Home Delhi शिक्षा के नाम पर यूनिवर्सिटी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करें।

शिक्षा के नाम पर यूनिवर्सिटी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करें।

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नई दिल्ली। कहने को तो शिक्षा के मंदिरों में बच्चों को शिक्षित करके राष्ट्र की धुरी बनाने का काम किया जाता है, लेकिन जहां पब्लिक स्कूलों की भारी भरकम फीसदी पर दिल्ली सरकार और माननीय कोर्ट अपने मापदंड तय करता है,वही देश की नामी गिरामी यूनिवर्सिटी (आईपी, गुरु गोबिंदसिंह आदि) भी शिक्षा के लिए आ रहे होनहार विद्यार्थियों के अभिभावकों को किस प्रकार निचोडते है,उसके भी कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। वरिष्ठ पत्रकार विजय शर्मा ने बताया, कि पहले इन यूनिवर्सिटी से संबद्ध कालेजों व इंस्टीट्यूट में एडमिशन के नाम पर भारी भरकम प्रोस्पेक्टर थमा दिया जाता है, जिसमें कालेज को सर्वगुण संपन्न दिखाया जाता है। एडमिशन के लिए कई कालेज तो डोनेशन लेने से भी परहेज नही करते।

प्रोसपेक्टर में दिखाई गई सुविधाएं कालेज में एंट्री लेने के बाद से ही फुर्र हो जाती है। बच्चों के एडमिशन के बाद उपस्थिति कम है,तो पैसा दो, उपस्थिति पूरी कराओ, यहां तक की बच्चों के माता पिता तक की बातो को भी दरकिनार कर उनको विवश कर दिया जाता है। प्लेसमेंट के नाम पर इतने बच्चों को शिक्षित कर उन्हें रोजगार दिलाने के नाम पर भी ये कालेज सिर्फ खानापूर्ति करते हैं।इन यूनिवर्सिटी पर आधारित कालेजो में पढ़ रहे बच्चों ने नाम न लिखे जाने की शर्त पर बताया, कि कालेजो के एसी तक काम नही करते, यहां तक की मास-मीडिया कम्युनिकेशन में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को ही इतना प्रताड़ित किया जाता है,कि वे बेचारे इन संस्थानों से शिक्षा लेकर क्या देश का भला कर सकते हैं,ये संस्थान तो केवल अपने भले की सोचकर इन बच्चों के हाथ की कलम का ही चीर -हरण कर देते हैं।

बहरहाल इस प्रकार की परिपाटी से बच्चे शिक्षित होकर एक डिग्री जरुर ले लेंगे, लेकिन सत्यता यह है,कि इतनी प्रताड़ना के बाद उनका मनोबल पूरी तरह टूट चुका होता है। केन्द्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय को इन बेलगाम यूनिवर्सिटी की भी सार्थकता को समय समय पर जांचना चाहिए, जिससे की भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के यूथ मजबूती के संदेश को परिभाषित किया जा सके।

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