सीलिंग पर बड़ी खबर: मास्टर प्लान 2020 संशोधन पर SC की रोक, व्यापारियों की मुश्किलें कम नहीं होगी !

सीलिंग के विरोध में दिल्ली के व्यापारी आंदोलन की राह पर हैं।

असल न्यूज़ : सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए और दिल्ली नगर निगम को फटकार लगाते हुए कहा कि आपकी दादागिरी रोकनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मास्टर प्लान में संशोधन पर उसके सवालों का जवाब न देने पर फटकार लगाई। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के शाहदरा इलाके में सीलिंग के काम को बाधित करने पर बीजेपी विधायक ओपी शर्मा और पार्षद गुंजन गुप्ता के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला खत्म कर दिया है। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वीडियो में लग रहा है कि वे लोग मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों के साथ सामान्य तौर पर बातचीत कर रहे हैं।

संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को बेइज्जत करने से बचे
सुप्रीम कोर्ट ने सीलिंग के मामले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक पार्टी के नेताओं द्वारा आलोचना किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हमें संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को बेइज्जत करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने पर संस्थाओं को नुकसान होगा। आज आप मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं कल प्रधानमंत्री के खिलाफ कर सकते हैं। आप प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ इस बिना पर अपमानजनक टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि वो आपकी पार्टी के नहीं हैं। लोगों को उनके प्रति सम्मान दिखाना होगा।

2 अप्रैल से करेगा अंतिम सुनवाई
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 15 फरवरी को आदेश दिया था कि वो दिल्ली में सीलिंग को लेकर 2 अप्रैल से अंतिम सुनवाई करेगी। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि 2 अप्रैल से इस मामले पर रोजाना सुनवाई होगी ताकि मामले पर जल्द फैसला किया जा सके।

क्या पर्यावरण के प्रभावों का आकलन किया
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से पूछा था कि मास्टर प्लान 2021 में बदलाव करने से पहले आपने भवनों की सुरक्षा के बारे में विचार किया। कोर्ट ने कहा था कि क्या आपने पर्यावरण के प्रभावों के बारे में आकलन करवाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के बाद के प्रदूषण के स्तर पर भी आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया था। क्या पार्किंग, जाम और दूसरी नागरिक सुविधाओं के बारे में विचार किया गया है।

क्यों करना चाहते है बदलाव
पिछले 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से पूछा था कि आप मास्टर प्लान में बदलाव क्यों करना चाहते हैं। इसके लिए क्या सभी संबंधित पक्षों से पूछा गया है। इस पर डीडीए ने कहा था कि वो मास्टर प्लान में बदलाव कर सीलिंग रोकना चाहते हैं। आपको बता दें कि पिछले 15 जनवरी को सीलिंग के मामले पर मॉनिटरिंग कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि केंद्र का कानून अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाला है। पहले दिसंबर 2017 तक अवैध निर्माण पर यथास्थिति रखने का कानून बनाया था। अब उसे 2020 तक बढ़ा दिया गया है। जिसके बाद कोर्ट ने इस मसले पर केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा था।

क्या था मामला
सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमिटी से कहा कि जहां तक मुमकिन है, अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते रहें। कोर्ट ने कहा कि डीडीए और एमसीडी की भी जिम्मेदारी है कि वो कार्रवाई करें। 15 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अवैध निर्माणों पर सख्ती दिखाते हुए के जे राव की अध्यक्षता वाली मॉनीटरिंग कमेटी को अधिकार दे दिया था। उससे पहले 6 दिसंबर 2017 को कोर्ट ने राजधानी में अवैध निर्माण पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए 2006 की मॉनिटरिंग कमिटी को दोबारा सक्रिय करने का आदेश दिया था। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली में अनाधिकृत निर्माणों की सीलिंग का काम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसके विरोध में दिल्ली के व्यापारी आंदोलन की राह पर हैं।

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