Home Mumbai कांग्रेस MLA का हुआ कोरोना से निधन, सादगी के लिये थे मशहूर..

कांग्रेस MLA का हुआ कोरोना से निधन, सादगी के लिये थे मशहूर..

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असल न्यूज़: महाराष्ट्र (Maharashtra Cronavirus Update) में कोरोना अमीर, गरीब, नेता, अभिनेता, जनता किसी को नहीं बख्श रहा है. कोरोना ने एक और जननेता की जान ले ली है. कांग्रेस विधायक रावसाहेब अंतापुरकर (Congress MLA Raosaheb Antapurkar dies of Covid-19) का कोरोना की वजह से शनिवार की सुबह निधन हो गया. वे अंतापुरकर नांदेड़ जिले के देगलूर विधानसभा सीट से विधायक थे. वे कोरोना के इलाज के लिए कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. शुक्रवार को उनकी तबियत बिगड़ने लगी. उन्हें मुंबई लाया गया. मुंबई में ही शनिवार की सुबह इनकी मौत हो गई.

कोरोना से जान गंवाने वाले रावसाहेब अंतपुरकर महाराष्ट्र के दूसरे विधायक हैं. उनसे पहले पंढरपुर के एनसीपी विधायक भारत भाल्के की मौत भी कोरोना की वजह से हो गई थी. पंढरपुर में 17 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं. रावसाहेब जयवंतराव अंतापुरकर की पहचान एक सादगी पसंद जननेता की थी जिन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों तक किराए के मकान में गुजारा किया.

25 दिनों पहले हुआ था कोरोना, आज गई जान

पिछले साल कोरोना काल में भी अंतापुरकर ने जनता के कामों को बंद नहीं किया था. वे लगातार अपने क्षेत्र में गांव-गांव, गली-गली, खेत-खेत में घुमते रहे लोगों की समस्याओं को सुनते, जानते, समझते, सुलझाते रहे. करीब 25 दिनों पहले रावसाहेब अंतापुरकर को कोरोना का संक्रमण हुआ. शुरू के दिनों तक उनका इलाज नांदेड़ के भगवती अस्पताल में हुआ. लेकिन उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार ना होता देखकर उन्हें मुंबई लाया गया. पिछले 12 दिनों से बॉम्बे अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. रावसाहेब अंतापुरकर डायबिटिज और ब्लडप्रेशर के भी मरीज थे, इसलिए उनके स्वास्थ्य में लगातार उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहा था. कुछ समय पहले उन्हें हार्ट अटैक भी आया था.

कौन थे रावसाहेब अंतापुरकर?

जनता के काम के लिए हर हद तक जाने वाले नेता के रूप में रावसाहेब जयंतराव अंतापुरकर की पहचान थी. सादगी से रहना, दिखावा नहीं करना उनका स्वभाव था. वे घुलने-मिलने में माहिर थे और काफी लोकप्रिय नेता थे. नांदेड़ जिले के देगलुर प्रखंड अंतापुर के मानव विकास विद्यालय से उन्होंने दसवीं की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होने औरंगाबाद से स्नातक तक की पढ़ाई की. राजनीति में आने से पहले वे मुंबई महाराष्ट्र विद्युत मंडल दक्षता विभाग में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे. 2009 में उन्होंने नौकरी को गुड बाय कर दिया और देगलुर-बिलोली क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 2019 के चुनाव में भी उन्होंने सुभाष साबणे को पराजित किया और विधायक बने.

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