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एक युवा का प्रयास जीवन बचाने में संजीवनी की तरह …

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असल न्यूज़: देश एक अनजानी चुनौती से गुजर रहा है, चारों तरफ सिर्फ अफरातफरी और मौत का मंजर है। सरकारें अपनी पूर्ण क्षमता से लगी हुई हैं, किंतु 130 करोड़ की आबादी वाले देश मे यह इतना आसान नहीं है।

दवाएं, इंजेक्शन, ऑक्सिजन और बेड के लिए लोग अपना सब कुछ बेच कर अपनों की जान बचाने में लगे है। कहीं न कहीं मुनाफाखोरी, कालाबाजारी और अवसरवादिता का माहौल चरम पर है, उम्मीद की कोई किरण नहीं दिखाई दे रही है।

लेकिन जहाँ समस्या है वहाँ समाधान भी मिलता है, बशर्ते सही नियत से कार्य करने वाला कोई हो।

कोरोना के इस महामारी के दौर में 22 वर्ष का एक युवक जो ऑस्ट्रेलिया से कोरोना के कारण पढ़ाई अधूरी छोड़ कर कुछ दिन पूर्व ही भारत आया और अपने पिता के वयवसाय में लगकर व्यवसाय की बारीकियां सिखने लगा, लेकिन उस युवा के मन में देश की वर्तमान स्थिति और देशवासियों की पीड़ा को देखकर मन मे बेचैनी रहती है, वह कुछ न कुछ करना चहता था ताकि भारत के लोग दवा एवं इंजेक्शन जैसी बुनियादी चीज़ों के लिए अपनी जान न गंवाए।

करण सिंह कुछ दिन पहले ऑस्ट्रेलिया में अपनी पढ़ाई में लगे हुए थे, आज एक इतिहास बनाने के लिए एक मिशन में लग चुके हैं। प्रारंभिक दौर में उनकी कोशिश थी कि देश के लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि दवा, इंजेक्शन, ऑक्सीजन उनके आस पास ही प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, किन्तु जानकारी के अभाव में वे दर दर भटक रहे हैं और अपनों की जान से हाथ धो बैठ रहे हैं।

करण ने अपने 3 युवा साथियों, जो उनके साथ ही ऑस्ट्रेलिया से आये थे – मनीष, विजय व हर्ष – को लेकर देश के लगभग 6 लाख फार्मेसी की दुकानों व 1.25 लाख दवा डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपने मिशन से जोड़ दिया जिससे कुछ दिनों के अंतराल में ही MargMart.com के नाम से एक वेबसाइट देशवासियों के समाधान के लिए प्रस्तुत हो गई जिसमें दवा के साथ-साथ हर आवश्यक वस्तु का नाम डालते ही 7 करोड़ के डाटाबेस से उसकी उपलब्धता का स्थान बता सकती है। यह उसी प्रकार से रामायण में हनुमान जी संजीवनी की तलाश में भटकते है और पूरा पहाड़ उठाकर लक्ष्मण के जीवन की रक्षा करते है, कहीं न कहीं यह वेबसाइट उस संजीवनी की तलाश को पूर्ण करने में मदद करेगी।

करण से वार्ता के दौरान जब यह जानकारी मांगी गई कि इतने महान कार्य की सोच कहा से आई तो उनका कहना था कि हम मार्ग परिवार के एक सदस्य के तौर पर काम तो कर रहे थे लेकिन मन मे हमेशा इस बात का दुख था कि देशवासियो के लिए मुसीबत की इस घड़ी में हम कुछ नही कर पा रहे हैं। किंतु जहाँ चाह वहां राह है, इस अभियान के बाद जब पिता जी से चर्चा की तो उन्होंने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया और एक टेक्निकल टीम को हमारे साथ लगा दिया, जिसने हमारे साथ लग कर काम शुरू कर दिया और आज हम एक इतिहास बनाने की ओर बढ़ रहे है।

करण बताते है कि यदि इस अभियान से हम कुछ देशवासियो की जान बचाने में सक्षम हो गए तो हम अपने प्रयास को सफल मानेंगे, आगे इस वेबसाइट को और आधुनिक सरल और करोड़ो इन्वेंट्री से जोड़ने का लक्ष्य जिस पर हम लोग तेजी से काम कर रहे हैं।

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