साल जनवरी में ही सरकार ने इन बॉन्ड की अधिसूचना जारी की।

अधिसूचना के अनुसार, 1000 रुपये, 10,000 रुपये, 10 लाख रुपये और एक करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए जाते हैं। इन बॉन्ड को एसबीआई में अपने केवाईसी जानकारी वाले अकाउंट से दानदाता खरीद सकता है। राजनीतिक पार्टियां 15 दिनों के अंदर बैंक से इन बॉन्ड का पैसा ले सकती हैं। बता दें कि बॉन्ड पर पैसा देना वालों का नाम नहीं होता है। साथ ही ये जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाती है।


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