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केंद्र ने अब राज्यों को नहीं देगी रेमडेसिविर इंजेक्शन, कंपनी से सीधे करनी होगी डील

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असल न्यूज़: देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार अब थोड़ी कम होने लगी है। लेकिन अब भी मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत हो रही है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हर तरफ रेमडेसिविर इंजेक्शन की मारामारी रही इसी बीच कई राज्यों में इंजेक्शन की जमकर कालाबाजारी भी हुई। अब इसे लेकर सरकार ने ऐलान किया है कि अब राज्य सरकार खुद अपनी जरूरत के हिसाब से रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीद सकते हैं। दरअसल इंजेक्शन की कम प्रोडक्शन होने के चलते केंद्र सरकार की तरफ उपलब्ध कराई जा रही थी।

देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के प्लांट पहले 20 थे जो अब इसे बढ़ाकर 60 कर दिए गए हैं। वहीं सरकार ने जानकारी दी है कि अब रेमडेसिविर इंजेक्शन डिमांड से ज्यादा सप्लाई है।

11 लोगों से 2,25,000 रुपये ठगे
बता दें कि हाल ही में रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराने की आड़ में लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में मध्य प्रदेश की 18 वर्षीय कॉलेज छात्रा को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि आरोपी छात्रा मध्य प्रदेश के सिवनी की रहने वाली है और वह दिल्ली में एक दूरस्थ शिक्षा विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातक कोर्स कर रही है। उसने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 11 लोगों से 2,25,000 रुपये ठगे। छात्रा को सिवनी में उसके घर से सोमवार को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने बताया कि एक मई को दक्षिण दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी पुलिस थाने में अंकित कुमार की शिकायत पर एक मामला दर्ज किया गया। कुमार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के संबंध में ऑनलाइन जानकारी मिलने के बाद किसी व्यक्ति से संपर्क किया था। शिकायत में कहा गया है कि कुमार को 32,400 रुपए में पांच इंजेक्शन भेजने का वादा किया गया और उसने उनके बैंक खाते में यह धनराशि भेज दी लेकिन उसे इंजेक्शन नहीं मिले।

इंदौर से पूरे देश में बेचे गए नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन
दरअसल पूरे देश में जब कोरोना संक्रमण मौत का तांडव मचा रहा था जब कुछ ऐसे लोगों ने इसे अवसर बनाया था। इसी क्रम में इंदौर की विजयनगर पुलिस ने ग्लूकोज और नमक मिलाकर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाकर पूरे देश में खपाने के मामले में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी फिलहाल पुलिस की रिमांड में हैं और उन्होंने नकली इंजेक्शन बनाने और बेचने की पूरा साजिश का खुलासा किया।

गुजरात के मोरबी गांव से नकली इंजेक्शन की कहानी शुरू हुई थी जहां एक फैक्ट्री में ग्लूकोज और नमक मिलाकर करीब 5000 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाए गए। नकली इंजेक्शन बनाकर बेचने की साजिश का मास्टरमाइंड पुनीत शाह और कौशल बोहरा हैं।

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