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BJP: 172 सीटों पर कैंडिडेट फाइनल; जल्द आएगी लिस्ट

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी कोर टीम की मीटिंग में बुधवार को सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा हुई. मीटिंग की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह ने की. ये मीटिंग करीब 14 घंटे चली और रात करीब 1:35 बजे तक चली. कोर कमेटी की की मीटिंग में निषाद पार्टी के संजय निषाद, अपना दल की अनुप्रिया पटेल से भी सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत हुई. सूत्रों के अनुसार सीट शेयरिंग को लेकर घोषणा गुरुवार को सीईसी की मीटिंग के बाद की जाएगी.
सूत्रों के अनुसार मीटिंग में सीएम योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़वाने पर भी चर्चा की गई. हालांकि इस पर आखिरी फैसला बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति की मीटिंग के बाद लिया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मीटिंग में शामिल होंगे. सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा से पांच बार सांसद चुने गए हैं. उन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है.

172 उम्मीदवारों के नाम फाइनल
इसी के साथ कोर कमेटी की मीटिंग में बुधवार को पहले तीन चरणों में आने वाले 172 उम्मीदवारों के नाम फाइल कर दिए गए हैं. सूत्रों के अनुसार दिल्ली मुख्यालय में मीटिंग के दौरान 300 सीटों पर नाम को लेकर चर्चा हुई लेकिन सिर्फ पहले तीन चरणों में 172 सीटों पर ही नाम फाइनल हो पाए. अब ये नाम गुरुवार को बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति के सामने रखे जाएंगे.
आज लगेगी मुहर
केंद्रीय चुनाव समिति की मुहर लगने के बाद आने वाले दिनों में इन नामों की घोषणा की जाएगी. बुधवार मीटिंग दोपहर 11 बजे शुरू हुई और देर रात डेढ़ बजे तक चली. इससे पहले मंगलवार को भी मीटिंग 10 घंटे से ज्यादा चली थी. मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इंचार्ज-धर्मेंद्र प्रधान, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश महासचिव सुनिल बंसल, राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष भी मौजूद थे. इसी के साथ हालही में कोरोना पॉजिटिव पाए गए जेपी नड्डा ने मीटिंग में वर्चुअली हिस्सा लिया.

सहयोगियों को मिलेगी ज्यादा सीटें?
बीजेपी के सहयोगी दल ‘अपना दल’ से भी सीटों को लेकर चर्चा हुई. इसके लिए अनुप्रिया पटेल बीजेपी मुख्यालय पहुंची थीं. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना दल को 11 सीटें दी थी. इसमें से 9 सीटों पर अनुप्रिया पटेल की पार्टी ने जीत हासिल की थी. इस बार अपना दल पहले ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकता है.

कांग्रेस की पहली लिस्ट जारी, 125 उम्मीदवारों में 50 महिलाएं

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उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस पार्टी ने पहली लिस्ट जारी कर दी है. पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की पहली लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में 125 उम्मीदवार हैं, जिसमें 50 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं. उन्नाव रेप पीड़िता की मां को भी कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है. प्रियंका गांधी ने बताया कि कांग्रेस के उम्मीदवारों में महिलाओं के साथ-साथ कुछ पत्रकार, एक अभिनेत्री और समाज सेवी भी शामिल हैं.


इनको मिला टिकटबड़े नामों की बात करें तो सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद तो टिकट मिला है. सदफ जाफर को भी उम्मीदवार बनाया गया है. उन्नाव से कांग्रेस ने आशा सिंह को उम्मीदवार बनाया है. प्रियंका ने कहा कि उनकी लड़की का पहले रेप कराया गया था. फिर बाद में एक्सीडेंट भी कराया गया. इसके अलावा NRC-CAA के खिलाफ आंदोलन करने वालीं सदफ जाफर को उम्मीदवार बनाया गया है. इसके अलावा पूनम पांडे को टिकट मिला है.सात चरणों में होंगे चुनावयूपी में कुल 403 सीटें हैं जहां सात चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन चरणों के तहत 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान होगा. नतीजे 10 मार्च को बाकी राज्य (पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा) के साथ आएंगे.


10 मार्च को आएंगे यूपी चुनाव के नतीजेबता दें कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में मतदान 10 फरवरी से शुरू होगा. यूपी में सात चरणों में 10, 14, 20, 23, 27 और 3 और 7 मार्च को वोट डाले जाएंगे. जबकि वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी. चुनाव आयोग ने कोरोना के मद्देनज़र यूपी, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों के लिए 15 जनवरी तक किसी भी राजनीतिक रैलियों और रोड शो की अनुमति नहीं दी है.

भाजपा में इस्तीफों का दौर जारी, अब शिकोहाबाद से विधायक डॉ. मुकेश वर्मा ने दिया इस्तीफा

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मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ने के बाद इस्तीफों का सिलसिला जारी है। गुरुवार को शिकोहाबाद से भाजपा के विधायक डॉ. मुकेश वर्मा से पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की चर्चाएं सोशल मीडिया पर चलने लगीं। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को भेजा है। डॉ. मुकेश वर्मा पांच वर्ष पूर्व ही भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वे बहुजन समाज पार्टी में थे। 2012 का विधानसभा चुनाव उन्होंने बसपा से लड़ा था और दूसरे नंबर पर रहे थे।


सोशल मीडिया पर दी जानकारी
वहीं गुरुवार सुबह उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि भाजपा सरकार द्वारा पांच वर्ष के कार्यकाल में दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को कोई तवज्जो नहीं दी गई और न ही कोई उचित सम्मान दिया गया। इसके अलावा दलित, पिछड़ों किसानों व बेरोजगारों की उपेक्षा की गई। ऐसे कूटनीतिक रवैये के कारण मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य शोषित, पीड़ितों की आवाज हैं और वह हमारे नेता हैं मैं उनके साथ हूं।


मोदी लहर में मुकेश बने थे पहली बार विधायक
वर्ष 2017 में बसपा छोड़कर भाजपा में आए डॉ. मुकेश वर्मा को मोदी लहर में विधायक बनने का सौभाग्य मिला। शिकोहाबाद विधानसभा में 87,851 वोट पाकर सपा प्रत्याशी संजय यादव को 10,777 मतों से हराया था। संजय यादव को 77, 074 वोट मिले थे। जबकि तीसरे नंबर पर बसपा के शैलेंद्र कुमार को 37, 512 वोट हासिल हुए थे।
अब सपा में जाने की लग रही अटकलें
डॉ. मुकेश वर्मा सपा में जाने की अटकलें अब तेज हो गई हैं। क्योंकि इस्तीफे में स्वामी प्रसाद मौर्य का जिक्र कर उन्हें अपना नेता बताया है। इससे यह कयास लगाया जा रहा है कि वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
पार्टी चल रही थी डॉ. मुकेश से नाखुश
भाजपा सूत्रों की मानें तो डॉ. मुकेश वर्मा के कामकाज से कार्यकर्ता के साथ-साथ आलाकमान नेता भी खुश नहीं थे। टिकट कटने की सूची में भी इनका नाम शामिल था ऐसा लोग बता रहे थे। वहीं कुछ दिनों पहले जैन समाज के लोगों ने भी एक मंदिर प्रकरण में इनका नाम व एक लोगों को पीटने के आरोप लगाए थे और पूरे जिले में इसका तगड़ा विरोध हुआ था। हालांकि कुछ दिनों पहले इस मामले का पटाक्षेप भी हो गया।
हो सकती है डॉ. मुकेश की चाल
राजनीति से जुड़े लोगों की मानें तो डॉ. मुकेश वर्मा ने इस्तीफा देकर बड़ी चाल खेली हो, क्योंकि डॉ. मुकेश को पार्टी इस बार टिकट न देने का मन बना चुकी थी। यह बात उन्हें भी पता थी। लेकिन पिछले दिनों से चल रहे भाजपा के घटनाक्रम व स्वामी प्रसाद मौर्य के जाने के बाद जिस तरह पिछड़े लोगों की उपेक्षा भाजपा में होने का आरोप लगाया जा रहा है, तो यह उनकी चाल भी हो सकती है। जिससे कम से कम पार्टी उनकी उम्मीदवारी को दरकिनार न किया जाए। या फिर मान मनौव्वल पार्टी के आलाकमान करें, तो टिकट देने की शर्त पर उनकी वापसी हो सके।

Covid Sniffer Dogs: अमेरिका में श्वान सूंघकर बता रहे आप पॉजिटिव हैं या नहीं!

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श्वानों को ईश्वर ने सूंघने की अद्भुत शक्ति दी है। इसके दम पर वे इंसानों को खतरे से बचाने के लिए अपनी जान झोंक देते हैं। हम यहां अमेरिका के ऐसे खोजी श्वानों (sniffer dogs) का जिक्र कर रहे हैं जो वैश्विक महामारी कोरोना से संक्रमित किसी व्यक्ति की पहचान सूंघ कर कर लेते हैं। 

अब तक आपने खोजी श्वानों का उपयोग सेना व पुलिस द्वारा बमों, संदिग्ध वस्तुओं व व्यक्तियों, पहाड़ों पर बर्फ में दबे लोगों को ढूंढ निकालने आदि महत्वपूर्ण कामों को अंजाम देते सुना व देखा होगा। लेकिन अमेरिका में विशेष रूप से प्रशिक्षित श्वान अब कोविड पॉजिटिव रोगियों की पहचान भी करने लगे हैं। यदि इन्होंने आप में कोरोना वायरस की पुष्टि कर दी तो आपको आरटीपीसीआर टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। ये सूंघने की दिव्य शक्ति के दम पर कोविड-19 की पुष्टि कर रहे हैं। 

बायो डिटेक्शन के आ रहे काम, कैंसर व डायबिटीज की भी पहचान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में खोजी कुत्तों का इस्तेमाल कैंसर, डायबिटीज व पार्किंनसंस जैसे रोगों की पहचान में भी किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को ‘बायो डिटेक्शन’ (biodetection) या जैविक पड़ताल कहा जाता है।

इस तरीके से रोग की जांच में किसी रसायन के इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ती। 2019-20 में जब कोरोना महामारी फैली थी तो अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना की पड़ताल में खोजी श्वानों की सेवाएं लेने का प्रयोग शुरू किया था। अब इसमें कामयाबी मिल गई है। 

कोरोना संक्रमित के शरीर से निकलते हैं वीओसी
अमेरिकी सरकार के नेशनल सेंटर फॉर बॉयो टेक्नालॉजी इंफर्मेशन (NCBI) का कहना है कि श्वान अपनी दिव्य शक्ति के दम पर किसी पदार्थ के 1.5 खरब वे अंश का भी पता लगा सकते हैं। जब कोई बीमार पड़ता है तो उसके शरीर में से खास तरह के वोलेटाइल आर्गेनिक कंपाउंड (VOC) निकलते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है तो उसके शरीर से आने वाली विशेष गंध को ये ये श्वान पहचान लेते हैं। इन्हें ही बॉयो डिटेक्शन डॉग्स कहा जाता है। 

असम के राज्यपाल जगदीश मुखी हुए कोरोना संक्रमित, अस्पताल में कराया गया भर्ती

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देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। खतरे को देखते हुए केंद्र से लेकर राज्य सरकारों की बैठक लगातार जारी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आज यानी गुरुवार शाम 4.30 बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में देश में कोरोना महामारी से उत्पन्न मौजूदा स्थिति पर चर्चा की जाएगी साथ ही इसके उपायों पर मंथन किया जाएगा।

इन सब के बीच एक चिंताजनक बात यह है कि देश के 300 जिलों में संक्रमण दर पांच फीसदी से अधिक हो गई है।असम के राज्यपाल जगदीश मुखी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। फिलहाल उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है

चीन: मेटल बॉक्सों में कैद किए जा रहे संक्रमित, लाखों को शिविरों में भेजा

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चीन अपनी ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ के तहत अपने ही नागरिकों से खिलवाड़ कर रहा है। सोशल मीडिया में आए कुछ वीडियो से पता चलता है कि लाखों लोगों को जहां क्वारंटाइन शिविरों में रखा गया है, वहीं कई संक्रमित मरीजों को मेटल बॉक्सों में कैद कर दिया गया है। अगले माह चीन विंटर ओलिपिंक की मेजबानी करने वाला है, इसे देखते हुए सख्ती और बढ़ा दी गई है। 

सोशल मीडिया में चीन के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनसे पता चलता है कि सख्त पाबंदियों के नाम पर वहां नागरिकों के साथ किस तरह का व्यवहार हो रहा है। यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को भी मेटल के इन बॉक्सों में रखा जा रहा है। कोविड संक्रमितों होने पर इन बॉक्सों में दो सप्ताह के लिए कैद कर दिया जाता है। इनमें लकड़ी के पलंग व टॉयलेट बनाए गए हैं। 


आधी रात को कहा जा रहा, घर छोड़ो और कैंप में चलो

खबरों में कहा गया है कि यदि किसी क्षेत्र में एक संक्रमित भी मिल जाए तो पूरे इलाके के लोगों को क्वारंटीन किया जा रहा है। उन्हें बसों में भर भरकर कैंपों में ले जाया जा रहा है। कहा गया है कि संक्रमित मिलने पर कई इलाकों के लोगों को आधी रात को कहा जाता है कि उन्हें घर छोड़ना होगा और क्वारंटीन कैंप में चलना होगा। चीन में संक्रमितों व उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने की भी सख्त नीति है। इसके तहत हर व्यक्ति को ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ एप्स अपने मोबाइल में रखना जरूरी है। इसके जरिए किसी व्यक्ति के संक्रमित होने पर उसके संपर्क में आए सारे लोगों का पता लगाकर उन्हें क्वारंटीन कैंपों में भेज दिया जाता है। 

तियानजिन में ओमिक्रॉन से हड़कंप, लॉकडाउन की आशंका
उधर, चीन के तियानजिन शहर में बीते दिनों ओमिक्रॉन के केस मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। लोगों को लॉकडाउन की आशंका है, इसलिए वे घबराहट में खाने पीने के सामान की खरीदारी कर रहे हैं। 

दो करोड़ लोग घरों में कैद, खाने पीने के सामान के लाले
चीन में करीब दो करोड़ लोगों को घरों में कैद कर दिया गया है। यहां तक उन्हें खाने पीने का सामान लेने भी बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीते दिनों एक गर्भवती महिलो का अस्पताल नहीं जाने दिया गया और इस कारण उसे गर्भपात हो गया। इसके बाद चीन में सख्त कोविड नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है। 

शहर छोड़ रहे लोग
चीन में लॉकडाउन को लेकर भी सख्त नीति है। यदि किसी शहर में लॉकडाउन लग गया तो समझो मौत तय है। इसी डर के मारे कुछ लोग शहर छोड़कर भागते भी नजर आए। ट्विटर पर सांगपियांग नाम के एक चीनी नागरिक ने चीन की सख्त कोविड नीति व उसके नाम पर नागरिकों के दमन के वीडियो साझा किए हैं। 

2019 में चीन से कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला था। इसके बाद चीन ने अत्यंत कड़ा लॉकडाउन लागू किया था। तब भी चीन के कड़े कोविड नियम लागू किए गए थे। इसके वीडियो भी पूरी दुनिया में चर्चित हुए थे। 

कोरोना के कारण घर पर क्‍वारंटाइन है तो जान लीजिये सरकार की ये गाइडलाइंस

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नई दिल्‍ली. देश में इन दिनों कोरोना वायरस संक्रमण  के मामले बेहद तेजी के साथ फैल रहे हैं. कोरोना वायरस  का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन  भी बड़ी संख्‍या में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. रोजाना कोरोना वायरस के नए केस हजारों की संख्‍या में सामने आ रहे हैं. हालांकि अभी यह मामले गैर लक्षणी या हल्‍के लक्षण वाले हैं. ऐसे में यह अभी कम जानलेवा हैं और घर पर डॉक्‍टरी परामर्श के साथ इसके मरीज ठीक हो रहे हैं. जो कोरोना मरीज  हल्‍के कोविड लक्षण या गैर लक्षणी वाले हैं, उनके लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय समय-समय पर होम आइसोलेशन  के लिए गाइडलाइंस जारी करता है. ताकि उन्‍हें मेडिकल सहायता मुहैया होने में कोई दिक्‍कत ना हो. साथ ही घर पर रहते हुए उनके परिवारवालों को भी उसके जरिये कोरोना ना फैल पाए.

दरअसल गैर लक्षणी कोरोना मरीज वे होते हैं, जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं होते हैं और उनका ऑक्‍सीजन लेवल भी 93 फीसदी से अधिक होता है. वहीं हल्‍के लक्षण वाले मरीजों में भी ऑक्‍सीजन लेवल 93 फीसदी से अधिक होता है. उन्‍हें बुखार हो भी सकता है और नहीं भी. उन्‍हें सांस लेने में कोई दिक्‍कत नहीं होती है. सिर्फ वहीं कोरोना मरीज होम आइसोलेशन या क्‍वारंटाइन में रह सकते हैं, जिन्‍हें हल्‍के लक्षण या कोई लक्षण ना हों.


ये हैं होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीज के लिए नियम

– मरीज को घर के अन्य सदस्यों से खुद को अलग करना चाहिए. एक अलग कमरे में रहना चाहिए. घर के अन्य लोगों से दूर रहना चाहिए, विशेष रूप से बुजुर्गों और अन्‍य बीमारियों से जूझ रहे लोगों से भी .

– मरीज को एक हवादार कमरे में क्रॉस वेंटिलेशन के साथ रहना चाहिए और ताजी हवा आने के लिए खिड़कियां खुली रखनी चाहिए.

– मरीज को हमेशा तीन परतों या लेयर वाले मेडिकल मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर मास्क गीला हो जाता है या दिखने में गंदा हो जाता है तो उन्हें हटा देना चाहिए. एक मास्‍क को 8 घंटे इस्‍तेमाल किया जा सकता है. देखभाल करने वाले के मरीज के कमरे में जाने की स्थिति में देखभाल करने वाले और मरीज, दोनों ही एन-95 मास्क का उपयोग कर सकते हैं.

– मास्क को टुकड़ों में काटकर और पेपर बैग में कम से कम 72 घंटे के लिए रख कर फेंक देना चाहिए.

– मरीज को पर्याप्‍त पानी या अन्‍य पेय पदार्थ पीने चाहिए.

– हाथों को कम से कम 40 सेकंड तक साबुन और पानी से बार-बार धोना चाहिए. अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर से हाथ साफ करने चाहिए.

– मरीज घर के अन्य लोगों के साथ बर्तन सहित निजी सामान साझा नहीं करेंगे.

– कमरे में बार-बार छुई जाने वाली सतहों (टेबलटॉप, डोर नॉब्स, हैंडल आदि) की साबुन/डिटर्जेंट और पानी से सफाई सुनिश्चित करें. मास्क और दस्ताने के उपयोग जैसी आवश्यक सावधानियों का पालन करते हुए या तो मरीज या देखभाल करने वाले द्वारा सफाई की जा सकती है.

– मरीज की पल्स ऑक्सीमीटर के साथ ब्‍लड ऑक्सीमीटर की निगरानी की सलाह दी जाती है।

– मरीज को रोजाना तापमान की निगरानी के साथ अपने स्वास्थ्य की स्वयं निगरानी करनी चाहिए और किसी भी लक्षण के बिगड़ने पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए. स्थिति को इलाज करने वाले डॉक्‍टर के साथ-साथ निगरानी टीमों/नियंत्रण कक्ष के साथ साझा किया जाना चाहिए.

– मुमकिन हो तो मरीज की देखभाल करने वाले उसी व्‍यक्ति को जिम्‍मेदारी दी जानी चाहिए, जिसे वैक्‍सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं. उन्हें मरीज के आसपास हर समय ट्रिपल लेयर मेडिकल मास्क पहनना आवश्यक है.

मरीज के साथ इन बातों का विशेष ख्‍याल रखे परिवार

– मरीज के शरीर के तरल पदार्थ जैसे नाक, लार आदि के सीधे संपर्क में आने से बचें. मरीज को संभालते समय डिस्पोजेबल दस्ताने का प्रयोग करे.

– मरीज के किसी भी सामान से सीधा संपर्क में आने से बचें. जैसे खाने के बर्तन, व्यंजन, पेय, इस्तेमाल किए गए तौलिये या बिस्तर.

– मरीज को उसके कमरे में भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। रोगी द्वारा उपयोग किए जाने वाले बर्तनों और बर्तनों को दस्ताने पहनकर साबुन/डिटर्जेंट और पानी से साफ करना चाहिए. उचित सफाई के बाद बर्तनों का उपयोग किया जा सकता है.

-दस्ताने उतारने या इस्तेमाल की गई वस्तुओं को छूने के बाद हाथ साफ करें. मरीज द्वारा उपयोग की जाने वाली सतहों, कपड़ों या साफ करते समय ट्रिपल लेयर मेडिकल मास्क और डिस्पोजेबल दस्ताने का प्रयोग करें.

– इस्तेमाल किए गए मास्क, दस्ताने और ऊतक या COVID-19 रोगियों के खून/शरीर के तरल पदार्थ, इस्तेमाल की गई सीरिंज, दवाएं आदि शामिल हैं, को बायोमेडिकल कचरे के रूप में माना जाना चाहिए और उसी के अनुसार पीले बैग में इकट्ठा करके निपटाया जाना चाहिए और सौंप दिया जाना चाहिए। कचरे वाले को अलग से देना चाहिए. ताकि घर और समुदाय में संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके.

हल्‍के या गैर लक्षणी मरीजों का इलाज होम आइसोलेशन में कैसे करें?
– मरीजों को डॉक्‍टर के साथ संवाद में होना चाहिए और किसी भी परेशानी के मामले में तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए.

– डॉक्‍टर से परामर्श करने के बाद मरीज को अन्य बीमारियों के लिए दवाएं जारी रखनी चाहिए.

– मरीज www.esanjeevaniopd.in पर उपलब्ध ई-संजीवनी टेली-परामर्श प्लेटफॉर्म सहित जिला/राज्य प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए टेली-परामर्श प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं.

-मरीज गर्म पानी से गरारे कर सकते हैं या दिन में तीन बार भाप से सांस ले सकते हैं.

– अगर दवाएं लेने के बाद भी बुखार कम नहीं हो रहा है तो डॉक्‍टर से सलाह लेकर ही अन्‍य दवा लें.विज्ञापन

– अपने डॉक्‍टर परामर्श के बिना स्व-दवा, रक्त जांच या छाती एक्स रे या छाती सीटी स्कैन जैसी रेडियोलॉजिकल इमेजिंग के लिए जल्दबाजी न करें।

– हल्के रोग में स्टेरॉयड का संकेत नहीं दिया जाता है और इसे खुद नहीं लिया जाना चाहिए.

जब हो ऐसी परेशानी तो जरूर लेनी चाहिए मेडिकल मदद

– जब लगातार 3 दिनों तक बुखार 100 डिग्री से नीचे नहीं उतरे.

– सांस लेने में तकलीफ होने लगे.

– जब ऑक्‍सीजन लेवल 93 फीसदी या उससे नीचे आने लगे.

– सीने में दर्द या दबा महसूस हो.

– अधिक थकान लगे.

होम आइसोलेशन को कब खत्‍म करें?

दिशानिर्देशों के अनुसार होम आइसोलेशन के तहत मरीजों को तब इसे खत्‍म करने की इजाजत दी जाती है जब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के दिन से 7 दिन पूरे हो गए हों और तीन दिनों से बुखार ना आ रहा हो. लेकिन वे मास्क पहनना जारी रखेंगे. होम आइसोलेशन की अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा कोरोना टेस्‍ट कराने की कोई आवश्यकता नहीं है.

Punjab Elections: सीएम चन्नी के भाई ने थामा BJP का दामन

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चुनाव आयोग (Election Commission) के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद सभी रियासतों में सियासत तेज है. विधानसभा चुनाव के बीच राज्‍य के मुख्‍यमंत्री चरणजीत सिंह चन्‍नी के चचेरे भाई जसविंदर सिंह धालीवाल बीजेपी में शामिल हो गए. उन्‍होंने चंडीगढ़ा में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी की सदस्‍यता ग्रहण की है.


 
‘पंजाब की जनता चुनेगी मुख्यमंत्री, कांग्रेस आलाकमान नहीं’ 
पंजाब में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि जनता विधायकों को चुनती है और राज्य में वही अपना मुख्यमंत्री भी चुनेगी, कांग्रेस आलाकमान नहीं. सिद्धू का यह तल्ख जवाब पत्रकारों के इस सवाल पर आया कि 14 फरवरी को होने वाले मतदान के बाद पंजाब में पार्टी का मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा. सिद्धू ने कहा, आप लोगों (पत्रकारों) को किसने कह दिया कि पार्टी हाईकमान मुख्यमंत्री बनाएगा? किसने आपको कहा?

पंजाब की जनता ने पांच साल पहले भी विधायकों का चयन किया था. पंजाब की जनता ने ही निर्णय किया था कि कौन (नेता) विधायक बनेगा या नहीं और पंजाब की जनता ही कोई एजेंडा होने पर निर्णय करेगी. उन्होंने कहा, इसलिए अपने मनो-मस्तिष्क में गलतफहमी न पालें. पंजाब के लोग ही विधायक चुनेंगे और राज्य की जनता ही मुख्यमंत्री भी बनाएगी

क्या हर व्यक्ति के Fingerprints होते हैं अलग? जलने-कटने से बदल जाते हैं ये निशान!

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आज 21वीं सदी में हर चीज आधुनिक हो गई है. आज आप घर बैठे कश्मीर की खूबसूरत वादियों का नजारा ले सकते हैं, दूर देश में मौजूद अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से बात कर सकते हैं. ये सब स्मार्टफोन के चलते मुमकिन हो पा रहा है. वहीं अगर बात आपके स्मार्टफोन की सुरक्षा की करें तो यह भी महज एक टच से मुमकिन है. हमारे स्मार्टफोन आजकल फिंगरप्रिंट के इस्तेमाल से खुलते हैं.

हालांकि इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि अगर किसी दुर्घटना के चलते उनके हाथ में चोट लग जाए या हाथ जल जाए या इस पर एसिड गिर जाए तब उनका फोन कैसे खुल पाएगा? ऐसे में आपको बता दें कि आपके हाथ का फिंगरप्रिंट गहरी से गहरी चोट लगने के बाद भी नहीं बदलता है. यहां तक कि कोई घाव होने के बाद भी आपके हाथ का फिंगरप्रिंट वैसा ही रहता है.

दरअसल हर इंसान के हाथ की स्किन दो लेयर से बनती है. पहली लेयर को एपिडर्मिस और दूसरी लेयर को डर्मिस कहते हैं. ये दोनों लेयर एक साथ बढ़ती हैं और इन्‍हीं दोनों लेयर से मिलकर हमारे हाथों के स्किन पर फिंगरप्रिंट के उभार बनते हैं. दुनिया में मौजूद किसी भी इंसान का फिंगरप्रिंट किसी दूसरे इंसान से मैच नहीं करता है. यहां तक कि एक बार इंसान का फ‍िंगरप्रिंट बनने के बाद जिंदगी भर वह वैसा ही रहता है. 

बता दें कि जब बच्‍चा गर्भ में पल रहा होता है, उसी दौरान उसके फिंगरप्रिंट तैयार होने लगते हैं. वहीं अगर दुर्घटनावश किसी के हाथों में चोट लग जाती है और फिंगरप्रिंट गायब हो जाते हैं तो कुछ ही महीनों के अंदर वे फिर से उसी पोजिशन पर आ जाते हैं. बढ़ती उम्र के साथ भी इंसान के फिंगरप्रिंट में कोई बदलाव नहीं आता है.

18 साल की उम्र में ये लड़की बनी सेना में लेफ्टिनेंट, 80 दिन में किया 27 किलो वजन कम

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वीर और वीरांगनाओं का क्षेत्र कहे जाने वाले शेखावाटी के हर गांव के लोग सेना से हैं. इस बार झुंझुनूं के नावता गांव की 18 साल की बेटी ईशु लेफ्टिनेंट बनीं है. ईशु गांव की पहली लड़की है, जिसका सेना में किसी बड़े पद पर चयन हुआ है. ईशु यादव ने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में लेफ्टिनेंट के पद पर 17वीं रैंक हासिल की है. आज उन्होंने लखनऊ में ट्रेनिंग की शुरुआत की है.  ईशु के आर्मी जॉइन करने की कहानी भी हैरान करने वाली है. जिस नावता गांव से ईशु है वहां से करीब 20 से 25 लोग सेना में हैं. बचपन में उसने जब शहीदों के किस्से सुने और गांव में इनकी प्रतिमा देखी तो आर्मी जॉइन करने की इच्छा परिवार के सामने रखीं.

ज्यादा वजन की वजह से फिजिकल टेस्ट में आई मुश्किल
28 जुलाई 2021 को एग्जाम दिया और क्लियर कर लिया. 28 अगस्त को इंटरव्यू और फिजिकल टेस्ट हुआ. लेकिन 27 किलो वजन ज्यादा होने से फिजिकल में पास नहीं हो पाईं. घरवालों को भी लगता था कि इतना वजन कैसे कम होगा. जब उनका चयन हुआ तो वजन 79 किलोग्राम वजन था. फिजिकल टेस्ट में उन्हें ओवर वेट का पॉइंट करके रेफर कर दिया. इसमें 27 किलोग्राम वजन ओवरवेट कंट्रोल करने का टास्क दिया गया, लेकिन ये बड़ी चुनौती थी. 

मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर वजन कम किया
वजन कम करने के लिए ईशु ने गांव के ही सिद्ध बाबा मंदिर की सीढ़ियां चढ़नी शुरू की. ईशु ने बताया कि वजन कम करने के लिए रोजाना 880 सीढ़ियां चढ़ती और उतरतीं. इसके अलावा रोजाना 10 किलोमीटर तक दौड़ लगाना शुरू किया. डाइट का भी ध्यान रखा और दोपहर में एक चपाती के साथ सिर्फ जूस लिया. रिव्यू चांस में 40 दिन का और समय मिल गया. इस पर करीब 80 दिन में 27 किलो वेट कम कर फिजिकल भी क्वालिफाई कर लिया.

गांव वालों ने किया बेटी का स्वागत
लेफ्टिनेंट बनने के बाद गांववालों ने बेटी का स्वागत किया. इस गांव से अधिकांश युवा आर्मी में हैं. ईशु ने बताया कि मैं अकसर शहीदों के किस्से सुना करती थी. जब भी शहीदों की कहानियां और उनके बारे में पढ़ा-सुना तो मोटिवेशन मिला. ईशु ने बताया कि दादा प्रभाती लाल चाहते थे कि उनकी पोतियां डॉक्टर बनें. ईशु ने बताया कि ताऊ सुमेर सिंह, पापा जगदेव सिंह के मार्गदर्शन में 12वीं बायोलॉजी व मैथ्स एडिशनल से सीबीएसई बोर्ड से 2020 में 12वीं की परीक्षा दी. एमएनआईटी में प्रोफेसर रहे उनके फूफा आरपी यादव ने भी उन्हें पढ़ाया. ईशु ने मेडिकल एंट्रेस का एग्जाम भी दिया,लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ. हालांकि अब वह सेना में लेफ्टिनेंट बनकर नाम रोशन कर रही हैं

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