Home Covid-19 कोरोना काल में ऑक्सीजन व दवा के नाम पर लोगों से 60...

कोरोना काल में ऑक्सीजन व दवा के नाम पर लोगों से 60 लाख की ठगी, गैंग का भंडाफोड़, डाकिए को भी दबोचा

259
0

असल न्यूज़: दिल्ली में कोरोना (Corona) संक्रमण के कोहराम मचाने के दौरान जब लोग अपनों को बचाने के लिए किसी पर भी आसानी से विश्वास कर रहे थे. ऐसे में ऑक्सीजन एवं दवा मुहैया कराने के नाम पर ठगी करने वालों का गैंग भी सक्रिय थे. ऐसे ही गैंग का भंडाफोड़ दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच (Crime Branch) ने किया है जो कि अब तक 60 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी कर चुका था है.

पुलिस के मुताबिक यह गैंग एक डाकिए (Postman) की मदद से चल रहा था, जो जालसाज को एटीएम कार्ड की डिलीवरी करता था. पुलिस ने इस डाकिए को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, दो अन्य आरोपियों को रानी बाग पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है. यह गैंग हाल के महीनों में ही 60 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुका था.

दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शिबेश सिंह के अनुसार, बीते चार मई को रानी बाग निवासी नंदिनी ने ठगी की शिकायत दर्ज करवाई थी. उसे अपने पड़ोसी के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता थी, जो कोविड से संक्रमित था.

सोशल मीडिया से उसे एक नंबर मिला, जो ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराने का दावा कर रहा था. 48 हजार रुपये में उसकी बात तय हो गई. उसने दो बार में उसके बैंक खाते में 48 हजार रुपये जमा करवा दिए. इसके बाद उसके नंबर को आरोपी ने ब्लॉक कर दिया. उसकी शिकायत पर रानी बाग थाने में एफआईआर दर्ज की गई.

कई लोगों को बना चुका था ठगी का शिकार

शिबेश सिंह के अनुसार, इस तरह से ठगी की कई घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था. उस समय लोगों में दवा, ऑक्सीजन आदि की कमी चल रही थी. ऐसे में जालसाज लगातार मरीजों के परिवार से ठगी कर रहे थे. ऐसी शिकायत मौर्या एन्क्लेव और पश्चिम विहार में भी दर्ज की गई है.

इसे ध्यान में रखते हुए डीसीपी मोनिका भारद्वाज (DCP Monika Bhardwaj) की देखरेख में एसीपी राजेश कुमार और इंस्पेक्टर लोकेंद्र चौहान की टीम ने छानबीन शुरू की. पुलिस टीम राजस्थान (Rajasthan) के अलवर और भरतपुर पहुंची. पुलिस को पता चला कि भरतपुर के गनोरी गांव से यह जालसाज सक्रिय हैं. बैंक खाते पर लिखा पता काला कुआं हाउसिंग बोर्ड अलवर के नाम पर था, लेकिन यह एड्रेस पुलिस को नहीं मिला.

जालसाज डाकिए की मदद से चल रहा था गैंग

पुलिस को पता चला कि इस क्षेत्र में शिव लाल शर्मा नामक डाकिया काम करता है. पुलिस मुखबिर को सक्रिय करने के साथ ही डाकिए पर नजर रखने लगी. इससे पता चला कि डाकिया इस गैंग का हिस्सा है. 25 मई को पुलिस ने शिव लाल से पूछताछ की. उसने बताया कि वह बैंक के एटीएम कार्ड (ATM Card) को रफीक को देता है. रफीक उसके पास मुश्ताक को एटीएम कार्ड लेने के लिए भेजता था.

इसके लिए प्रत्येक एटीएम कार्ड के वह 200 रुपये लेता था. उसने यह भी बताया कि उसके पास 30 एटीएम कार्ड हैं, जो उसे मुश्ताक को देने हैं. डाक में, वह इन कार्ड को डिलीवर दिखा चुका था. उसकी निशानदेही पर पुलिस टीम ने यह एटीएम कार्ड उसके घर से जब्त कर लिए. इस मामले में रानी बाग पुलिस ने भी कॉल करने वाले आरोपी मनोज और एटीएम से रुपये निकालने वाले डाल चंद को गिरफ्तार कर लिया.

मजदूर के नाम पर खोलते थे बैंक खाता

पूछताछ में पता चला कि जालसाज ऑनलाइन बैंक अकाउंट खोलते थे, जिसमें आधार नंबर, पैन कार्ड नंबर और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती थी. वह मजदूरों से, उनका आधार कार्ड लेकर इस पर ऑनलाइन बैंक खाता खुलवा लेते थे. इससे संबंधित एटीएम कार्ड जब आता था, तो डाकिया उसे अपने पास रखकर, इन जालसाजों तक पहुंचा देता था.

बैंक खाते का कुछ समय तक इस्तेमाल करने के बाद यह लोग 40 से 50 हजार रुपये में, उसे दूसरे गैंग को बेच देते थे. आरोपी कोरोना की इस लहर के दौरान लगभग 60 लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here