Home Delhi फार्मेसी परिषद चुनाव में धांदली के आरोप, LG को लिखा पत्र

फार्मेसी परिषद चुनाव में धांदली के आरोप, LG को लिखा पत्र

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नई दिल्ली। फार्मेसी परिषद चुनाव 2021 की चुनाव प्रक्रिया बहुत ही संदेश पद रही है। यह प्रक्रिया दिल्ली फार्मेसी काउंसलिंग के द्वारा संशोधित नियम 1964 के नियम 6 (20-21) के साथ घटित फार्मेसी अधिनियम 1948 के नियम 24 के तहत कराए जाने वाले चुनाव की प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देता है इस बार कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह के मापदंड की प्रक्रिया को अपनाया नहीं गया। दिल्ली फार्मेसी परिषद के तहत जितने भी मतदाता रजिस्टर है। उन सभी इन चुनाव प्रक्रिया की जानकारी ना तो उपलब्ध कराई गई और ना ही उन सभी के पास बैलेंस पेपर भेजे गए क्योंकि इस चुनाव प्रक्रिया को देखने वाले रिटर्निंग ऑफिसर राम कुमार एवं मतदाता सूची रजिस्टर के द्वारा आपसी मिलीभगत के द्वारा एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया।

इन्होंने बैलेट पेपर नाम भेज कर नाम भेज कर तो एक पक्ष का हाथ दिया उसके अलावा मतगणना के दौरान भी उन्होंने दूसरे पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी इसके अलावा मतगणना के दिन 30 टेबल ऊपर गिनती की शुरुआत की गई जिनमें गिनती करने वाले अधिकारी सरकार के नियम के हिसाब से सही नहीं थी और एक टेबल पर उन्होंने तीन अधिकारियों को बैठाया परंतु उम्मीदवारों के नुमाइंदों को इतनी दूरी पर बिठाया गया कि उन्होंने ना तो यह पता चल पा रहा था कि कौन सा बैलेट पेपर किस उम्मीदवार का है और यह भेज दी है या नहीं उन्होंने यह इसलिए कि आप क्योंकि उन्हें एक पक्ष का फायदा करना था जब 1/11/2021 को इससे चुनाव की प्रक्रिया समाप्त हुई तो सभी उम्मीदवारों के सामने जो संख्या आई बताई गई वह 7745 थी परंतु एक ही रात के उपरांत संख्या बढ़ाकर 2/11/2011 को वह संख्या 8840 हो गई भगवान जाने एक ही रात में कौन कौन से चित्र के द्वारा यह संख्या बढ़ा दी गई क्योंकि कोई इंसान तो थी भक्तों के अंदर के बैलेट पेपर की संख्या को बढ़ा नहीं सकता चलिए हम बताते हैं कि इनके द्वारा निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया अपनाई गई तो 2/11/2021 को घोषित होने वाले परिणाम 10/11/2021 को चुपचाप एक नोटिस बोर्ड पर चिपका दिए गए क्योंकि इसके द्वारा बेईमानी का खेल खेला जा रहा था।

इन अधिकारियों से दूसरे पक्ष में सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग दिखाने के लिए कहा गया परंतु चुनाव प्रक्रिया में हेराफेरी की गई थी तो वह दिखाई नहीं गई या चुनाव सुनील सुनियोजित संयोजित तरीके से एक पक्ष को जीतने के लिए ही लड़ा गया था अब हम आते हैं जीते हुए प्रक्रिया हो प्रत्याशियों पर रिटर्निंग आफिसर ने सरकार में काम कर रहे उम्मीदवारों के संबंध में डीओपीटी को ध्यान में रखा ही नहीं उन्होंने इस चुनाव के उम्मीदवार अजय शर्मा एवं पंकज अत्रे की उम्मीदवारी की जांच की प्रक्रिया को किया ही नहीं डीपीसी चुनाव लड़ने की प्रक्रिया में कोई भी सरकारी कर्मचारी केरियर में किसी भी निकाल निकाय चुनाव में दो कार्यकाल या 5 साल की अवधि पहले जो भी हो के लिए वैकल्पिक पद धारण कर सकता है इसलिए इन दोनों उम्मीदवारों अजय शर्मा एवं पंकज यात्री जी डीपीसी चुनाव लड़ने के योग्य ही नहीं थे क्योंकि दोनों ने दिल्ली पर मूर्ति काउंसलिंग में 5 साल से अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है।

हालांकि इसके बावजूद उन्हें चुनाव में उम्मीदवार बनाया भी गया और मिलीभगत करके जीता भी गया जिताया भी गया यह चुनाव प्रक्रिया एक सोची समझी साजिश के तहत कराई गई एवं इसमें मोटे पैसे का इस्तेमाल किया गया पैसों के लेन-देन की वजह से ही यह चुनाव परिणाम एक तरफा प्राप्त हुए अब सरकार से गुजारिश करते हैं कि इन चुनावों की प्रक्रिया की जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाए जो अपनी जान से दूध का दूध पानी का पानी निकाल सके और दोषी पाए जाने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए ताकि कोई अधिकारी भविष्य में किसी और चुनाव प्रक्रिया को तोड़ मरोड़ कर एकतरफा परिणाम ना निकालकर निष्पक्ष चुनाव परिणाम प्राप्त हो वही फार्मेसी चुनाव में हुई धांधली को लेकर विकास तुषीर ने दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर व चीफ सेक्रेट्री दिल्ली सरकार, हेल्थ डिपार्टमेंट प्रिंसिपल सेक्रेट्री लिखित शिकायत दी है पूरे चुनाव मामले में हुई धांधली को लेकर सभी को सूचना दी गई लेकिन अभी तक इसके ऊपर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है अब देखने वाली बात यह है फार्मेसी चुनाव में हुई धांधली को लेकर विभाग क्या कार्रवाई करता है.

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