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ऑमिक्रोन दे रहा है सबसे बड़ी टेंशन, डॉक्टर हो रहे पॉजिटिव तो इलाज कैसे होगा?

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नई दिल्ली
दो साल पहले जब कोरोना फैला तो धरती पर भगवान का रूप कहे जाने वाले डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला। अपनी जान पर खेलकर उन्होंने लोगों की जानें बचाईं। इस दौरान कई डॉक्टर, नर्स और हेल्थकेयर स्टाफ संक्रमण की चपेट में भी आ गए और उनकी मौत हो गई लेकिन अपने फर्ज को आगे रखते हुए डॉक्टरों ने हौसला बनाए रखा और पहली के बाद कोरोना की दूसरी लहर से भी डटकर मुकाबला किया। अब तीसरी लहर आ गई है। ओमीक्रोन वेरिएंट के रूप में नया खतरा देश के सामने है। चिंता की बात यह है कि संक्रामक होने के कारण ज्यादा लोग इससे संक्रमित होंगे, ऐसे में 1 प्रतिशत लोगों को भी अस्पताल आना पड़ा या बुजुर्गों या बीमार लोगों की दिक्कत बढ़ी तो हालात भयावह हो सकते हैं। इस बीच डॉक्टरों के खुद पॉजिटिव होने से टेंशन बढ़ रही है।

हेल्थकेयर स्टाफ का संकट?

जी हां, हेल्थकेयर वर्कर्स कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि ओमीक्रोन वेव में डेली केसेज की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग को तैयारी भी पहले की तुलना में ज्यादा रखनी होगी। ऐसे वक्त में स्वास्थ्य कर्मियों का खुद कोरोना पॉजिटिव होना बड़े खतरे का संकेत है। इससे आगे चलकर हेल्थकेयर स्टाफ की कमी पड़ सकती है।

पिछले हफ्ते में कई अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर कोविड पॉजिटिव हुए हैं। इनमें से ज्यादातर में लक्षण नहीं हैं लेकिन संक्रमण से बचाव के लिए उन्हें आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है। 2 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में एम्स में ही 68 हेल्थकेयर वर्कर्स वायरल इन्फेक्शन की चपेट में आए, जिसमें से 15 डॉक्टर हैं। पिछले दो दिन में और भी लोग बढ़ गए हैं। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 50 हेल्थकेयर स्टाफ को कोराना हुआ है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, राम मनोहर लोहिया, हिंदू राव, लोक नायक और अंबेडकर अस्पतालों में भी स्टाफ के पॉजिटिव होने के कई मामले पता चले हैं।



डॉक्टरों को आशंका है कि कोविड महामारी के दौरान ऐसा ही चला तो अस्पतालों में मैनपावर क्राइसिस हो सकता है। सफदरजंग अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि हमारे अस्पताल में कुछ विभागों में पहले से मानव संसाधन की कमी है क्योंकि कई रेजिडेंट डॉक्टर पॉजिटिव हुए हैं और उनके संपर्क में रहे लोगों को भी आइसोलेट करना पड़ा है।

एम्स प्रशासन ने फेकल्टी मेंबर्स को अपनी सर्दी की छुट्टियां कम करने को कहा है। आशंका इस बात की है कि कोविड केस बढ़ने पर ज्यादा मैनपावर की जरूरत होगी। पिछले तीन-चार दिनों में ही आम लोगों के साथ ही हेल्थकेयर वर्कर्स भी तेजी से पॉजिटिव हुए हैं। सफदरजंग अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर संघ के महासचिव डॉ. अनुज अग्रवाल ने कहा कि करीब-करीब हर तीसरे शख्स को संक्रमण के लक्षण हैं जबकि अन्य ने खुद को आइसोलेट कर लिया है।

अमेरिका में तो सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने हाल ही में एडवाइजरी जारी की थी कि पॉजिटिव होने वाले हेल्थकेयर वर्कर्स 5 दिन बाद काम पर आ सकते हैं। अग्रवाल ने कहा कि अगर संकट बढ़ा तो भारत में भी कुछ ऐसा ही कदम उठाना पड़ेगा। अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल एम्स की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जो हेल्थकेयर वर्कर कोविड पॉजिटिव आए, वह एक हफ्ते के लिए आइसोलेशन में रहे। सफदरजंग अस्पताल में 10 दिन का आइसोलेशन रखा गया है। अमेरिका और यूके में तो काफी संख्या में हेल्थकेयर वर्कर्स को बूस्टर डोज लगाई जा चुकी है, जबकि भारत में यह अभियान 10 जनवरी से शुरू होगा। ऐसे में चिंता बनी हुई है।

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