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टिकट घोटाले में तीन रेलवे कर्मी सस्‍पेंड, अफसरों ने देखा- काउंटर से कैसे बनते हैं फर्जी टिकट

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रेलवे ने टिकट घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। रेलवे ने फर्जी टिकट बनाने के मामले में तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। दिल्‍ली से आए रेलवे के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने काउंटर से फर्जी टिकट बनाने का डेमो देखा।

यूटीएस से निकाला जाता था फर्जी रेल टिकट

रेलवे ने अनरिजर्व टिक्टिंग सिस्टम (यूटीएस) से फर्जी रेल टिकटें निकालने के इस मामले में चीफ बुकिंग सुपरवाइजर (सीबीएस) सहित तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया है। रेल टिकट के इस अनोखे घोटाले की गूंज उत्तर रेलवे के बड़ौदा हाउस सहित रेल मंत्रालय तक पहुंच गई है। रेल कर्मी किस कदर फर्जी टिकटों को असली बनाकर यात्रियों को बेच रहे थे, इसके लिए नई दिल्ली पर वरिष्ठ अधिकारियों ने इसका डेमो भी देखा।

इस दौरान चीफ कामर्शियल मैनेजर (पैसेंजर एवं मार्किटिंग), प्रिंसिपल चीफ कामर्शियल मैनेजर उत्तर रेलवे, चीफ कामर्शियल मैनेजर (पैसेंजर एंड सर्विस) शामिल रहे। इन अधिकारियों ने देखा कि किस तरह यूटीएस काउंटर में कार्टेज हटाकर ब्लैंक टिकट निकाली जाती और फिर उस पर कार्बन की मदद से दूसरी टिकट बना दी जाती थी।

रेल मंत्रालय ने इस घोटाले को गंभीरता से लिया है और इस तरह अन्य स्टेशनों पर ऐसा न हो रहा हो, इसको लेकर भी चेकिंग के लिए तैयारी की जा रही है। फिलहाल यह घोटाला अंबाला रेल मंडल के संगरूर, धुरी स्टेशन पर उजागर हुआ है, जबकि टिकटें दो ही स्टेशनों की पकड़ी गई हैं। इन फर्जी टिकटों को देखकर दिल्ली के अधिकारी भी हैरत में पड़ गए कि बिलकुल असली टिकट की तरह ये दिखाई दे रही हैं।

इस तरह निकालते थे ब्लैंक टिकट

संगरूर रेलवे स्टेशन पर रेल कर्मी संगरूर से सुनाम की ब्लैंक टिकट निकाल लेते थे। इन टिकटों पर पहले से ही आठ अंकों का नंबर अंकित होता है। जब ब्लैंक टिकटें निकाली जाती थी, तो कार्टेज को हटा दिया जाता था और यूटीएस से कमान संगरूर से सुनाम की दे दी जाती थी। इस रूट का तीस रुपये किराया रेलवे के खजाने में जमा कराया जाता था, जबकि ब्लैंक टिकट को लंबी दूरी की टिकट बना दिया जाता था।

उदाहरण के लिए जब कोई यात्री संगरूर से मथुरा या दिल्ली अथवा गोरखपुर की टिकट लेने आता था, तो नई टिकट की कमान देते ही उसके पीछे ब्लैंक टिकट भी लगा देते थे। रेलवे का कार्बन उच्च गुणवत्ता का है, जिसके चलते यह ब्लैंक टिकट भी लंबी दूरी की निकल जाती थी। इस तरह और किन स्टेशनों पर यह खेल हो रहा है, इसकी जांच रेलवे ने शुरू कर दी है।

इस तरह पकड़ा गया घोटाला

टिकट ट्रैवलिंग इग्जामिनर (टीटीई) को चेकिंग के दौरान ऐसी ही टिकटें मिली, जिनमें से उसे एक पर संदेह हो गया। इस टिकट को चेकिंग स्टाफ ने अंबाला मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक हरिमोहन के पास भेज दिया। सीनियर डीसीएम ने संगरूर, धुरी स्टेशन पर कर्मचारियों को जांच के लिए भेजा।

जांच के दौरान घोटाला उजागर हो गया और रिपोर्ट बनाकर अंबाला रेल मंडल को भेजी गई। सीनियर डीसीएम ने उत्तर रेलवे के अधिकारियों को अवगत करा दिया। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों को ऐसी फर्जी टिकटें थमाई जाती थी। इसलिए उन स्टेशनों को भी चिन्हित कर जांच की जाएगी।

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