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क्या डेल्टा का काल बनेगा ओमीक्रोन! नई एंटीबॉडी पुराने घातक वेरिएंट पर ‘बेहद’ असरदार

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कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप का संक्रमण डेल्टा स्वरूप के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकता है। दक्षिण अफ्रीका में अनुसंधानकर्ताओं के एक लघु अध्ययन में यह बात सामने आई। कोरोना वायरस का ओमीक्रोन स्वरूप (वेरियेंट) सबसे पहले इस साल नवंबर में दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना में सामने आया था। वायरस का यह नया स्वरूप अत्यंत संक्रामक पाया गया है। साथ ही इसमें टीकाकरण से अथवा पहले हो चुके सार्स-सीओवी-2 संक्रमण से उत्पन्न एंटीबॉडी से बच निकलने की काफी क्षमता देखी गई है।

इस स्वरूप से संक्रमण के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। मेडआरएक्सआईवी पर प्रकाशन से पूर्व डाले गए अध्ययन की अभी अन्य विशेषज्ञों ने समीक्षा नहीं की है। इसमें पहले टीका लगवा चुके और टीका नहीं लगवाने वाले 15 लोगों को शामिल किया गया जिन्हें ओमीक्रोन संक्रमण हो चुका है। वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों के प्लाज्मा का अध्ययन कर उनके एंटीबॉडी में ओमीक्रोन और डेल्टा स्वरूप पर नियंत्रण की क्षमता का पता लगाया।

डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ पाई गई अधिक सुरक्षा
पहले प्रतिभागियों में लक्षण सामने आने के बाद और करीब दो सप्ताह बाद एक बार फिर अध्ययन किया गया। अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि प्रतिभागियों में डेल्टा स्वरूप के खिलाफ अधिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई। इससे पहले खबर आई थी कि वैज्ञानिकों ने ऐसी एंटीबॉडी की पहचान की है जो कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन और अन्य स्वरूपों को उन स्थानों को निशाना बनाकर निष्क्रिय कर सकते हैं, जो वायरस परिवर्तित होने के बाद भी वास्तव में नहीं बदलते हैं।

एंटीबॉडी ट्रीटमेंट बन सकता है बड़ा विकल्प
यह अध्ययन साइंस मैग्जीन ‘नेचर’ में प्रकाशित हुआ है। इस रिसर्च से टीका तैयार करने और एंटीबॉडी से उपचार में मदद मिल सकती है जोकि न केवल ओमीक्रोन बल्कि भविष्य में उभरने वाले अन्य स्वरूपों के खिलाफ भी प्रभावी होगा। अमेरिका में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन’ के सहायक प्रोफेसर डेविड वेसलर ने कहा, ‘यह अध्ययन यह बताता है कि स्पाइक प्रोटीन पर अत्यधिक संरक्षित स्थानों को निशाना बनाने वाले एंटीबॉडी पर ध्यान केंद्रित करके वायरस के निरंतर विकास से छुटकारा पाने का तरीका निकाला जा सकता है।’

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