भारतीय मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर ने पहली बार 93.03 रुपये का स्तर पार कर लिया है, जिससे आर्थिक मोर्चे पर चिंता बढ़ गई है।
मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती के चलते रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव के कारण रुपये में गिरावट देखी जा रही है।
डॉलर के इस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का सीधा असर आयात (Import) पर पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। इससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं निर्यात (Export) करने वाले सेक्टर को इससे कुछ राहत मिल सकती है, क्योंकि कमजोर रुपया भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि डॉलर इसी तरह मजबूत बना रहा, तो आने वाले दिनों में रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है।

