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इंटरनेट मीडिया का जीवन में क्या है महत्व, कितना करना चाहिए प्रयोग, विशेषज्ञ ने बताया सबकुछ

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मुरादाबाद के प्रताप सिंह हिन्दू गर्ल्स इंटर कालेज की प्रधानाचार्य सीमा शर्मा का कहना है कि आज का युग कंप्यूटर का युग है। हम सब इंटरनेट के जाल में कैद हैं। आज हमारे चारों ओर का वायुमंडल इंटरनेट द्वारा सोशल मीडिया, मोबाइल फोन, कंप्यूटर पर संचालित विभिन्न प्लेटफार्म इस प्रकार मिश्रित होते हैं या हो गए हैं। जैसे वायुमंडल में आक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बनडाइआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड गैस होती हैं।

प्रदूषित वायुमंडल में जी रहे हम लोग
जिस प्रकार से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, उसी प्रकार सोशल मीडिया के द्वारा प्रदूषित वायुमंडल में जीवन जी रहे हैं। मानव जीवन तभी स्वस्थ हो सकता है जब हम संतुलित व नियमित दिनचर्या का अनुसरण करते हैं। इंटरनेट के युग में जीना हमारे स्वर्णिम भविष्य की चुनौती है। हमें अपने जीवन में इनका संतुलित प्रयोग करना चाहिए।

परिचर्चा के कार्यक्रम से मन में उठते हैं सवाल
आज के समय में टीवी के विभिन्न चैनल पर विभिन्न प्रकार की ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा परिचर्चा के कार्यक्रम प्रसारित होते हैं। देखते हुए मन मस्तिष्क में प्रश्न अवश्य उठता है कि प्रस्तोता व वक्ता का बहस या चर्चा करते समय एक सीमित परिप्रेक्ष्य होना चाहिए।

किसी भी विषय पर बहस दो या अधिक विद्वानों अथवा विषय विशेषज्ञों के मध्य ही होती है। बहस तो एक पुरातन परंपरा है, हमारी प्राचीन संस्कृति के अनुसार विद्वान, दार्शनिक, वैज्ञानिक ज्योतिष, समाज सुधारक तथा राजनीतिज्ञ किसी न किसी गूढ़ समस्या पर चर्चा परिचर्चा, शास्त्रार्थ या बहस किया करते थे, इससे उसका सकारात्मक हल निकलता।

बहस का होना चाहिए निश्चित उद्देश्य
सदैव बहस का एक निश्चित उद्देश्य गूढ़ विषय के वास्तविक अर्थ व स्वरूप को लेकर निश्चित परिवेश में अनुशासनात्मक भाषा शैली व शब्दावली के साथ होनी चाहिए। प्राचीन ग्रंथों में ऐसा भी पढ़ने में आता है कि स्वयं को या समाज समुदाय को तुलनात्मक दृष्टि से श्रेष्ठ प्रदर्शित करने के लिए चर्चा परिचर्चा या बहस का आयोजन होता था।

आज बहस टीका-टिप्पणी पर केंद्रीत
आज के समय में यह आयोजन अब प्रासंगिक या मात्र टीका टिप्पणी वाले तथा गरिमा की सीमा का उल्लंघन करने वाले होते जा रहे हैं। इससे हृदय में सम्मान व आदर के भाव में गिरावट आयी है। अभी हाल ही में टीवी पर प्रसारित काशी में ज्ञान वापी परिसर स्थित मस्जिद में शिवलिंग की उपस्थिति पर बहस तथा बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा दिए गए बयानों पर बहस के आयोजनों ने समाज व देश में अराजकता उत्पन्न करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

परिचर्चा की दिशा सही होनी चाहिए
देश दुनिया में आरोपों प्रत्यारोपों के माध्यम से समाज में हिंसा भी फैलती है और नवयुवकों को हिंसात्मक सोच की ओर अग्रसर करके उनके व्यक्तित्व को दानव का स्वरूप देती है। हमारे देश की भावी पीढ़ी का जीवन दूषित करती है। बहस या चर्चा परिचर्चा सदैव समाज के लिए सही दिशा की ओर अग्रसर करने वाले एजेंडा पर होनी चाहिए जिसका परिणाम सार्थक हो। बहस में उग्रता, तीक्ष्ण, शब्दावली प्रयोग न करके अनुशासनात्मक ढंग से विषय पर चर्चा निस्वार्थ भाव से होनी चाहिए। देश समाज पर जिसका सकारात्मक प्रभाव होना चाहिए।

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