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Delhi: शहर की 37% आबादी करती है बसों में सफर, तो 33 फीसदी लोग ई-रिक्शा की करते हैं सवारी : स्टडी

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असल न्यूज़: द‍िल्‍ली की सड़कों पर सार्वजन‍िक पर‍िवहन (Public Transport Service) का प्रयोग करने वाले लोगों को केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) और ज्‍यादा सुव‍िधा देने की तैयारी में जुटी है. द‍िल्‍ली सरकार ने एक ऐसी स्‍ट्डी की है ज‍िसमें पता लगाया है क‍ि शहर के मौजूदा बस स्‍टॉप्‍स पर कहां-कहां सबसे ज्‍यादा क‍िस ग्रुप के लोग बसों आद‍ि में सफर करते हैं.

इस स्‍ट्डी के आधार पर सरकार सार्वजनिक बसों (City Bus Service) के रूटों का रेशनलाइजेशन (युक्तिकरण) कर रही है. इसको लेकर मुख्‍यमंत्री अरव‍िंद केजरीवाल की अध्‍यक्षता में अहम मीट‍िंग आयोज‍ित हुई ज‍िसमें रूट रेशनलाइजेशन को लेकर की गई स्‍ट्डी से जुड़े सुझावों को लागू करने के ल‍िए प्रेजेंटेशन भी द‍िया गया है.

मौजूदा समय में 37 फीसदी लोग कर रहे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल
बसों के रूट रेशनलाइजेशन के लिए छह तरह के सर्वे किए गए. इस सर्वे में करीब दो लाख लोगों को शामिल किया गया. इस सर्वे के अनुसार, 2 लाख लोगों में से 37 फीसदी लोग सार्वजनिक सेवा का इस्तेमाल करते पाए गए. सर्वे में कई बातें सामने निकल कर आई हैं.

मसलन, लोगों की औसत यात्रा की लंबाई करीब 11.2 किलोमीटर है. दिल्ली में 37 फीसदी लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं. दिल्ली के आनंद विहार आईएसबीटी, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, कनॉट प्लेस, कश्मीरी गेट आईएसबीटी, बदरपुर जैसे ट्रांजिट सेंटरों पर यात्रियों की सबसे अधिक भीड़ होती है. लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए 33 फीसदी लोगों द्वारा ई रिक्शा का उपयोग किया जाता है.

हर घंटे इन बस स्‍टॉप पर सबसे ज्‍यादा होते हैं यात्री
दिल्ली के मौजूदा बस सेवा के प्रदर्शन में कई चुनौतियां हैं. मसलन, सेड्यूल के पालन की चुनौती है. प्रत्येक ट्रिप में प्रति बस में औसतन 36 यात्री सफर करते हैं. मार्गों और अन्य सेवाओं का हाई ओवरलैप, ग्रामीण सेवा और आरटीवी तय रूट से अलग चलना आदि है. वहीं, दिल्ली और उसके आसपास के यात्रा पैटर्न को भी देखा गया जिसमें पाया गया कि दिल्ली केंद्रीय एरिया में बसों में यात्रा करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है.

पांच बस स्‍टॉप्‍स पर पीक ऑवर में होती है यात्र‍ियों की अध‍िक संख्‍या
दिल्ली के बस स्टापों का भी दौरा किया गया और इसमें पाया गया कि दिल्ली में पांच प्रमुख बस स्टाप हैं, जहां पर सुबह और शाम को पीक आवर के दौरान प्रति घंटा सबसे अधिक यात्रियों की संख्या होती है. इसमें पहले नंबर पर बदरपुर बॉर्डर है, जहां पर प्रति घंटा 1,382 लोग बसों का सफर करते हैं. इसके बाद कश्मीरी गेट है. यहां पर प्रति घंटा 480 लोग बसों में सफर करते हैं. इसी तरह, मंडी हाउस में प्रति घंटा 408, पालिका केंद्र में प्रति घंटा 380, मंगलापुरी टर्मिनल में प्रति घंटा 327 लोग सफर करते हैं.

मध्यम आय वर्ग वाले एरिया के रूटों पर पड़ रहा सबसे अधिक बोझ
इस दौरान यह भी देखा गया है कि विभिन्न आय वर्ग के लोग जिस एरिया में सबसे अधिक रहते हैं, वहां पर बस सेवा का उपयोग करने वालों की तादात कितनी है. दिल्ली में 15 एरिया है, जहां पर कम आय वर्ग के 25 फीसदी लोग सार्वजनिक सेवा का उपयोग करते हैं. इस वजह से इन लोअर इनकम ग्रुप (एलआईजी) क्षेत्रों में स्टॉप पर सार्वजनिक सेवाओं पर अधिक बोझ पड़ता है. इन ट्रांजिट स्टॉप पर बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है.

मध्‍य आय वाले 15 एर‍िया को क‍िया चिन्‍ह‍ित
इसमें बवाना/नरेला, मुंडका, दिल्ली कैंट चार्ज-4 व 6, पुसा, कापसहेड़ा, किशनगढ़, आया नगर, कश्मीरी गेट, एनडीएमसी चार्ज-3, निजामुद्दीन, त्रिलोकपुरी, सरिता विहार, छतरपुर और भाटी ट्रांजिट स्टॉप पर अधिक यात्रियों की भीड़ होती है.

इसी तरह, मध्यम आय वर्ग वाले 15 एरिया को भी चिन्‍ह‍ित किया गया है, जहां पर 30 से 70 फीसदी लोग सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करते हैं. जिसके चलते मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) वाले एरिया के रूटों पर चलने वाली बसों पर अधिक बोझ पड़ता है. इनमें से कई एमआईजी वार्ड पश्चिम और दक्षिणी दिल्ली में स्थित हैं. इसमें अशोक विहार, पीरागढ़ी, राजौरी गार्डन, तिलक नगर, दिल्ली कनॉट प्लेस, बिजवासन, मालवीय नगर, कीर्ति नगर, विवेक विहार, चांदनी चौक, दरियागंज, एनडीएमसी चार्ज-6 अमर कॉलोनी, ग्रेटर कैलाश वन, शाहपुर जट शामिल हैं.

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