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घरेलू हिंसा में सर्वाधिक दर्ज और लंबित मामले यूपी में, नालसा ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर देश में लंबित मामलों के दिए आंकड़े

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दिल्ली। घरेलू हिंसा कानून, 2005 के तहत सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश में लंबित हैं महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है। इस बात की जानकारी नेशनल लीगल सर्विस अथारिटी (नालसा) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई ताजा रिपोर्ट से होता है। रिपोर्ट से पता चलता है कि घरेलू हिंसा कानून लागू होने के बाद से अब तक इस कानून के तहत पूरे देश में कुल 11,93,359 केस दर्ज हुए जिसमें से 7,27,788 निपटाए गए और 4,71,684 अभी लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट मामले पर मंगलवार को सुनवाई करेगा।

न्‍याय तंत्र को प्रभावी बनाए जाने की मांग
गैर सरकारी संगठन ‘वी द वूमेन आफ इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर घरेलू हिंसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने और कानून के तहत पीडि़त महिलाओं के संरक्षण और सहायता के लिए तय तंत्र को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाए जाने की मांग की है। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अप्रैल को नालसा से देश भर से आंकड़े एकत्र कर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। कोर्ट ने जानकारी मांगी थी घरेलू हिंसा कानून लागू होने के बाद से अब तक देश भर में इस कानून के तहत कुल कितने मामले दर्ज हुए हैं और कितने निपटाए गए हैं। इसके अलावा कानून के तहत कितने प्रोटेक्शन अधिकारी या सर्विस प्रोवाइडर हैं।

आश्रय गृहों की मांगी थी जानकारी
सर्विस प्रोवाइडर पीडि़त महिलाओं को सहायता प्रदान करते हैं। कोर्ट ने आश्रय गृहों की भी जानकारी मांगी थी। कोर्ट ने कहा था कि ठोस निष्कर्ष के लिए ये जानकारी जरूरी है। नालसा ने हाई कोर्ट, स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी व राज्य के विभागों से आंकड़े एकत्र करके रिपोर्ट दाखिल की है।

उत्तर प्रदेश में घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले
नालसा की रिपोर्ट में घरेलू हिंसा कानून लागू होने से लेकर एक जुलाई 2022 तक के जो आंकड़े दिए गए हैं। उसके मुताबिक देश भर में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा के दर्ज हुए और अभी भी सबसे ज्यादा मामले वहां लंबित हैं। कानून लागू होने से लेकर एक जुलाई 2022 तक उत्तर प्रदेश में 2,02,880 मामले दर्ज हुए जिनमें से 83,196 मामले 30 जून 2022 तक निपटाए गए और 1,19,684 मामले अभी लंबित थे।

महाराष्‍ट्र में मामलों के निस्‍तारण की गति तेज
दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है जहां कुल 1,96,717 मामले दर्ज हुए जिसमें से 1,15,384 निपटाए गए व 84,637 लंबित हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में केस निपटाने की दर देखी जाए तो महाराष्ट्र की दर ज्यादा है। कुछ अन्य राज्यों पर निगाह डालें तो दिल्ली में 27043, राजस्थान में 27212, मध्य प्रदेश में 26344, पश्चिम बंगाल में 2303, हरियाणा में 19911, पंजाब में 15286 मामले लंबित हैं।

क्‍या कहते हैं आंकड़े
बिहार और झारखंड में कानून लागू होने के बाद से अभी तक दर्ज मुकदमों की संख्या अन्य बड़े राज्यों की तुलना में काफी कम है और लंबित मामले भी कम हैं। बिहार में कानून लागू होने से अभी तक कुल 5377 मामले घरेलू हिंसा के हैं जिसमें से सिर्फ 1446 ही निपटे हैं अभी भी 3931लंबित हैं। झारखंड में कुल 1302 मामले दर्ज हुए जिसमें से 680 निस्तारित हो चुके हैं और 623 लंबित हैं।

20 जिलों में सरकारी आश्रय गृह
प्रोटेक्शन अधिकारी की जिलेवार उपलब्धता और आश्रय गृहों की स्थिति बताने वाली नालसा की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं जिसमें से सिर्फ 65 जिलों में प्रोटेक्शन अधिकारी नियुक्त हैं। इसमें भी 60 जिलों में घरेलू हिंसा के मामलों को देखने के लिए पूर्ण कालिक अधिकारी हैं। 20 जिलों में सरकारी आश्रय गृह हैं जबकि आठ जिलों में गैर सरकारी संगठन के आश्रय गृह हैं।

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