असल न्यूज़: राजधानी दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ोतरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को दिल्ली अभिभावक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में अभिभावकों ने शिक्षा निदेशालय (डीओई) के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
अभिभावकों ने आरोप लगाया, कि पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के कुछ निजी स्कूल बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के फीस बढ़ाकर वसूल रहे हैं और अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है।
शिक्षा विभाग को दी गई शिकायतों के अनुसार, कई स्कूलों ने बढ़ी हुई फीस न भरने पर छात्रों के नाम तक काट दिए हैं। इतना ही नहीं, कुछ छात्रों के रिपोर्ट कार्ड और प्रगति पत्र भी रोक लिए गए हैं, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
अभिभावकों का कहना है, कि वे पिछले करीब दो साल से इस मुद्दे को लेकर अधिकारियों के पास जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद स्कूल मनमानी और दबावपूर्ण तरीके अपनाते रहे हैं।
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इस बीच, मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह निजी स्कूलों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर 18 अप्रैल को सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में दिल्ली सरकार के हालिया फीस विनियमन कानून को चुनौती दी गई है।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने संकेत दिया कि मामले का जल्द निपटारा किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई स्कूल न्यायिक आदेशों का उल्लंघन करते हुए फीस बढ़ाता है, तो सरकार उसके खिलाफ अवमानना का मुकदमा दायर कर सकती है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है और सभी की निगाहें अब 18 अप्रैल को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।

