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लगातार बढ़ रहा है लंपी वायरस का खतरा ,ये बीमारी इंसानों को भी करेगी संक्रमित?

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देश में लंपी वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ये स्किन डिजीज पशुओं को संक्रमित कर रही है. अब तक 10 से ज्यादा राज्यों में इसके मामले आ चुके हैं. राजस्थान में लंपी का सबसे भयानकर रूप देखने को मिल रहा है. राज्य में 55 हजार से अधिक मवेशियों की मौत इस वायरस की वजह से हो चुकी है. केंद्र सरकार के साथ मिलकर राज्य सरकारें इसकी रोकथाम के लिए कदम उठा रही है, लेकिन इस बीमारी से जान गंवाने वाले मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. राजस्थान सरकार ने लंपी डिजीज को महामारी घोषित करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. कई राज्यों में इस बीमारी के बढ़ते मामले अब किसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं.

लंपी स्किन डिजीज के सबसे ज्यादा केस गायों में आ रहे हैं. ये बीमारी गायों को तेजी से संक्रमित कर रही है और उनकी मौत का कारण बन रही है. लंपी डिजीज धीरे-धीरे एक महामारी की तरह फैल रही है. आलम यह है कि इससे संक्रमित होने वाली 8 से 10 फीसदी गायों की मौत हो रही है. अगर कोई एक जानवर इस बीमारी से संक्रमित हो रहा है है तो दूसरा भी उसकी चपेट में आ रहा है. एक संक्रमित गाय या मवेशी के शरीर पर मौजूद घाव पर बैठने वाली मक्खी, मच्छर के जरिए लंपी वायरस एक से दूसरे जानवर तक पहुंच रही है.

लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें इस वायरस की रोकथाम के लिए प्रयास कर रही हैं. दिल्ली में भी लंपी ने दस्तक दे दी है. राजधानी में इस बीमारी के 173 मामले आए हैं. इसे देखते हुए दिल्ली सरकार भी इसे लेकर अलर्ट मोड पर आ गई है. इस बीच लंपी के डर की वजह सेराजस्थान और पंजाब में कुछ इलाकों में दूध की खपत कम हो गई है. इस वायरस के डर से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों ने दूध पीना कम कर दिया है.

कुछ शहरी इलाकों में भी डेयरी पर दूध और घी की सप्लाई प्रभावित हो रही है. लोगों को लग रहा है कि गायों का दूध पीने से ये बीमारी उनको संक्रमित कर सकती है. खासतौर पर छोटे बच्चों के माता-पिता को इस बारे में काफी डर सता रहा है. लंपी वायरस को आम लोग कोविड से जोड़कर देख रहे हैं. राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में लंपी डिजीज को लेकर डर बना हुआ है. संक्रमित गायों के डर की वजह से दूध की खपत भी कम हो गई है.

क्या गाय का दूध पीने से इंसान भी संक्रमित हो जाएगा?
संक्रमित गाय के दूध को पीने से क्या बच्चे या बड़े लोग भी इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं? इस बारे में बिहार के मुजफ्फरपुर के पीडियाट्रिशियन डॉ. अरुण शाह बताते हैं कि आमतौर पर सभी घरों में गाय के दूध को लोग उबालकर पीते हैं. दूध के उबालने से उसमें मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया या वायरस खत्म हो जाते हैं. ऐसे में अगर लोग गाय के दूध को उबाल कर पीते हैं तो उससे खतरा होने की आशंका नहीं है. अगर किसी स्थिति में दूध उबाले बिना भी पीते हैं तो ये बच्चे या व्यक्ति की इम्यूनिटी पर निर्भर करता है. अगर इम्यूनिटी बेहतर है तो वायरस से संक्रमित होने का खतरा नहीं है.

डॉ. शाह के मुताबिक, जिस व्यक्ति की इम्यूनिटी अच्छी है. उसमें भले ही संक्रमण हो जाए, लेकिन ये बीमारी नहीं बनता है. वहीं, अगर वायरल लोड कम है तो भी संक्रमित होने की आशंका काफी कम है. किसी भी वायरस से खतरा तभी रहता है जब इम्यूनिटी अच्छी न हो अगर रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर है तो चिंता की कोई बात नहीं है.

डॉ. शाह के मुताबिक, इस वायरस से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को लंपी से पैनिक होने की जरूरत नहीं है. ऐसा नहीं है कि संक्रमित गाय या अन्य किसी गाय का दूध पीने से ये वायरस इंसानों में फैल जाएगा. अभी तक ऐसा कोई मेडिकल प्रमाण भी नहीं है कि ये बीमारी इंसानों को संक्रमित करेगी.

इस वायरस की रोकथाम कैसे हो सकती है

वायरस की रोकथाम के तरीकों के बारे में पशु चिकित्सक डॉ. नरसी राम बताते हैं कि इस वायरस से बचाव के लिए जरूरी है कि जिस परिसर में गाय रहती है वहांजैव सुरक्षा उपायों को अपनाएं. अपनी गायों में लंपी के लक्षणों की जांच करते रहें. अगर किसी गाय में लंपी वायरस के लक्षण नजर आ रहे हैं तोगाय को चारा, पानी और उपचार के साथ झुंड से अलग रखें और संक्रमित गाय की जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें.

डॉ. नरसी का कहना है कि गोट पॉक्स और शीप पॉक्स वैक्सीन से लंपी वायरस को रोकने में काफी मदद मिल सकती है. ये वैक्सीन 60 फीसदी तक प्रभावी है. ऐसे में जरूरी है कि सभी प्रभावित इलाकों में इस वैक्सीन से मवेशियों का टीकाकरण बड़े स्तर पर किया जाए. साथ ही लोगों को इस वायरस के बारे में जागरूक करने की भी जरूरत है.

लक्षणों की पहचान को लेकर जागरूकता लानी होगी

कई इलाकों में लंपी के लक्षणों को लेकर जागरूकता की कमी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोगों को इस बीमारी को लेकर पैनिक नहीं होना चाहिए. अगर अगर किसी गाय के शरीर पर गांठ निकल रही है या घाव हो रहा है तो इसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देनी चाहिए. सही समय पर गाय को आइसोटेलट करके अन्य मवेशियों को इस संक्रमण के खतरे से बचाया जा सकता है.

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