Thursday, April 2, 2026
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दिल्ली में किताब-यूनिफॉर्म पर नया नियम लागू

असल न्यूज़: दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा निदेशालय (DoE) ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। किताबों, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर अभिभावकों से जबरन वसूली और ‘मोनोपॉली’ खत्म करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है। नए शैक्षणिक सत्र से ही ये नियम लागू कर दिए गए हैं।


किताबों और यूनिफॉर्म पर नहीं चलेगी मनमानी

शिक्षा निदेशालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को तय दुकानों से महंगे दामों पर किताबें, कॉपियां, बैग, जूते और अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। अब साफ कर दिया गया है कि कोई भी स्कूल किसी खास दुकान या विक्रेता से खरीदारी के लिए बाध्य नहीं कर सकता।


सिर्फ निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबें ही मान्य

नए आदेश के अनुसार, स्कूल केवल उसी बोर्ड (CBSE/ICSE/राज्य बोर्ड) द्वारा तय पाठ्यक्रम की किताबें ही चला सकेंगे, जिससे वे संबद्ध हैं। अतिरिक्त या गैर-जरूरी किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाना अब पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
साथ ही, हर स्कूल को सत्र शुरू होने से पहले किताबों की सूची अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करनी होगी।


यूनिफॉर्म में 3 साल तक नहीं होगा बदलाव

हर साल यूनिफॉर्म बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए DoE ने आदेश दिया है कि एक बार तय की गई यूनिफॉर्म में कम से कम 3 साल तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, यूनिफॉर्म के कपड़े और डिजाइन की पूरी जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावक अपनी पसंद से कहीं से भी खरीद या सिलवा सकें।


कम से कम 5 दुकानों की सूची देना जरूरी

अब सभी निजी स्कूलों को अपने क्षेत्र की कम से कम 5 अलग-अलग दुकानों/विक्रेताओं के नाम, पते और फोन नंबर साझा करने होंगे।
इसका मकसद ‘एकाधिकार’ खत्म करना है, ताकि अभिभावकों को विकल्प मिल सके और वे अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी सामान खरीद सकें।

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‘No Profit, No Loss’ सिद्धांत की याद दिलाई

शिक्षा निदेशालय ने दोहराया है कि निजी स्कूल ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के सिद्धांत पर चलते हैं। स्कूल परिसर या स्कूल के नाम पर किसी भी तरह का व्यापारिक लाभ कमाना गैर-कानूनी है।


शिकायत पर होगी सख्त कार्रवाई

नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अभिभावक सीधे नोडल अधिकारी डॉ. राजपाल सिंह (उप निदेशक, शिक्षा) को शिकायत दर्ज करा सकते हैं। दोषी पाए जाने पर दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम 1973 के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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