असल न्यूज़: हरियाणा में युवाओं की अचानक हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज दोनों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2020 से जनवरी 2026 के बीच राज्य में कुल 17,973 युवाओं की मौत हार्ट अटैक के कारण हुई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन आंकड़ों के आधार पर हर दिन औसतन 8 युवाओं की जान जा रही है, जो एक बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है।
साल-दर-साल बढ़ता ग्राफ
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मौतों में लगातार उतार-चढ़ाव के साथ बढ़ोतरी देखी गई है:
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2020 – 2,394 मौतें
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2021 – 3,188 मौतें
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2022 – 2,796 मौतें
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2023 – 2,886 मौतें
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2024 – 3,063 मौतें
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2025 – 3,255 मौतें
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जनवरी 2026 – 391 मौतें
2020 की तुलना में 2025 तक मौतों में करीब 35% की वृद्धि दर्ज की गई है।
जिलों में बड़ा अंतर, उठे सवाल
जिलावार आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं:
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यमुनानगर – 2,400+ मौतें
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रोहतक – 201 मौतें
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गुरुग्राम – 594 मौतें
एक ही राज्य में अलग-अलग जिलों के बीच इतना बड़ा अंतर होना कई सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे स्थानीय जीवनशैली, स्वास्थ्य सुविधाएं और जागरूकता स्तर जिम्मेदार हो सकते हैं।
कोविड या वैक्सीन से कनेक्शन?
सदन में जब इन मौतों को COVID-19 या वैक्सीनेशन से जोड़कर सवाल पूछा गया, तो सरकार ने साफ किया कि इस विषय पर अब तक कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया गया है।
यानी फिलहाल इन मौतों को सीधे कोविड या वैक्सीन से जोड़ना सही नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
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असंतुलित लाइफस्टाइल
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अत्यधिक मानसिक तनाव
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जंक फूड और खराब खानपान
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नींद की कमी
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छिपी हुई बीमारियां
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बिना विस्तृत रिसर्च के किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना मुश्किल है।

