कौन हैं वे महिला जिनके दम पर भारत अंतरिक्ष में इंसान भेजने का सपना देख रहा है

अहमदाबाद।। (बलराम गंगवानी) इस स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि 2022 तक पहली बार भारत अंतरिक्ष में मानव को भेजेगा. उधर इसरो का गगनयान मिशन भी तैयार है. हालांकि इसे लांच किए जाने में थोड़ी देर और है. पहले ये मिशन अप्रैल में ही जाने वाला था. लेकिन कुछ गड़बड़ी निकल गई. जिसके बाद फिर इसे अक्टूबर में लांच किए जाने की तैयारी थी।

लेकिन अभी यह तैयारी पूरी नहीं हो सकी है. ऐसे में मिशन के जनवरी- 2019 से पहले पूरा होने की संभावना नहीं है. दरअसल इसरो को दो बड़े झटके इस साल लग चुके हैं और वह अभी बहुत सावधानी से कदम आगे बढ़ा रहा है।

इसी बीच भारत के इंसान को स्पेस में भेजने के इस महत्वाकांक्षी ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम को साइंटिस्ट वी. आर. ललिताम्बिका लीड करने वाली हैं।

साइंटिस्ट वी. आर. ललिताम्बिका स्पेस साइंटिस्ट हैं. ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम की कमान अब इन्हीं के हाथों में है. इस मिशन पर 10 हज़ार करोड़ का खर्च आने का अनुमान है. वैसे भारत की ओर से स्पेस में गए पहले इंसान राकेश शर्मा थे. जो सोवियत रूस के सोयूज टी-11 से 1984 में स्पेस में गये थे।

वी. आर. ललिताम्बिका हैं कौन

1. लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी में योगदान के लिए ललिताम्बिका को ऐस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया का ऐक्सिलेंस अवॉर्ड मिल चुका है. अब वे अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के मानव मिशन का नेतृत्व करेंगी. यदि यह अभियान सफल रहता है तो रूस, चीन और अमेरिका के बाद यह कामयाबी हासिल करने वाला भारत चौथा देश होगा।

2. ललिताम्बिका विक्रम साराभाई सेंटर, तिरुवनंतपुरम की डिप्टी डायरेक्टर रह चुकी हैं. इसरो के मौजूदा चेयरमैन के. सिवान उस दौरान इस स्पेस सेंटर के निदेशक थे. इसके बाद वे इसकी डायरेक्टर भी बनी थीं।

3. ललिताम्बिका देश के पहले ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए निजी क्षेत्र का भी सहयोग लेंगीं. इसके अलावा वह अंतरिक्ष कार्यक्रमों के एक्सपर्ट, भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और विदेशी संस्थानों से मिलकर काम करेंगीं।

4. ऐसे मिशन में सबसे महत्वपूर्ण वह कैप्सूल होता है जिसके अंदर अंतरिक्षयात्री होते हैं. जुलाई में इसकी पैड टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया गया था. यह राकेट के नाकाम रहने पर कैप्सूल को रॉकेट से अलग कर देता है. इसरो इसके प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक प्रदर्शन कर चुका है. ललिताम्बिका पर इस तरह कि कई टेक्नोलॉजी तैयार करने और उसके परीक्षण की जिम्मेदारी होगी।

5. विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में उन्हें रॉकेट के कंट्रोल और गाइडेंस आदि की जिम्मेदारी मिली थी. यानि वे तकनीकें जिनसे रॉकेट उड़ता है. 2004 में उन्होंने ह्यूमन स्पेसफ्लाइट का प्लान बनाया था. इसके बाद से स्पेस एजेंसी ऐसे मिशन के लिए बनाए जाने वाले कैप्सूल तैयार करने के लिए काम कर रही है।

भारत की रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री दोनों ही महिला हैं और ऐसे में इस महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन की जिम्मेदारी भी एक महिला के निभाने को लोग देश में लोग महिला सशक्तिकरण की ओर एक और सार्थक कदम के रूप में देख रहे हैं।

 

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